Friday, September 29, 2023

जन-हस्तक्षेप जांच दल की रिपोर्ट: मेवात में हिंदू-मुस्लिम दंगे के लिए RSS लंबे समय से तैयार कर रही जमीन

नई दिल्ली। नूंह में सोमवार 31 जुलाई को आरएसएस के अनुषांगिक संगठनों बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित बृज मंडल जलाभिषेक यात्रा के दौरान भड़की हिंसा और उसके बाद हरियाणा व राजस्थान से लगे सीमावर्ती इलाकों में हो रही छिटपुट घटनाओं को देखते हुए जगह-जगह पंचायतें, सम्मेलन और सभा करके संघ-भाजपा सरकार प्रायोजित सांप्रदायिक हिंसा से लोगों को सावधान रहने का आगाह किया जा रहा है। हरियाणा में खाप पंचायतें हिंदू-मुस्लिम-सिख सम्मेलन करके समाज में भाई-चारा बनाने की कोशिश में लगी हैं।

इस कड़ी में सामाजिक संगठन ‘जन हस्तक्षेप’ ने एक 6 सदस्यीय जांच दल भेज कर नूंह के जमीनी हालात का अध्ययन करने का फैसला किया। जन हस्तक्षेप के जांच दल में वरिष्ठ पत्रकार सईद नकवी, जेएनयू के प्रोफेसर और जन हस्तक्षेप के संयोजक डॉ विकास बाजपेई, पत्रकार और जन हस्तक्षेप के सह संयोजक अनिल दुबे, पत्रकार आस्था, सतीश और प्रदीप शामिल थे। जांच दल ने 3 जुलाई गुरुवार को हिंसा ग्रस्त इलाकों पलवल और सोहना सहित कुछ अन्य इलाकों का दौरा किया। कर्फ्यू के कारण जांच दल नूंह नहीं जा सका।

जांच दल पलवल में ग्राम प्रधान ताराचंद, संयुक्त किसान मोर्चा के कार्यकर्ता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान, पलवल के अखिल भारतीय किसान महासभा के अध्यक्ष और ग्राम प्रधान चौधरी धर्मचंद, एडवोकेट शेर मोहम्मद, संयुक्त किसान मोर्चा कमेटी के सदस्य जफर यदुवंशी सहित दर्जनभर लोगों से बातचीत की और 31 जुलाई के बाद मस्जिदों, झुग्गियों, दुकानों पर हो रहे हमलों और आगजनी वाले स्थलों का मुआयना किया।

जन हस्तक्षेप जांच दल विभिन्न पक्षों से बातचीत के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि संघ-भाजपा की मनोहर लाल खट्टर सरकार बजरंग दल, विहिप और अन्य कट्टरपंथी संगठनों के साथ मिलकर मेव मुस्लिम बहुल इलाके मेवात में बीते कई वर्षों से मुस्लिम समुदाय के खिलाफ माहौल बनाने में जुटा हुआ है। नूंह और सोहना में 31 जुलाई को बृज मंडल जलाभिषेक यात्रा के दौरान बड़े पैमाने पर उपद्रव और हिंसा हो सकती है। इसकी पूरी सूचना राज्य सरकार के पास थी। ताजा घटनाक्रम को समझने के लिए बीते चार-पांच माह के घटनाक्रमों को जानना जरूरी है।

16 फरवरी, 2023 को गौ तस्करी के आरोप में राजस्थान के गांव लोहारू में रहने वाले 25 वर्षीय नासिर और 35 वर्ष के जुनेद का अपहरण कर हत्या कर दी गई थी और उनके शवों को बोलेरो गाड़ी में जला दिया गया था। इस मामले में राजस्थान पुलिस ने मोनू मानेसर सहित पांच लोगों को अभियुक्त बनाया था। मोनू को गिरफ्तार करने के लिए राजस्थान पुलिस जब मोनू के गांव पहुंची तो हरियाणा पुलिस ने उन्हें रोका और उल्टे पड़ोसी राज्य की पुलिस के ऊपर मुकदमा दर्ज कर लिया।

