Friday, July 1, 2022

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हिंदी पट्टी कैसे हुई गोबर पट्टी में तब्दील?

5 दिन पहले फाइनेंशियल टाइम्स में प्रकाशित बाथ विश्वविद्यालय के संतोष मेहरोत्रा का यह लेख, अंग्रेजी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। सभी प्रमुख टेलीविजन चैनलों ने कहीं न कहीं इस विषय पर प्रोफेसर मेहरोत्रा के गहन...

देश के लिए विनाशक साबित हो रहा है मोदी सरकार का ‘विकास’

सन 2022, इलेक्शन के दंगल का वर्ष है और यह देश की दशा एवं दिशा को निर्धारित करेगा। शब्दों के बाण अभी से चलने शुरू हो गए हैं। विकास इलेक्शन का प्रमुख मुद्दा होगा-होना भी चाहिए। विकास, प्रधानमंत्री मोदी जी के...

मुस्लिम जनसंख्या विस्फोट का मिथक

जनसांख्यिकी विशेषज्ञ बताते हैं कि जनसंख्या परिवर्तन तीन जनसांख्यिकीय कारकों उर्वरता, मृत्यु दर और प्रवास द्वारा निर्धारित किया जाता है, न कि केवल प्रजनन क्षमता से। आपके पास उच्च प्रजनन दर हो सकती है, लेकिन यदि आपकी मृत्यु दर...

जनसंख्या नियंत्रण के बेसुरे राग की हकीकत

किसी देश की बड़ी आबादी बेशक उसके लिए ताकत या वरदान मानी जाती है, लेकिन उस आबादी का अगर सदुपयोग न हो तो वह अभिशाप साबित होती है। इस समय तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या सिर्फ भारत के लिए...

अर्थव्यवस्था का रसातलीकरण जारी! जीडीपी -7.3 फीसद पर पहुंची

पिछले सात साल के मोदी सरकार के गुड गवर्नेंस के सातवें साल में देश ने इतनी तरक्की की कि जीडीपी माइनस सात दशमलव तीन फीसद पर पहुंच गयी है। पिछले 40 साल में अर्थव्यवस्था सबसे खराब दौर से गुजर रही है। फाइनेंशियल...

यह नग्न बाजारवाद का बेशर्म परीक्षण है!

इन दिनों वैसे तो अर्थव्यवस्था के क्षेत्र से आ रही लगभग सभी खबरें निराश करने वाली हैं, लेकिन सबसे बुरी खबर यह है कि आम आदमी को महंगाई से राहत मिलने के कोई आसार नहीं हैं। अनाज, दाल-दलहन, चीनी,...

भारत में बेरोजगारी के दैत्य का आकार

1990 के दशक की शुरुआत से लेकर 2012 तक भारतीय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में उच्च वृद्धि वाली अवधि के दौरान मुझे चिली (1973) में दक्षिणपंथियों के कब्जे के बाद से सीआईए की मेहरबानी से दक्षिणी अमेरिका में सत्ता...

-23.9% विकास दर के साथ मुंह के बल गिरी जीडीपी! क्या है इस अर्थशास्त्र के पीछे का गणित?

नई दिल्ली। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय जब वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल, मई और जून का जीडीपी डाटा रिलीज करने जा रहा था तो यह माना जा रहा था कि जीडीपी में बड़े स्तर पर गिरावट...

आत्मनिर्भर भारत के बहाने अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ती सरकारें

आज कोरोना महामारी के लगातार बढ़ते प्रभाव के कारण एक ओर देश की सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षिक स्थिति बद से बदतर बनती जा रही है तो वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने आत्मनिर्भरता की घोषणा के द्वारा जनता के...

सक्षम अर्थशास्त्री के बगैर चल रही है भारतीय अर्थव्यवस्था

हर कोई अर्थशस्त्री है - घरेलू बजट तैयार करने वाली गृहणी से लेकर दूध बेचने वाले गोपालकों तक और पुर्जे बनाने वाले छोटे उद्यमी से लेकर बड़े भवन निर्माता तक, जो बड़े-बड़े अपार्टमेंट बना कर बेचते हैं। इन सभी को चाहे मजबूरीवश, खेल...
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ग्राउंड रिपोर्ट : नाम, नमक और निशान पाने के लिए तप रहे बनारसी नौजवानों के उम्मीदों पर अग्निवीर स्कीम ने फेरा पानी 

वाराणसी। यूपी और बिहार में आज भी किसान और मध्यम वर्गीय परिवार के बच्चे किशोरावस्था में कदम रखते ही...
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