Friday, July 1, 2022

genocide

अंग्रेजों के दमन और उसके प्रतिकार का प्रतीक है जलियांवाला बाग

13 अप्रैल 1919, बैसाखी के दिन लगभग 4:00 बजे जनरल डायर लगभग डेढ़ सौ सिपाहियों को लेकर जलियांवाला बाग में पहुंचा। वहां रौलेट एक्ट के खिलाफ एक जनसभा हो रही थी। बैसाखी पर दूर-दूर से आये लोग, दरबार साहिब...

हरिद्वार धर्मसंसद और जेनोसाइड वॉच की चेतावनी

हरिद्वार धर्म संसद में घृणावादी और भड़काऊ बयान देने वाले यति नरसिंहानंद को उत्तराखंड पुलिस से गिरफ्तार कर लिया है। पर यह गिरफ्तारी इस घृणासभा में भड़काऊ बयान देने के मामले में नहीं, बल्कि महिलाओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणियों...

हेट स्पीच और मुस्लिमों के नरसंहार के आह्वान के खिलाफ याचिका पर सुप्रीमकोर्ट जल्द सुनवाई को तैयार

उच्चतम न्यायालय हरिद्वार में पिछले दिनों हुए धर्म संसद कार्यक्रम में हेट स्पीच के मामले में जल्द सुनवाई करेगा। इस मामले को सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने उच्चतम न्यायालय के सामने उठाया है जिस पर उच्चतम न्यायालय ने सुनवाई...

देश के बीमार और घृणा से बजबजाते समाज में बदलने का खतरा

नरसंहार के आह्वान के बाद कल केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का एक बयान दिखा, जिसमें वे कह रहे हैं, धर्म संसद के बयानों को गंभीरता से लेने की ज़रूरत नहीं है। यह बयान तब आया, जब उस तथाकथित धर्म...

धर्म संसद 2020 में यति नरसिंहानंद के जरिये रची गयी थी दिल्ली सांप्रदायिक हमले की साजिश!

23-26 फरवरी, 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में अंजाम दिये गये जनसंहार की कड़ियां नहीं जोड़ी गईं। दरअसल जिनके इशारे पर उस सांप्रदायिक जनसंहार को अंजाम दिया गया था वो लोग सत्ता में क़ाबिज़ हैं और उस सांप्रदायिक हिंसा की...

हरिद्वार में हिंदुत्ववादियों ने मुस्लिम नरसंहार का किया आह्वान! अभी तक कोई कार्रवाई नहीं

17-19 दिसंबर तक हरिद्वार उत्तराखंड में आयोजित धर्म संसद में 'मुस्लिम जनसंहार' के लिये लोगों से अपील की गई। तीन दिनों तक चली धर्म संसद में मुसलमानों के खिलाफ नफ़रत भरे भाषण दिए गए और जनसंहार का समर्थन किया गया। इस...

ऑक्सीजन की कमी से मरीजों की मौत नरसंहार से कम नहीं: इलाहाबाद हाई कोर्ट

कोरोना के कठिन काल के दौरान होने वाली मौतों और सरकारी व्यवस्था से इलाहाबाद हाई कोर्ट खासा नाराज है। उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण से हालात बेहद खराब हैं। राज्य के तमाम अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी से कई...

पूंजीवाद जनसंहार का हथियार बन चुका हैः अरुंधति रॉय

(अरुंधति रॉय के कई परिचय हैं। वे बुकर पुरस्कार से सम्मानित लेखिका हैं; एक निबंधकार हैं, जिनकी नवीनतम रचना ‘आजादी’ पिछले साल ही प्रकाशित हुई है; और वे एक राजनीतिक कार्यकर्ता भी हैं। भारत में रहने वाली वह ऐसी लेखिका...

देश की एकता के लिये अभिशाप हैं धर्म और जाति से प्रेरित दंगे

धर्म के नाम पर हुए उन व्यापक दंगों या नर संहारों को याद रखा जाना चाहिए। उन्हें याद रखना इसलिए भी ज़रूरी है कि ताकि धर्मान्धता या अन्य पागलपन के दौर में हम, जो अक्सर भूल जाते हैं कि...

हमेशा के लिए शांत हो गयी गरीबों की एक वेशकीमती आवाज, नहीं रहे जस्टिस होसबेट सुरेश

नई दिल्ली। 2002 के गुजरात नरसंहार समेत हिंसा और मानवाधिकारों के हनन की विभिन्न घटनाओं की जाँच करने वाले आयोगों में शामिल रहे मशहूर एक्टिविस्ट और बॉम्बे हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज होसबेट सुरेश का गुरुवार रात को 91...
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ग्राउंड रिपोर्ट : नाम, नमक और निशान पाने के लिए तप रहे बनारसी नौजवानों के उम्मीदों पर अग्निवीर स्कीम ने फेरा पानी 

वाराणसी। यूपी और बिहार में आज भी किसान और मध्यम वर्गीय परिवार के बच्चे किशोरावस्था में कदम रखते ही...
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