मोनू मानेसर के समर्थन में हिंदुत्ववादी संगठनों ने पंचायत भी बुलाई, जिसमें फैसला कराया गया था कि यदि मोनू को पकड़ने पुलिस उसके गांव जाएगी, तो अपने पैरों पर नहीं लौटेगी। मोनू का असली नाम मोहित है और वह मानेसर का रहने वाला है। बीते 10-12 वर्षों से वह बजरंग दल का कार्यकर्ता है। इसके अलावा वह काऊ टास्क प्रोटेक्शन फोर्स का भी सदस्य है।

इसके अलावा पिछले माह सिरोही गांव में एक मुस्लिम परिवार जो दूध का कारोबार करता था और 80 90 गाय पालता था। हिंदुत्ववादी संगठनों की भीड़ ने उसकी सारी गाय जब्त कर ली। इससे भी मेव मुसलमानों में भारी आक्रोश व्याप्त था। पिछले सप्ताह एक सामान्य मामले में गिरफ्तार मुस्लिम व्यक्ति की थाने में ही हत्या हो गई थी। इस तनावपूर्ण माहौल में मेवात में जलाभिषेक यात्रा का आयोजन रखा गया था।

यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों को शामिल होने और स्वयं यात्रा में रहने की घोषणा मोनू मानेसर और बजरंग दल से जुड़े बिट्टू बजरंगी ने 28-29 जुलाई को सोशल मीडिया पर की। यात्रा में शामिल होने का वीडियो खूब वायरल किया गया। इतना ही नहीं सोशल मीडिया पर मोनू और उसके समर्थक घोषणाएं कर रहे थे ‘हम शामिल होंगे और हमारा स्वागत माला फूल लेकर दामाद की तरह करना’। वहीं दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष से भी कुछ लोग सोशल मीडिया पर मोनू और बिट्टू बजरंगी को पलटवार संदेश भेज रहे थे। ‘आओ देखते हैं कैसे आते हो’। इस तरह दोनों ही समुदाय के अवांछित तत्व सोशल मीडिया पर नफरत फैला रहे थे, जिसकी पूरी जानकारी राज्य सरकार को थी।

स्थानीय निवासी और प्रत्यक्षदर्शी लोगों ने जनहस्तक्षेप को बताया कि एक समुदाय को भड़काने की निरंतर चल रही कोशिशों के बीच भाजपा जिला अध्यक्ष गार्गी कक्कड़ के नेतृत्व में ब्रज मंडल जलाभिषेक यात्रा सोमवार को निकली। यात्रा में लगभग डेढ़ हजार लोग नलहड़ शिव मंदिर में एकत्र हुए। यात्रा से पूर्व विहिप के राष्ट्रीय महामंत्री सुरेंद्र जैन ने मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नफरती भाषण दिए। यात्रा नलहड़ शिव मंदिर से सिंगार गांव जो 40 किलोमीटर है, निकलनी थी।

किसान नेता और ग्राम प्रधान ताराचंद ने बताया कि बृज मंडल जलाभिषेक यात्रा का कोई पुराना इतिहास नहीं है। यह बीते 3 वर्षों से निकल रही है। इस इलाके में 84 कोशी बृज यात्रा की परंपरा रही है। इस यात्रा के दौरान जाट और मेव समुदाय बड़े पैमाने पर खाने-पीने का लंगर चलाया करते थे। जलाभिषेक यात्रा की शुरुआत संघ, भाजपा, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और स्थानीय शिवसेना के लोगों ने की। बीते 2 वर्षों में इस यात्रा के दौरान कभी कोई व्यवधान नहीं पड़ा, लेकिन इस बार हिंदुत्ववादी संगठनों ने माहौल को पहले से जहरीला बनाना शुरू कर दिया था।

