अल अक्सा मस्जिद पर लगभग रोजाना इस्राइली हमलों, कब्जे वाले वेस्ट बैंक में अवैध सेटलर हिंसा के प्रतिसाद और फिलिस्तीन के सवाल को “चर्चा में लाने के लिए” हमास के 7 अक्टूबर के एक्शन को दो साल हो चुके हैं।
उस कार्रवाई और इस्राइली सेना के बेतरतीब प्रतिसाद, जिसमें उसका विवादास्पद ‘हैनीबल निर्देश’ शामिल था, में 1200 लोगों की जान गई जिनमें कई इस्राइली सैनिक और नागरिक थे।
इसके बाद, न रुकने वाले इस्राइली जनसंहार ने गज़ा, जो 2005 से ज़मीन, समुद्र और आकाश से इस्राइल से घिरा हुआ है, को एक ऐसे तबाह क्षेत्र में बदल दिया है कि दुनिया स्तब्ध होकर देखती रह गई है।
पूरा इलाका तबाह हो चुका है, इसका इंफ्रास्ट्रक्चर तहस-नहस हो चुका है और नागरिक जीवन बर्बाद हो चुका है। अस्पताल, स्कूल, जल प्रणालियाँ बिखर चुकी हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस्राइल ने 67000 फिलिस्तीनियों को मार डाला है, जिनमें अधिकतर महिलाएं और बच्चे हैं। वास्तविक संख्या और भी बड़ी हो सकती है।
इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस, संयुक्त राष्ट्र की प्रमुख न्यायिक इकाई ने पाया कि संभवत: इस्राइल के कृत्यों को जनसंहार माना जा सकता है, जबकि जनसंहार विद्वानों की प्रमुख संस्था एसोसिएशन ऑफ जेनोसाइड स्कालर्स ने औपचारिक रूप से घोषित किया है कि इस्राइल ने गज़ा में जनसंहार किया है।
संयुक्त राष्ट्र की एक हालिया रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि इस्राइल गज़ा में फिलिस्तीनियों का जनसंहार कर रहा है।
इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट ने पहले से इस्राइली प्रधान मंत्री नेतन्याहू और उनके पूर्व रक्षा मंत्री के खिलाफ गिरफ़्तारी का वारंट जारी किया है।
इस्राइल को बचाने के लिए छह वीटो
फिलिस्तीनियों पर कहर ढहाए जाने की इस पूरी अवधि में अमेरिका इस्राइल के पीछे खड़ा है।
आलोचक कहते हैं कि वाशिंगटन में अधिकारी अक्सर गज़ा के हालात पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं पर वह चिंताएं तेल अवीव को हथियारों की आपूर्ति को सीमित करने में नहीं बदल पा रहीं।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका ने अक्टूबर 2023 से छह बार अपना वीटो इस्तेमाल कर ऐसे प्रस्तावों को रोका है जिनका उद्देश्य गज़ा में इस्राइल द्वारा जारी जनसंहार रोकना या गज़ा में मानवीय पहुँच सुनिश्चित करना था।
अंतिम वीटो सितंबर 2025 में इस्तेमाल किया गया जब वाशिंगटन ने तुरंत सीजफायर की पुकारों को खारिज किया। हर वीटो ने इस आलोचना को जन्म दिया है कि इस्राइल को वैश्विक जवाबदेही से बचाया जा रहा है।
पर्यवेक्षकों के अनुसार इस कूटनीतिक ढाल ने इस्राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के गज़ा में आक्रमण को नॉर्मलाइज़ करने में मदद की है। नेतन्याहू की नीति में भारी शहरी युद्ध, बहु विस्फोट और समूची बस्तियों को जमींदोज करना शामिल रहा है।
अक्टूबर 2023 से इस्राइल को 21 बिलियन की अमेरिकी सैन्य सहायता मिल चुकी है। इस फन्डिंग में युद्ध सामग्री, गोलाबारूद और मिसाइल रक्षा प्रणालियाँ शामिल हैं जिससे जनसंहार जारी है।
पिछले साल, वाशिंगटन ने बड़ा हथियार सौदा मंजूर किया जिसमें आधुनिक फाइटर जेट और सटीकता से निर्देशित बम शामिल थे। यह दीर्घावधि समझौतों के तहत गारंटीशुदा वार्षिक 3.8 बिलियन पैकेज से अलग था।
इस दौरान गज़ा में भोजन की कमी ने 20 लाख की आबादी को प्रभावित किया है और लगभग आधी आबादी अकाल और कुपोषण का जोखिम झेल रही है।
अस्पताल रक्त, इंसुलिन, चिकित्सा आपूर्तियों की कमी से जूझ रहे हैं और घायलों का इलाज नहीं हो पा रहा। यह भयावह त्रासदी है।
हथियारों की आवक जारी है
जनवरी 2024 में पाँच वर्षीय हिन्द राजब गज़ा शहर में मारी गई थी जब इस्राइली बलों ने उसके परिवार की कार पर सैकड़ों गोलियां चलाईं। रिश्तेदारों के शवों के बीच फंसी बच्ची ने फोन पर रेड क्रेसेंट से मदद मांगी। उसे ढूँढने के लिए भेजे गए बचाव दल के लोग भी मारे गए।
संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने घटना को संभावित युद्ध अपराध माना, जो इस्राइल के आम नागरिकों को निशाना बनाने के व्यापक तौर-तरीके का प्रतीक था।
इसके कुछ सप्ताह बाद ही 29 फरवरी को इस्राइली सैनिकों ने उत्तरी गज़ा में सहायता ट्रक के पास जुटी भीड़ पर गोलियां चलाईं जिसमें 118 लोग मारे गए और 760 से ज्यादा घायल हुए।
संयुक्त राष्ट्र ने इसे कत्लेआम करार दिया और इसे इस्राइल के भुखमरी को युद्ध के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने से जोड़ा।
अप्रैल में आक्रोश और बढ़ा जब वर्ल्ड सेंट्रल किचन काफिले पर एक इस्राइली एयर स्ट्राइक में कई अंतर्राष्ट्रीय सहायताकर्मी मारे गए, जिनमें अमरीका, यूनाइटेड किंगडम और ऑस्ट्रेलिया के नागरिक शामिल थे।
विश्व के नेताओं ने हमले को अंतर्राष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन माना। हमले के कारण कई मानवीय संस्थाओं को इलाके में अपना कार्य बंद करने पर मजबूर होना पड़ा।
विख्यात लेखक और इतिहास के प्रोफेसर डेविड गिब्स ने कहा, “इस्राइल को अमेरिका की आर्थिक और सैन्य सहायता, जो सत्तर के दशक से चल रही है और अमरीकी करदाता की जेब से आती है, को न्यायोचित ठहराना कइयों की समस्या बन गई है। इसे न्यायोचित्त ठहराना हमेशा से मुश्किल रहा है, खासकर यह देखते हुए कि इस्राइल अमीर देश है और पैसे का इस्तेमाल वह अपने वेस्ट बैंक और गज़ा पट्टी में अवैध कब्जे के लिए कर रहा है।”
इस तरह की आलोचना के बावजूद, हथियारों का प्रवाह विस्तारित ही हुआ है। अगस्त 2024 में वाशिंगटन ने बोइंग से 50 नए एफ-151ए फाइटर जेट और हजारों एआईएम-120 एएमआरएएएम एयर टू एयर मिसाइल की बिक्री को मंजूर किया।
वर्ष के अंत तक इस्राइल को 32000 टैंक कारतूस, 50,000 मोर्टार राउन्ड और दर्जनों भारी वाहन और टैंक ट्रेलर मिल चुके थे।
अमेरिका ने जेडीएएम, हेलफायर मिसाइल और कैटरपिलर डी9 बुलडोजर भिजवाना मंजूर किया जिनका इस्तेमाल गज़ा में होना था।
जनता का बदलता मिजाज
युद्ध शुरू होने के बाद के दो वर्षों में अमरीका में जनता के मिजाज में काफी परिवर्तन आया है।
इस्राइल के लिए सहानुभूति, कम होने लगी है, खासकर युवा अमेरिकियों और डेमोक्रेटस में।
अगस्त 2025 में गैलप सर्वेक्षण के अनुसार अमरीकियों के केवल 32 फीसदी को गज़ा में इस्राइल की कार्रवाई मंजूर थी, जो 2023 में 50 फीसदी था। साठ फीसदी को यह कार्रवाई अस्वीकृत थी।
सितंबर 2025 में न्यूयॉर्क टाइम्स\सिएना सर्वे ने पाया कि प्रतिसाद देने वाले लोगों में 53 फीसदी ने इस्राइल को अतिरिक्त मदद का विरोध किया और 40 फीसदी ने माना कि इस्राइल जानबूझकर नागरिकों को निशाना बना रहा है।
अमरीका विदेश नीति विद्वान डेविड लेवीन के अनुसार “भयावह तस्वीरें/वीडियो इसका कारण हैं। कॉलेज छात्रों में फिलिस्तीनियों के प्रति प्रगतिशील कैम्पस संस्कृति के कारण पहले भी समर्थन रहा है। दुनिया ने जब भयावह तस्वीरें देखना शुरू किया, तो धारणा प्रबल होती गई और विरोध प्रदर्शन अपरिहार्य बन गए।”
मिजाज में बदलाव सर्वाधिक 35 वर्ष से कम आयु के लोगों में है। ताज़ा पीईडब्ल्यू डाटा के अनुसार युवा अमरीकियों का 70 फीसदी इस्राइल को सही नहीं मानता है और आधे से अधिक फिलिस्तीनियों के प्रति ज्यादा सहानुभूति रखते हैं।
ब्रूकिंग्स अध्ययन में भी इसी तरह के रुझान देखे गए हैं और हर स्तर पर मोहभंग हुआ है।
गिब्स के अनुसार कई युवा रिपब्लिकन भी इस्राइल समर्थक एजंडा के खिलाफ होने लगे हैं, खासकर सब्सिडी पहलू को लेकर। वह कहते हैं, “राजनीतिक गलियारे के दोनों तरफ के लोग अपनी आँखों से भयावह वीडियो देख पा रहे हैं कि इस्राइल वास्तव में गज़ा में क्या कर रहा है।”
अब सबकी नजरें गज़ा में जनसंहार बंद करने के लिए ट्रम्प के 20 बिंदुओं वाले प्लान पर होने वाली वार्ता पर लगी हैं।
जहां, हमास ने करार के कुछ हिस्सों पर सहमति दर्शाई है, वहीं इस्राइल, जो पहले के सुलह समझौतों को नाकाम करता आ रहा है, हमलों को रोकने के ट्रम्प के निर्देश के बावजूद फिलिस्तीनियों और उनकी बस्तियों पर बमबारी जारी रखे हुए है।
(टीआरटी वर्ल्ड से साभार। अनुवाद : महेश राजपूत)