प्रो. चौथीराम यादव: अपने समय से मुठभेड़ करता योद्धा चला गया

“मैंने उसको जब-जब देखा, लोहा देखा, लोहे जैसा- तपते देखा- गलते देखा- ढलते देखा, मैंने उसको गोली जैसा चलते देखा!”…