Wed. Jan 29th, 2020

उन्नाव गैंगरेप: लड़की के पिता की भी आरोपियों ने की थी पिटाई

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पीड़िता का दाह संस्कार।

नई दिल्ली। उन्नाव रेप पीड़िता को जलाकर मारे जाने की घटना के मामले में तरह-तरह की कहानियां मीडिया में आ रही हैं। लेकिन सच यह है कि पीड़िता और आरोपी शिवम त्रिवेदी दोनों एक दूसरे से प्रेम करते थे। और आरोपी ने पीड़िता को शादी करने का भरोसा दिया था। और इसी बिना पर वो लोग कुछ दिन एक साथ रायबरेली में रुके भी थे। लेकिन पीड़िता लोहार समुदाय से आती थी और आरोपी सवर्ण ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखता था। और इस मामले में भी पीड़िता का परिवार तो शादी के लिए तैयार हो गया था लेकिन आरोपी के परिजन तैयार नहीं हुए।

बाद में इन्हीं सामाजिक दबावों के चलते आरोपी पीछे हट गया। और उसने शादी करने से इंकार कर दिया। इस मामले को लेकर पीड़िता बिहार थाने में कई बार रिपोर्ट दर्ज कराने की कोशिश की लेकिन हर बार उसे निराशा हाथ लगी। इस बीच कुछ दिनों बाद आरोपी ने एक बार फिर सुलह समझौते का लालच देकर पीड़िता को एक स्थान पर बुलाया और वहां अपने एक दूसरे दोस्त के साथ मिलकर उनके साथ गैंगरेप किया। इस घटना के बाद पीड़िता बेहद बदहवास हो गयी। और वह आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कराने के लिए पूरी ताकत से जुट गयी।

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घटनास्थल से जांच करके लौटीं एडवा की नेता मधु गर्ग का कहना है कि एक बार फिर उसे थानों से निराशा हाथ लगी लिहाजा उसने थक हारकर कोर्ट का सहारा लिया। जहां से फिर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश हुआ। और इसके साथ शिवम त्रिवेदी की गिरफ्तारी हो गयी। हालांकि इस बार भी दूसरा आरोपी गिरफ्तारी से बचा रहा।

लेकिन इस बीच आरोपी शिवम त्रिवेदी के पूरे परिवार का पीड़िता और उसके परिजनों पर केस वापस लेने का दबाव बनाया जाता रहा। मधु गर्ग का कहना है कि इस कड़ी में एक बार पीड़िता के पिता की आरोपियों ने जमकर पिटाई भी की। स्थानीय मीडिया के मुताबिक बाद में आरोपियों के परिजनों ने पीड़िता और उसके परिजनों पर 3 लाख रुपये लेकर मामले को खत्म करने का दबाव बनाया। लेकिन पीड़िता उसके लिए भी तैयार नहीं हुई।

हालांकि तकरीबन 7 महीने जेल में रहने के बाद आरोपी शिवम त्रिवेदी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गयी। जमानत के पीछे बताया जा रहा है कि आरोपियों ने पुलिस वालों के साथ मिलकर एक बड़ा खेल खेला। उन्होंने एक स्टांप पेपर पर दोनों की शादी दिखा दी। और इस तरह से उसे पेश कर दिया कि चूंकि दोनों पति-पत्नी थे लिहाजा उनके रेप का सवाल ही नहीं उठता है।

जेल से बाहर आने के बाद एक बार फिर आरोपियों ने लड़की और उसके परिजनों से केस को वापस लेने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। लेकिन लड़की हरगिज इसके लिए तैयार नहीं थी। और वह किसी भी हालत में आरोपियों को सजा दिलाने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ थी।

जब आरोपियों को लगा कि लड़की को नहीं मनाया जा सकता है। तब उन्होंने उसको ही अपने रास्ते से हटाने का फैसला ले लिया। और इसके साथ ही घटना के दिन सुबह जब वह बाहर किसी काम से जा रही थी तो मिट्टी का तेल छिड़ककर उसको आग के हवाले कर दिया गया।

