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पुण्यतिथि पर विशेषः साहिर का ‘वह सुबह कभी तो आएगी…’ बन गया था मेहनतकशों का तराना

साहिर लुधियानवी एक तरक्कीपसंद शायर थे। अपनी ग़ज़लों, नज़मों से पूरे मुल्क में उन्हें खूब शोहरत मिली।… Read More

पूंजी की सभ्यता-समीक्षा के कवि मुक्तिबोध

मुक्तिबोध गहन संवेदनात्मक वैचारिकी के कवि हैं। उनके सृजन-कर्म का केंद्रीय कथ्य है-सभ्यता-समीक्षा। न केवल कवितायें बल्कि… Read More

कवि अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं में नहीं दिखते स्त्री, दलित, वंचित और श्रमिक

‘हिंदू तन-मन, हिंदू जीवन, रग रग हिंदू मेरा परिचय’ ये पंक्तियां भाजपा के सबसे उदार समझे जाने… Read More

चंद्रकांत देवताले की पुण्यतिथिः ‘हत्यारे सिर्फ मुअत्तिल आज, और घुस गए हैं न्याय की लंबी सुरंग में’

हिंदी साहित्य में साठ के दशक में नई कविता का जो आंदोलन चला, चंद्रकांत देवताले इस आंदोलन… Read More

रंज यही है बुद्धिजीवियों को भी कि राहत के जाने का इतना ग़म क्यों है!

अपनी विद्वता के ‘आइवरी टावर्स’ में बैठे कवि-बुद्धिजीवी जो भी समझें, पर सच यही है, इत्ते बड़े… Read More

मैंने वरवर राव की आंखों में देखा उत्पीड़ित मनुष्यता के लिए अथाह पीड़ा: ऑक्सफोर्ड की एक छात्रा का संस्मरण

वरवर राव से पहली मुलाकात के समय मैं शोध छात्रा थी। यह 2018 की गर्मियों का दिन… Read More

पुण्यतिथि पर विशेष: ‘नीरज’ तो कल यहां न होगा, लेकिन उसका गीत-विधान रहेगा

‘‘कहानी बन कर जिए हैं इस जमाने में/सदियां लग जाएंगी हमें भुलाने में/आज भी होती है दुनिया… Read More