Sunday, October 17, 2021

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एनएचआरसी अध्यक्ष जस्टिस अरुण मिश्रा ने पीएम मोदी की तारीफ में फाड़ दिए शर्म के सारे पर्दे

एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह कहते हुए विपक्ष पर निशाना साधा है कि कुछ चुनिंदा लोग अपने रवैये से मानवाधिकार के नाम पर देश की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उनकी हाँ में हाँ मिलाते हुए...

आलोचकों को चुप कराने के लिए भारत में एजेंसियां डाल रही हैं छापे: ह्यूमन राइट्स वॉच

न्यूयॉर्क। ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा है कि भारत सरकार मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और सरकार के दूसरे आलोचकों को चुप कराने के लिए कर चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के राजनीतिक रूप से प्रेरित आरोपों का इस्तेमाल कर रही है। सितंबर 2021 में, सरकार के वित्त...

छत्तीसगढ़:आदिवासियों ने शुरू की प्रदेश स्तरीय आर्थिक नाकेबंदी

कांकेर (बस्तर)। आदिवासी समाज ने सोमवार को जिले के नेशनल हाइवे 30 कुलगाँव और चारामा के पास बैठ कर अपने प्रदेश स्तरीय आर्थिक नाकेबंदी की शुरुआत की। चारामा में आदिवासियों के जमा होने की वजह से मालगाड़ियों के साथ...

खौफ़जदा हैं महिलाएं लेकिन तालिबान से लड़ने का जज़्बा कायम!

तालिबान की वापसी से महिलाएं सबसे ज्यादा खौफ़जदा हैं, क्योंकि बीते दिनों कुछ प्रांतों पर कब्जे के बाद से ही उसके नेताओं ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया था। उन्होंने जुलाई की शुरुआत में बदख्शां और तखर स्थानीय...

कैसे आएगा पुलिस के हैवानी चेहरे में बदलाव?

"पुलिस स्टेशन मानवाधिकारों एवं मानवीय सम्मान के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। मानवाधिकारों के हनन और शारीरिक यातनाओं का सबसे ज्यादा खतरा थानों में है। थानों में गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए व्यक्तियों को प्रभावी कानूनी सहायता नहीं...

स्टेन स्वामी और उनके दस सिर वाले रावणी हत्यारे

एक ओर दशकों से झारखंड में आदिवासी अधिकारों के लिए संघर्ष को समर्पित, पार्किन्सन समेत बढ़ती उम्र से जुड़ी अशक्तता के मारे स्टेन स्वामी और दूसरी ओर उनकी मौत के लिए उत्तरदायी राजनीति, पुलिस, जेल और अदालत की भूमिका!...

सरकार की प्राथमिकता में, न तो किसान हैं, और न ही कामगार!

सोशल मीडिया पर एक फोटो और एक खबर घूम रही है कि एक किसान नेता एसी में आराम कर रहे हैं। उस पर बहुत से कमेंट आये। कुछ मज़ाकिया तो कुछ उपालम्भ भरे, कुछ तंजिया तो कुछ हास्यास्पद। यह...

माननीय! आप मानवाधिकारों या मोदी सरकार, किसके हैं रक्षक?

प्रिय न्यायमूर्ति अरुण मिश्र, कुछ सप्ताह पहले जब मलयालम के एक समाचार पत्र में एक रिपोर्ट छपी कि आपने अपना सरकारी आवास नहीं छोड़ा है। जबकि आप सर्वोच्च न्यायालय से सितंबर 2020 में रिटायर हो गए थे। सामान्य तौर पर,...

आलोचकों, किसान आंदोलन के समर्थकों को निशाना बना रहा है सरकारी तंत्र: ह्यूमन राइट्स वॉच

न्यूयॉर्क। भारत सरकार ने किसान आंदोलन से निपटने के अपने तौर-तरीकों की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय आलोचना के जवाब में जिस प्रकार की कार्रवाइयां की हैं, वे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निजता के अधिकारों का उल्लंघन करती हैं, एक्सेस नाउ, आर्टिकल 19, एसोसिएशन फॉर प्रोग्रेसिव कम्युनिकेशंस, कमेटी टू...

भारत में नहीं हैं अल्पसंख्यक सुरक्षित, किसानों के अधिकारों पर भी हो रहा हमला:ह्यूमन राइट्स वॉच

न्यूयॉर्क। ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा है कि भारत में सरकारी तंत्र ने मुसलमानों के खिलाफ सुव्यवस्थित रूप से भेदभाव करने और सरकार के आलोचकों को बदनाम करने वाले कानूनों और नीतियों को अपनाया है। सत्तारूढ़ हिंदू राष्ट्रवादी भारतीय...
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700 शहादतें एक हत्या की आड़ में धूमिल नहीं हो सकतीं

11 महीने पुराने किसान आंदोलन जिसको 700 शहादतों द्वारा सींचा गया व लाखों किसानों के खून-पसीने के निवेश को...
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