लोकतंत्र का प्रहरी बन गया है डॉ. रत्नाकर का कैनवास
जैसे-जैसे डा. रत्नाकर लाल की पुरानी-नई कलाकिृयां मेरी नज़रों से गुज़रती जाती हैं वैसे-वैसे कला को समझने में बिल्कुल ही नादान मेरी अक़्ल, अनुभूति, आवेग, अचरज और [more…]
जैसे-जैसे डा. रत्नाकर लाल की पुरानी-नई कलाकिृयां मेरी नज़रों से गुज़रती जाती हैं वैसे-वैसे कला को समझने में बिल्कुल ही नादान मेरी अक़्ल, अनुभूति, आवेग, अचरज और [more…]