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बसंत के मौसम में कार्रवाई पर पतझड़ का मिलता है नक्सलियों को लाभ

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के तररेम थाना के अंतर्गत जोनागुण्डा में हुए पुलिस नक्सली मुठभेड़ में 23 जवानों की शहादत हुई है और 30 से अधिक जवान घायल हैं और एक जवान लापता बताया जा रहा है। अधिकारिक पुष्टि के मुताबिक इस हमले में नक्सलियों को भी बड़ा नुकसान हुआ है जिस जगह मुठभेड़ हुई है वह इलाका बीजापुर और सुकमा जिले के बीच में बसा हुआ है जिसे नक्सलियों का सेफ जोन एरिया कहा जाता है, इंटेलिजेंस रिपोर्ट के मुताबिक बीजापुर जिले के तररेम और सिलगेर के जोनागुण्डा में माओवादियों से जुड़ी छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के तररेम थाना के अंतर्गत जोनागुण्डा में हुए पुलिस नक्सली मुठभेड़ में 23 जवानों की शहादत हुई है और 30 से अधिक जवान घायल हैं और एक जवान लापता बताया जा रहा है।

आधिकारिक पुष्टि के मुताबिक इस हमले में नक्सलियों को भी बड़ा नुकसान हुआ है जिस जगह मुठभेड़ हुई है वह इलाका बीजापुर और सुकमा जिले के बीच में बसा हुआ है जिसे नक्सलियों का सेफ जोन एरिया कहा जाता है। इंटेलिजेंस रिपोर्ट के मुताबिक बीजापुर जिले के तररेम और सिलगेर के जोनागुण्डा में माओवादियों की पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की एक बटालियन हमेशा इस इलाके में रहती है। जिसको सुकमा के झीरम हमले का मास्टरमाइंड हिड़मा लीड करता है, और साथ में महिला माओवादी नेता सुजाता इसका नेतृत्व करती है। यह इलाका बीजापुर जिले और सुकमा जिले के बॉर्डर में होने के कारण माओवादियों का सेफ जोन माना जाता है।

माओवादियों की मौजूदगी की सूचना पर बीजापुर जिले के तररेम थाना क्षेत्र के सिलगेर और जोनागुण्डा की ओर लगभग 2000 सुरक्षा बल के जवानों को अलग-अलग टुकड़ियों में रवाना किया गया जिसमें DRG, STF, और CRFP कोबरा बटालियन और बस्तर बटालियन के जवान शामिल थे। पिछले दो दिनों से इन जवानों को अलग-अलग ऑपरेशन पर भेजा गया था, तररेम से निकली पार्टी को नक्सलियों की PLGA (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) ने जोनागुण्डा के पास पहले से घात लगाकर अपने एंबुश में फंसा लिया और सुरक्षा बल के जवानों पर तीन ओर से घेर कर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाना शुरू किया एम्बुश में फंसे जवानों को पहली ही गोली बारी में बड़ा नुकसान हो गया था।

अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक 20 दिन पहले ही मिली थी बीजापुर जिले के तररेम और जोनागुण्डा में नक्सलियों की बढ़ी संख्या में मौजूद होने की जानकारी, और इधर पिछले दस दिनों से विशेष सुरक्षा सलाहकार के विजय कुमार बस्तर में मौजूद हैं और इनके साथ ऑपरेशन की प्लानिंग के लिए CRPF के एडीजीपी जुल्फिकार हसमुख और मौजूदा आईजी खुद बस्तर में थे और फ़िर भी एक बड़ी चूक सामने आ रही है।

एक तरफ़ से देखा जाए तो माओवादी प्रति वर्ष फरवरी से मई माह के बीच सुरक्षा बल के जवानों पर हावी होते हैं और बड़ी घटना को अंजाम देते हैं। पिछले साल बस्तर में ही सुकमा जिले के मीनपा में 21 मार्च को एंबुश में फंसाकर एक बड़ी घटना को अंजाम दिया गया। जिसमें राज्य पुलिस के 17 जवान शहीद हुए और उनके हथियार को लूटकर नक्सली ले गए, जब यह घटना हुई तब पतझड़ का मौसम था और अब भी यही मौसम है। इस समय नक्सली सुरक्षा बलों के जवानों पर ज्यादा हावी होते हैं क्योंकि पूरा जंगल साफ़ नज़र आता है। जिससे फ़ोर्स के जंगलों में घुसने की भनक नक्सलियों को पहले ही लग जाती है और इस तरह की बड़ी घटनाओं को अंजाम देने में माओवादी सफल होते हैं।