ग्राम प्रधान और किसान नेता चौधरी धर्मचंद्र ने बताया कि संघ परिवार ने हिंदी भाषी क्षेत्रों में 23 यात्राएं निकालने की घोषणा की थी। उसमें से नूंह की पहली यात्रा थी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि दोनों ही पक्ष तैयारी में थे। बजरंग दल और विहिप ने लाठी-डंडे और अन्य हथियार लोगों को वितरित किए थे। वहीं दूसरी ओर गौ तस्करी के आरोप में मारे गए नासिर और जुनैद के गांव लोहारू से भी 400-500 लोग आए थे। उन्होंने बताया कि मंदिर से जुलूस थोड़ा ही आगे बढ़ा तो दोनों तरफ अरावली की पहाड़ियां हैं।

मोनू और बिट्टू बजरंगी को खोजने के लिए जुलूस के आगे बड़ी संख्या में मुस्लिम युवक आ गए और वह जुलूस में शामिल गाड़ियों की तलाशी लेने लगे। दोनों पक्षों में कहासुनी हुई और पथराव होने लगा। जुलूस के पीछे भी बड़ी तादाद में मुस्लिमों का हुजूम जुट गया था। मेवात का यह इलाका मेव मुसलमान बहुल है। अराजक लोगों ने जुलूस में शामिल वाहनों को जलाना शुरू कर दिया। इस दौरान दोनों ही पक्षों से फायरिंग हुई, जिसमें दो होमगार्ड व दो अन्य मारे गए। जुलूस के साथ चल रही सीमित संख्या में पुलिस बल भी भाग निकला और लगभग 4 घंटे तक स्थिति अराजकता पूर्ण रही।

एडवोकेट शेर मोहम्मद ने जन हस्तक्षेप जांच दल को बताया कि इस घटना के बाद 25 से 50 की संख्या में विहिप और बजरंग दल के लोगों ने मुसलमानों की दुकानों और मस्जिदों पर हमला करना शुरू कर दिया। मस्जिद के बाहर खड़ी गाड़ियां जला दी। पीर वाली मस्जिद पर हमले किए गए। उन्होंने बताया कि बिना नंबर की 40-50 मोटरसाइकिल पर 100 से अधिक लड़कों ने रात को यह हमला किया। उनकी पुलिस से मुठभेड़ भी हुई और 15-20 लड़कों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

इसके बाद लगभग 200 लोगों की भीड़ ने थाने को घेर लिया और रात 10 बजे ऊपर से राजनीतिक दबाव डलवा कर गिरफ्तार लोगों को छुड़ा लिया। इसके तुरंत बाद उन्होंने नाज सिनेमा के सामने अरेहरिया मस्जिद भी जला दी। उन्होंने बताया कि सोमवार की घटना के बाद मंगल और बुधवार को 25-50 के झुंड में बजरंग दल और विहिप के लोग झुग्गी झोपड़ियों कबाड़ी की दुकान और मस्जिदों पर हमले और आगजनी करते रहे।

संयुक्त किसान मोर्चा कमेटी के सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता जफर यदुवंशी ने जांच दल को बताया कि आरएसएस और भाजपा हरियाणा में लगातार गांव-गांव बैठक करके लोगों को मुस्लिमों के खिलाफ भड़का रहे हैं लेकिन डेढ़ साल तक चले किसान आंदोलन ने इस पूरे इलाके में और खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में हिंदू मुस्लिम एकता की जड़ें बहुत मजबूत कर दी है। उन्होंने कहा कि जाट और मुस्लिम जिनमें मुख्यतः मेव मुसलमान हैं। उनके बीच कोई संदेह नहीं है। वह लंबे समय से परस्पर मिल जुल कर रहते रहे हैं और किसान आंदोलन ने उस संबंध को मजबूत किया है।

