Wednesday, October 27, 2021

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जनता को तो पता चल गया, सरकार को भी उसकी जवाबदेही बता दीजिए मी लॉर्ड?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सार्वजनिक स्थानों पर लंबे समय तक कब्ज़ा कर के धरना प्रदर्शन नहीं किया जा सकता है। पर कितने समय तक धरना-प्रदर्शन करने के लिये सार्वजनिक स्थलों पर टिका रहा जा सकता है ? यह अवधि...

टाइम की शख्सियतों में शाहीन बाग का चेहरा

कहते हैं आसमान में थूका हुआ अपने ही ऊपर पड़ता है। सीएएए-एनआरसी के खिलाफ देश में चलने वाले शाहीन बाग समेत सैकड़ों आंदोलनों को बदनाम करने का सरकार ने जो रवैया अपनाया था उसका नतीजा उसे कुछ इसी रूप...

सफलता की मंजिल तक पहुंचाने के लिए जरूरी है सीएए विरोधी आंदोलन में दलितों और आदिवासियों की व्यापक भागीदारी

​इलाहाबाद। दिल्ली के शाहीनबाग की तर्ज़ पर यहां के रोशनबाग में भी महीने भर से अधिक समय से नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में आंदोलन जारी है। पर्दानशीन औरतें पूरी शिद्दत से डटी हुई हैं। दिन के पहले पहर...

रांची का शाहीन बाग बनता कडरू

रांची। 26 जनवरी 2020 को जब हमारा ‘गणतंत्र’ 71 साल का हो रहा था, ठीक उसी दिन लगभग 3:30 बजे शाम को मैं रांची के कडरू के हज हाउस के सामने पहुंचा जहां 20 जनवरी से ही केन्द्र सरकार...

जैनुलअबीदीन: शाहीनबाग़ का वो पुरुष जो 34 दिनों से है आमरण अनशन पर

देश-विदेश हर तरफ सिर्फ़ शाहीन बाग़ की चर्चा है। शाहीन बाग़ के नवप्रसूता, गर्भवती, जवां बच्चियों और बूढ़ी स्त्रियों की चर्चा है। 30 दिन की सबसे छोटी प्रदर्शनकारी से लेकर 90 वर्षीय बूढ़ी स्त्री तक शाहीन बाग़ में सिर्फ़ स्त्रियां ही स्त्रियां...

ग्राउंड रिपोर्ट-3: जो छुपा रहे हो अपनों से, अब वो दुनिया को बता रही हैं शाहीन बाग़ की औरतें

शाहीन बाग (नई दिल्ली)। शाहीन बाग आप जाइये। लगेगा आप लोकतंत्र की पाठशाला में पहुंच गए हैं। बच्चे, बूढ़े, जवान, औरत-मर्द, पढ़े-लिखे, अनपढ़ किसी से भी बात कीजिये। आपको पता चलता है कि ये 5 साल के दिमाग़ वाली...

शाहीन बाग़- एक गांधीवादी अनशन, साजिशें जिसके पीछे पड़ी हैं

शाहीन बाग (नई दिल्ली)। क्रूर और जनविरोधी सत्ता के विरुद्ध शाहीन बाग़ एक मिसाल बन गया है। शाहीन बाग़ की ही तर्ज पर अब पूर्वी दिल्ली के सीलमपुर, जाफ़राबाद, जनता कॉलोनी और वेलकम की स्त्रियों ने भी सीएए-एनआरसी के...

शाहीन बाग ग्राउंड रिपोर्ट-2: “प्रधानमंत्री देश की रक्षा करते हैं और ये दंगा फैला रहा है”

शाहीन बाग (नई दिल्ली)। हम जिसे लोकतंत्र कहते हैं दरअसल वो राजशाही को लपकने की हरदम कोशिश में है। जिसके गले ये सच अटके उसे एक बार शाहीन बाग़ ज़रूर जाना चाहिये। सरल भाषा में आपको पता चलेगा कि असली...

“क्या करेंगे हम कहीं और जाकर, यहीं पैदा हुए हैं तो यहीं दफन होंगे”

नई दिल्ली। जो 1947 में पाकिस्तान नहीं गए। जिन्होंने अपनी और अपनी पुश्तों की जान और विश्वास इस मुल्क़ के हवाले किया था। यही थी उनकी जन्मभूमि, कर्म भूमि और यहीं बा-हक़ उनकी खाक़ दफ़न है। भारत के उन्हीं...
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सुप्रीम कोर्ट में लखीमपुर केस : रैली में थे सैकड़ों किसान लेकिन चश्मदीद गवाह बने महज 23

उच्चतम न्यायालय में लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में कल चीफ जस्टिस एनवी रमना, जस्टिससूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की...
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