Sunday, December 4, 2022

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कोविड के भ्रामक आंकड़े, भारतीय मध्य-वर्ग और पत्रकारिता

दुनिया में जब लॉकडाउन की शुरुआत हुई तो नागरिकों के दमन की ख़बरें सबसे ज्यादा केन्या व अन्य अफ्रीकी देशों से आईं। उस समय ऐसा लगा था कि भारत का हाल बुरा अवश्य है लेकिन उन गरीब देशों की तुलना...
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 मोदीराज : याराना पूंजीवाद की पराकाष्ठा

पिछले पांच वर्षों में विभिन्न कम्पनियों द्वारा बैंकों से रु. 10,09,510 करोड़ का जो ऋण लिया गया वह माफ...
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