Sunday, October 17, 2021

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सरयू राय का इस्तीफे के बाद भाजपा पर हल्ला बोल

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झारखंड विधानसभा 2019 के इस चुनाव में भाजपा से बागी होकर जमशेदपुर पूर्वी से मुख्यमंत्री रघुवर दास के विरुद्ध निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले सरयू राय ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने राज भवन में राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से मिलकर उन्हें अपना इस्तीफा सौंपा।

राज्यपाल के निर्देश पर राजभवन सचिवालय ने शुक्रवार को ही शाम को उनका त्यागपत्र मुख्यमंत्री रघुवर दास को यथोचित आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया। सीएम इस्तीफा स्वीकार करते हैं तो वो इसे राज भवन को भेजेंगे और इस्तीफा स्वीकार करने की अनुशंसा करेंगे।

बता दें कि राज्यपाल को दिए महज डेढ़ लाइन के त्याग पत्र में सरयू राय ने इस्तीफा देने के किसी कारण का उल्लेख नहीं किया है। उन्होंने सिर्फ तात्कालिक प्रभाव से अपना इस्तीफा स्वीकार करने का अनुरोध राज्यपाल से किया है। इस्तीफा देकर राज भवन से निकलने के बाद उन्होंने मीडिया से कहा कि भाजपा से अलग होकर निर्दलीय चुनाव लड़ा था, इसलिए मंत्री पद से इस्तीफा देना उनका नैतिक दायित्व था।

उन्होंने यह भी कहा कि सही तो यह होता कि मुख्यमंत्री स्वयं उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर कर देते। सरयू राय के अनुसार, उन्होंने 17 नवंबर को ही फैक्स और ईमेल से अपना इस्तीफा राज भवन को भेज दिया था, लेकिन राजभवन ने 11 दिसंबर को स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा राज भवन को मिला ही नहीं था।

उन्होंने भाजपा की स्थिति के बारे में कहा कि 65 पार का नारा भाजपा ने बहुत सोच समझ कर दिया है। 65 पार के बाद की सीटों की संख्या यानी 16 से नीचे भाजपा की होगी। गठबंधन के बारे में उन्होंने कहा कि मुझे गठबंधन के बारे में कोई जानकारी नहीं है। मैं यह नहीं बता सकता कि उनको कितनी सीटें मिलेंगी।

सरयू राय ने संवाददाता सम्मेलन के माध्यम से पार्वती देवी द्वारा जमीन हड़पने के आरोप का खंडन किया। पार्वती देवी ने 2018 में इसकी शिकायत महिला आयोग से की थी। इसमें कहा गया था कि सरयू राय और उनके लोगों ने 83 डिसमिल जमीन हड़प कर चहारदीवारी बना ली है। सरयू राय के खिलाफ महिला आयोग द्वारा जांच कमेटी गठित की गई है। इस पर सरयू राय ने कहा कि महिला अयोग का काम रिवेन्यू से संबंधित नहीं होता। वे किस आधार पर मेरे खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि यह जमीन पांच लोगों ने मिल कर वर्ष 2000 में खरीदी थी। सभी ने 20-20 डिसमिल जमीन खरीदी थी, जिसे बाद में मैंने ले ली। इस जमीन को 1975 में सुमित्रा देवी ने राजेंद्र बड़ाईक से खरीदी थी। इसके बाद सुमित्रा देवी से धीरेंद्र सिंह ने खरीदी, धीरेंद्र सिंह ने बाद में सरयू राय समेत पांच लोगों को यह जमीन बेच दी।

सरयू राय ने कहा कि 1975 के बाद वो जमीन चार बार खरीदी और बेची गई है। साल 2018 में इसके विरोध का क्या कारण है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा है तो रिवेन्यू डिपार्टमेंट जो प्रॉपर अथॉरिटी है वहां कंप्लेन होना चाहिए। वहां से नोटिस होने के बाद मैं कागज के साथ जाऊंगा।

उन्होंने महिला आयोग की अध्यक्ष कल्याणी शरण पर आरोप लगाया कि उन्होंने संवैधानिक पद पर रहते हुए जमशेदपुर पूर्वी से भाजपा के पक्ष में प्रचार किया है। उन्हें लगा कि प्रचार कामयाब नहीं हुआ तो महिला आयोग से शिकायत दर्ज करवा दी। राय ने कहा कि न्यायिक पद पर बैठा हुआ आदमी अगर राजनीतिक षडयंत्र करेगा तो अच्छा नहीं होगा।

सरयू राय ने कहा कि मैं आयोग की चिट्ठी का इंतजार कर रहा हूं। आयोग अगर चिट्ठी भेजेगा तो मैं उस चिट्ठी का इस्तेमाल उनके खिलाफ ही करूंगा। उस चिट्ठी को लेकर मैं न्यायपालिका में जाउंगा। इसके अलावा मैं पांच साल में हुई कार्रवाई की भी मांग करूंगा कि इतने सालों में कितने कामों का निष्पादन किया गया और 2018 से पहले के कितने मामलों पर कार्रवाई नहीं हुई है, इसकी भी जांच होनी चाहिए।

कल्याणी शरण के बारे में कहा कि अब कल्याणी शरण मुझे बुलाएंगी या मैं उन्हें बुलाऊंगा यह तो समय बताएगा। उन्होंने साथ ही कहा कि कल्याणी शरण ने मुझे न्यौता दिया है मैं इस रिश्ते को अच्छे से निभाऊंगा। कल्याणी शरण ने संवैधानिक पद पर रहते हुए उनके खिलाफ प्रचार किया, जिसकी शिकायत प्रमाण के साथ उन्होंने निर्वाचन आयोग से की है। उन्होंने कहा कि यह तो न्यायालय में ही पता चलेगा कि उनका ऐसा करना नियम संगत है या नहीं।

सरयू राय ने अपने निष्कासन पर कहा कि मैंने जब प्रदेश के मुखिया के खिलाफ चुनाव लड़ने की सोची तभी यह जान चुका था कि मुझे पार्टी में नहीं रहना है। इसके बाद मुझे पार्टी में रहने से कोई लेना देना नहीं था। पर पार्टी ने मुझे निष्कासित किया।

उन्होंने कहा कि शायद प्रदेश कमेटी को यह नहीं पता था कि मैं राष्ट्रीय कार्य समिति का सदस्य हूं या था, जिसे प्रदेश कमेटी को निष्कासन का अधिकार ही नहीं है। यह अमित शाह के स्तर से होना था। उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि वे अब आजीवन निदर्लीय उम्मीदवार के तौर पर ही काम करेंगे।

सरयू राय ने कहा कि वे 16 और 17 दिसंबर को हेमंत सोरेन के लिए दुमका में प्रचार करेंगे। उसके बाद वे जरमुंडी में सीताराम पाठक के लिए प्रचार करेंगे। उन्होंने जानकारी दी कि उन्हें बेंगलुरु से किसी ने रांची के एक होटल में 10 ईवीएम हैकर्स के होने की सूचना दी, जिसकी जानकारी उन्होंने विनय कुमार चौबे को दे दी है। पर उन्होंने भी कहा कि मुझे भी ऐसा नहीं लगता कि कोई हैक हो पाएगा, या कोई अधिकारी ईवीएम को छूने की भी हिम्मत करेगा।

(रांची से जनचौक संवाददाता विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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