Saturday, June 10, 2023

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गांधी की दांडी यात्रा-4: देशवासियों की रगों में खून बनकर दौड़ने लगा नमक सत्याग्रह

12 मार्च, 1930 को सुबह 6 बजकर 10 मिनट पर, गांधी, प्रभाशंकर पटानी, महादेव देसाई और अपने सचिव प्यारेलाल के साथ, अपने कमरे से बाहर आए। वे शांत और आत्मविश्वास से भरे दिख रहे थे। उन्होंने प्रार्थना की, अपनी...

बहुजन ढो रहे हैं हिंदुत्व की कांवड़

प्रयागराज। बड़े-बड़े बैनरों से सजा डीजे, मालवाहक वैन और ट्रैक्टरों पर निकलने वाली कांवड़ यात्रा सावन के पहले पाख के साथ ही खत्म हो गई। इसके साथ ही उत्पात, अव्यवस्था और सड़कों पर भगवा वर्चस्व का एक चैप्टर भी...

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अन्याय के 1000 दिन, प्रतिरोध और आंदोलन के हजार दिन!

नई दिल्ली। “यह 1000 दिनों की कैद के साथ-साथ 1000 दिनों का प्रतिरोध भी है। उमर खालिद यह सुनकर...