जन हस्तक्षेप की टीम ने अपने एकदिवसीय गहन जांच के दौरान पाया कि हरियाणा में कुछ चीजें बहुत चिंताजनक हो रही हैं। आम जनता में आपसी भाईचारा और प्रेम मजबूत हो रहा है और लोग समझ रहे हैं कि यह सब कुछ वर्ष 2024 के आम चुनाव और उससे पूर्व कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में हिंदू ध्रुवीकरण के लिए संघ परिवार अनेक तरह से षड्यंत्र रच रहा है।

सकारात्मक बात यह है कि सदियों से साथ रहने वाले हिंदू मुस्लिमों में आपसी भाईचारा के प्रयास भी तेज हो रहे हैं। जाटों की भाजपा-संघ से जबरदस्त नाराजगी है। आरक्षण आंदोलन में जाट युवाओं की मौत, किसान आंदोलन और फिर भाजपा संसद द्वारा महिला पहलवान खिलाड़ियों के साथ दुर्व्यवहार जैसी घटनाओं ने उन्हें भाजपा और संघ परिवार से दूर कर दिया है।

जांच दल के निष्कर्ष:

आरएसएस और भाजपा की केंद्र और राज्य की सरकारें अपने एक दशक के कार्यकाल में जनता की बुनियादी जरूरतों और उनकी आकांक्षाओं पर खरी नहीं उतर सकी है। बेतहाशा बढ़ रही महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार के कारण समाज का सभी तबका भारी संकट में है। आगामी चुनावों में भाजपा-आरएसएस सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के जरिए वोटों की फसल काटने की तैयारी कर रही है।

1. हिंदी भाषी क्षेत्रों खासतौर पर हरियाणा और उत्तर प्रदेश में धार्मिक और जातीय नफरत को बढ़ावा दिया जा रहा है। जांच दल का मानना है कि नूंह में जो कांड हुआ उसके पीछे बहुत खतरनाक मंसूबे थे। संघ-भाजपा कि खट्टर सरकार का षड्यंत्र था कि यात्रा में शामिल लोगों को मुस्लिम बहुल इलाके में बिना समुचित सुरक्षा के ले जाया जाए। इससे पहले मेव मुसलमानों को भड़काने के लिए हर संभव प्रयास महीनों से किए जा रहे थे। ऐसे में साजिशकर्ताओं को अंदाजा था कि कोई बड़ा कांड होगा और फिर हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश 2002 की गुजरात प्रयोगशाला जैसा धधक जाएगा।

2. षड्यंत्र भले विफल हो गया हो लेकिन अभी भी हिंदूवादी संगठनों के नेता गांव-गांव जाकर जाटों और अन्य जातियों को मुसलमानों के खिलाफ एकजुट कर भड़का रहे हैं।

3. जांच टीम ने सकारात्मक पहलू यह देखा कि 2013 में मुजफ्फरनगर में जाट-मुस्लिम हिंसा का कोई चिन्ह अब दोनों पक्षों में दिखाई नहीं देता। किसान आंदोलन ने उन्हें एक-दूसरे की जरूरत और सह अस्तित्व की माला में पिरो दिया है।

4. हरियाणा के मेव मुस्लिम बहुल इलाकों और जाट बहुल इलाकों के बीच लगातार पंचायतें हो रही हैं। कोट गांव में गुरुवार को दोनों समुदायों के 500 लोग शामिल हुए। इसमें रावत, जाट, मेव शामिल थे। इस पंचायत में हाजी साहब पूर्व जिला परिषद प्रमुख, बिलाल अहमद कोट के सरपंच आदि उपस्थित थे, जिन्होंने फैसला किया कि किसी भी कीमत पर भाईचारा खराब नहीं होने देंगे।

5. संयुक्त किसान मोर्चा ने जल्द से जल्द सद्भावना यात्रा निकालने की घोषणा की है।

(जन-हस्तक्षेप की जांच दल की रिपोर्ट।)

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