Thursday, January 20, 2022

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लोकतंत्र का प्रहरी बन गया है डॉ. रत्नाकर का कैनवास

जैसे-जैसे डा. रत्नाकर लाल की पुरानी-नई कलाकिृयां मेरी नज़रों से गुज़रती जाती हैं वैसे-वैसे कला को समझने में बिल्कुल ही नादान मेरी अक़्ल, अनुभूति, आवेग, अचरज और संभावनाओं की दुनिया में डूबती चली जाती है। ये दुनिया सिखा रही है मुझे। कलाकार...

राजधानी के प्रदूषण को कम करने में दो बच्चों ने निभायी अहम भूमिका

दिल्ली के दो किशोर भाइयों के प्रयास से देश की राजधानी में प्रदूषण का मुद्दा गरमा गया है। सरकार से लेकर नगर निगम और अदालत तक इस मुद्दे पर सक्रिय हो गई हैं और कई कदम उठाकर गैस चैंबर...

भारत के किसानों ने दिखायी दुनिया को कारपोरेट के खिलाफ लड़ाई की राह

19 नवंबर, 2021 इक्कीसवीं सदी के इतिहास में जनता के संघर्षों की विजय का महापर्व बन गया है। भारत के किसानों और भारत के लोकतंत्रिक जन-गण ने विश्व के मेहनतकश  जनगण के सहयोग से विश्व विजयी कार्पोरेट पूंजी के...

आंध्र प्रदेश में तीन नहीं केवल एक राजधानी अमरावती रहेगी

आंध्र प्रदेश सरकार ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय को सूचित किया है कि राज्य के लिए तीन प्रशासनिक राजधानियों के निर्णय को वापस लिया जा रहा है। आंध्र प्रदेश के महाधिवक्ता सुब्रह्मण्यम श्रीराम ने सोमवार को उच्च न्यायालय को...

नेहरू ही हैं आधुनिक भारत के निर्माता

हमारे देश के कुछ संगठन, विशेषकर संघ परिवार के सदस्य, जब भी सरदार वल्लभभाई पटेल की चर्चा करते हैं तब उनके बारे में दो बातें अवश्य कहते हैं। पहली यह कि सरदार पटेल आज के भारत के निर्माता हैं...

किसान आंदोलन तैयार कर रहा है बदलाव की नई जमीन

कल के टेलिग्राफ में प्रभात पटनायक का एक लेख है — A Promethian moment ( The farmer’s agitation challenges theoretical wisdom)। बंधन से मुक्ति का क्षण; किसानों के आंदोलन ने सैद्धांतिक बुद्धिमत्ता को ललकारा है। जाहिर है, यह किसान आंदोलन...

तालिबान का दसवीं प्रांतीय राजधानी गजनी पर कब्जा, सरकार ने की सत्ता में भागीदारी की पेशकश

तालिबान सशस्त्र समूह ने राजधानी काबुल से लगभग 130 किमी (80 मील) दक्षिण-पश्चिम में गजनी प्रांत की राजधानी ग़जनी पर कब्जा कर लिया है। यह कुछ ही दिनों में तालिबानी कब्जे में जाने वाली 10वीं प्रांतीय राजधानी है। गज़नी के...

देश के लोकतांत्रिक वजूद के लिए खतरा हैं आरएसएस और बीजेपी: अखिलेंद्र

देश अपने राजनीतिक व सांस्कृतिक जीवन के सबसे बुरे दौर में है। मोदी सरकार के केन्द्रीय सत्ता पर काबिज होने के साथ देश में गुणात्मक परिवर्तन शुरू हुए। आज वैश्विक पूँजी और बड़ी भारतीय पूंजी ने राज्य पर अपनी...

आडंबर, अंधविश्वास और शोषण के बिल्कुल खिलाफ थे शहीद-ए-आजम भगत सिंह

शहीद-ए-आजम भगत सिंह ने स्वतंत्रता से पूर्व कांग्रेस की पूंजीवादी व सामंतवादी नीतियों के खिलाफ जमकर लिखा था। एक लेख में उन्होंने लिखा था कि समाज के प्रमुख अंग होते हुए भी आज मजदूरों और किसानों को उनके प्राथमिक...

ट्रेन में न जाति न मज़हब!

यह अकेला हिंदुस्तान ही है, जहाँ ट्रेन के सफ़र में हम एक दूसरे के इतना करीब आ जाते हैं, कि संकोच संकोच में ही अगले के बारे में सब कुछ जान जाते हैं कोविड के पहले एक बारमैं और...
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ब्रिटिश पुलिस से कश्मीर में भारतीय अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग

लंदन। लंदन की एक कानूनी फर्म ने मंगलवार को ब्रिटिश पुलिस के सामने एक आवेदन दायर कर भारत के...
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