लेकिन पूरे मामले को पेश इस तरह से किया जाता रहा जैसे लड़की ही बदचलन हो या फिर उसी की पूरी गलती है। दरअसल आरोपी के उच्च वर्णीय पृष्ठभूमि से आने के चलते न तो सरकार और न ही समाज के स्तर पर पीड़िता को कोई सहायता मिल सकी। ऊपर से आरोपी के घर में पिछले 15 सालों से प्रधानी होने के चलते दूसरे लोग भी उसकी ही जी हुजूरी में लगे रहे। ऐसे में पीड़िता के पास आरोपी को सजा दिलवाने का जब कोई रास्ता नहीं बचा तब उसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जिसके आदेश पर ही आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज हुआ और फिर उसमें गिरफ्तारियां हुईं। लेकिन यहां भी आरोपियों के रसूख और सत्ता तक उनकी पहुंच ने अपना खेल दिखा दिया। बताया जाता है कि केस को कमजोर कर दिया गया। जिसके चलते आरोपी शिवम त्रिवेदी को बहुत जल्द ही जमानत मिल गयी।

इस पूरे मामले में दिलचस्प रहा मीडिया और सोशल मीडिया का रुख। हैदराबाद मामले में तुरंत न्याय की गुहार लगाने वाला पूरा तबका इस मसले पर मौन धारण कर लिया। वह सोशल मीडिया हो या कि मुख्यधारा का मीडिया कहीं भी तत्काल न्याय की गुहार लगती नहीं दिखी। दरअसल जिस बात को बार-बार इंगित किया जा रहा है वही इस देश का सबसे बड़ा सच है। देश की व्यवस्था का पलड़ा सामाजिक और वर्गीय तौर पर वर्चस्व वाले हिस्से के पक्ष में झुका हुआ है। एक बार फिर इस घटना ने इस बात को साबित कर दिया है।

इस बीच, भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बीच पीड़िता का उन्नाव स्थित उसके परिवार के मालिकाना वाली जमीन में अंतिम संस्कार कर दिया गया। इसके तहत उसको उसके दादा और दादी के बगल में दफना दिया गया। हालांकि 23 वर्षीय पीड़िता का शव शनिवार को दिल्ली से उसके घर पहुंच गया था। लेकिन उसकी बड़ी बहन को पुणे से आना था लिहाजा अंतिम संस्कार को थोड़ा रोकना पड़ा। साथ ही परिजनों का इस बात को लेकर भी दबाव था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उनसे मिलने आएं। हालांकि बाद में आश्वासन देने के बाद वो मान गए। आपको बता दें कि पीड़िता की मौत के दिन पुलिस और समाजवादी पार्टी तथा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच जमकर झड़प हुई थी। और मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने इकट्ठा लोगों के मुकाबले दुगुनी संख्या में पुलिस बल के जवानों को तैनात कर दिया था।

आपको बता दें कि पीड़िता लोहार जाति से आती है। यह पिछड़े समुदाय से जुड़ा तबका है। साथ ही आस-पास के इलाके में यह अकेला परिवार है। जिसके चलते पूरा परिवार बहुत भयभीत है। और आरोपी परिवार के रसूखदार होने के चलते उसका यह भय और बढ़ जाता है। पीड़िता की भाभी ने इस बात को छुपाया भी नहीं। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि “हम गांव में शायद ही किसी कार्यक्रम में हिस्सा लेते हैं। जब आरोपी और उनके परिवार के लोगों ने हम लोगों को धमकी देनी शुरू की तो हम सहायता के लिए किसी के पास नहीं जा सके और अब हम बिल्कुल अकेले हो गए हैं।”

पीड़ित परिवार को प्रशासन ने 25 लाख रुपये का चेक सहायता के तौर दे दिया है। इसके अलावा उसका घर बनवाने और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया गया है। इस बीच विपक्षी दलों के कई नेताओं ने पीड़िता के परिवार से मिलकर उसे हर तरीके के सहयोग का भरोसा दिलाया है।  

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