माओवादियों की पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) एंबुश बनाने और गुरिल्ला युद्ध लड़ने में माहिर होती है। इसके चलते वे सुरक्षा बलों पर भारी पड़ते हैं।

छत्तीसगढ़ के बस्तर में अब तक हुए सबसे बड़े माओवादी हमले-

(1) 15 मार्च 2007 को बीजापुर जिले के रानी बोदली में स्थित पुलिस कैम्प पर  आधी रात को हमला कर कैम्प को आग लगा दिया, जिसमें 55 जवानों की शहादत हुई।

(2) 6 अप्रैल 2010 सुकमा जिले के ताड़मेटला में CRPF के जवानों को एंबुश में फसाया और ताबड़तोड़ गोलियां चलाई जिसमें CRPF के 76 जवान शहीद हुए।

(3) 17 अप्रैल, 2010 को एक यात्री बस को बारूदी सुरंग लगाकर उड़ाया जिसमें सुरक्षा बल के जवानों के साथ कोया कमांडो समेत 36 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।

(4) 29 जून 2010 नारायणपुर के धौड़ाई में CRPF के जवानों पर घात लगाकर हमला, 27 ज़वान शहीद ।

(5) 25 मई 2013 बस्तर और सुकमा के मध्य दरभा के झीरम में घात लगाकर हमला किया जिसमें कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार पटेल, आदिवासी नेता महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और जिला बल के ज़वान समेत 30 से अधिक लोगों की शहादत।

(6) 11 मार्च 2014 बस्तर के दरभा थाना के ग्राम टाहकवाड़ा में हमला 15 जवान शहीद।

(7) 12 अप्रैल 2014 को बस्तर संभाग के दो जिलों में एक ही दिन दो बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया। पहले बीजापुर जिले के कुटरू के पास बस को उड़ाया जिसमे मतदान कर्मियों समेत 7 लोगो की मौत हुई।

और बस्तर के दरभा घाटी में एम्बुलेंस को आईईडी ब्लास्ट कर उड़ाया जिसमें CRPF के 5 जवानों समेत एम्बुलेंस के चालक और इएमटी की मौत हुई।

(8) 25 अप्रैल 2017 सुकमा जिले के बुर्कापाल में ROP में निकले जवानों पर हमला इसमें CRPF के 32 जवानों की शहादत हुई। और फ़िर मार्च में सुकमा के भेज्जी में नक्सल हमले में 11 जवान शहीद।

(9) 6 मई 2017 सुकमा के कसालपाड़ में आत्मघाती हमला जिसमें 14 जवानों की शहादत हुई।

(10) 9 अप्रैल 2019 दन्तेवाड़ा जिले के श्यामगिरी में बीजेपी( BJP) विधायक की वाहन को आईईडी ब्लास्ट कर उड़ाया जिसमें विधायक भीमा मंडावी और उनके चार PSO की शहादत हुई।

(11) 21 मार्च 2020 सुकमा जिले के कसालपाड़ के मीनपा में सर्चिंग से वापस आते जवानों पर एंबुश बनाकर हमला किया गया जिसमें राज्य पुलिस के DRG, और STF के 17 जवानों की शहादत हुई।

इस बीच, माओवादियों की तरफ से सुरक्षा बलों के नाम एक अपील सामने आयी है। जिसमें उन्होंने माओवादियों से अपील है कि वह सत्ता के पक्ष में काम करने की जगह जनता के पक्ष में काम करे और इसके लिए जमीनी स्तर पर चलाए जा रहे उसके अभियानों का समर्थन करे। इस में संबंध में जारी पर्चा नीचे दिया जा रहा है।

(बस्तर से रिकेश्वर राणा की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on April 5, 2021 4:45 pm

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