Sunday, March 3, 2024

Faiz Ahmed Faiz

फैज़ अहमद फैज़ की कविता और प्रेम, देह, प्रतिरोध पर एक नज़रिया

'मुझसे पहली सी मोहब्बत मिरी महबूब न मांग'  फैज़ अहमद फैज़ की बेहद मशहूर नज़्म, इतनी मशहूर कि कुछ लोग इसे 'कालजयी' रचना कहते हैं, न जाने कितनी बार पढ़ी, गयी और सराही गई है। कुल मिलाकर इसे एक क्लासिक...

फ़ैज़ की जयंतीः ‘अब टूट गिरेंगी ज़ंजीरें, अब जिंदानों की खैर नहीं’

उर्दू अदब में फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ का मुकाम एक अजीमतर शायर के तौर पर है। वे न सिर्फ उर्दू भाषियों के पसंदीदा शायर हैं, बल्कि हिंदी और पंजाबी भाषी लोग भी उन्हें उतनी ही शिद्दत से मोहब्बत करते हैं।...

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नेशनल प्रेस कल्ब और प्रेस क्लब जर्नलिस्ट इंस्टीट्यूट ने कश्मीरी पत्रकार आसिफ सुल्तान की फिर से गिरफ्तारी की निंदा की

नई दिल्ली। नेशनल प्रेस क्लब की अध्यक्ष एमिली विलकिंस और नेशलन प्रेस क्लब जर्नलिज्म इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष गिल क्लीन...