Sunday, May 22, 2022

तीर-धनुष लेकर सिलगेर कैंप के सामने ग्रामीणों का आंदोलन, राज्यपाल से मिलने जा रहे 10 लोग पुलिस हिरासत में

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जगदलपुर। छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुइया उइके से मुलाकात करने जा रहे 10 आदिवासियों को पुलिस ने हिरासत में लिया है।  बताया जा रहा है कि इन सभी आदिवासियों को कोंडागांव में पुलिस ने पकड़ा है। जिन लोगों को पुलिस ने पकड़ा है वे सिलगेर, पुसनार, सिंगारम में चल रहे आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे। मूलवासी बचाओ मंच ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इसकी जानकारी मीडिया को दी है। हालांकि इस संबंध में पुलिस की तरफ से अब तक कोई बयान सामने नहीं आया है। इधर, पुलिस कैंप के विरोध में सिलगेर में ग्रामीणों का आंदोलन अब भी जारी है। 

सुकमा और बीजापुर जिले की सरहद पर स्थित सिलगेर में पुलिस कैंप के विरोध में पिछले 9 महीने से ग्रामीण तंबू गाड़ कर आंदोलन में बैठे हुए हैं। वहीं शुक्रवार को तीर-धनुष समेत पारंपरिक हथियार लेकर ग्रामीण कैंप के सामने तक पहुंच गए थे। जिन्होंने एक बार फिर कैंप के सामने जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने कहा कि आदिवासियों की जमीन हड़पने नहीं देंगे। साथ ही सिलगेर के कैंप को हटाने की मांग भी करी है। राज्यपाल से मिलने जा रहे 10 ग्रामीणों को हिरासत में लेने का विरोध भी ग्रामीणों ने किया है।

ग्रामीण बोले-सड़क बनेगी तो मुश्किलें भी बढ़ेंगी

सिलगेर में आंदोलन में बैठे ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें न तो इलाके में पुलिस कैंप चाहिए और न ही पक्की सड़कें। यदि सड़क बनती है तो उनके लिए मुश्किलें बढ़ जाएंगी। जवान उन पक्की सड़कों के माध्यम से आसानी से गांव तक पहुंचेंगे और जंगल में लकड़ी लेने या फिर शिकार पर गए ग्रामीणों का फर्जी एनकाउंटर कर दिया जाएगा। या फिर उन्हें नक्सली बताकर गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया जाएगा।

मृतकों को 1-1 करोड़ रुपए का मुआवजा देने की मांग

सिलगेट में आंदोलन में बैठे ग्रामीणों ने कहा कि पुलिस की गोलियों से 3 लोगों की और भगदड़ में एक गर्भवती महिला की मौत हुई थी।  कई ग्रामीण घायल भी हुए थे। सरकार मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपए और घायलों को 50-50 लाख रुपए का मुआवजा दें। साथ ही सिलगेर में हुए गोलीकांड की न्यायिक जांच भी की जाए। 

 यह था सिलगेर का मामला

दरअसल, मई 2021 में नक्सल प्रभावित इलाके सिलगेर में नवीन पुलिस कैंप खोला गया था। यहां कैंप खुलने के दूसरे दिन ही इलाके के हजारों ग्रामीण आंदोलन में बैठ गए थे। इस बीच सुरक्षा बलों के साथ ग्रामीणों की झड़प हुई थी। ऐसे में जवानों ने फायरिंग भी खोल दी थी। जिससे गोली लगने से 3 लोगों की और भगदड़ में एक महिला की जान गई थी। पुलिस का कहना था कि, इस भीड़ में नक्सली भी मौजेद थे, जबकि ग्रामीणों ने मारे गए लोगों को निर्दोष आदिवासी बताया था।

(तामेश्वर सिन्हा स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

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