Subscribe for notification

छत्तीसगढ़ में सामुदायिक वन अधिकार पत्र हासिल करने वाले गांवों से फिर से भराया जा रहा है दावा फार्म

रायपुर। छत्तीसगढ़ में जिन गांवों को पहले से ही सामुदायिक वन संसाधनों पर अधिकार पत्र (CFR) हासिल हो चुका है उनसे दोबारा दावा फॉर्म भराया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि पटवारी, वन विभाग, पंचायत के कर्मचारियों द्वारा पहले ही दावा फॉर्म भर कर जमा कराया जा चुका है। और उसके बदले उन्हें अधिकार पत्र भी मिल गए हैं। लेकिन अब गांव के लोगों को मैदान, चारागाह, निस्तारी जमीन के लिए एक बार फिर से उसी काम को करने के लिए कहा जा रहा है।     

मामला छत्तीसगढ़ में कांकेर जिले के तहत आने वाले अंतागढ़ ब्लॉक का है जहां मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 2019 में 18 गांवों को उनके सामुदायिक संसाधनों पर मालिकाने का अधिकार पत्र दिया था। जबकि सच्चाई यह है कि अंतागढ़ ब्लॉक में दर्जनों सामुदायिक वन अधिकार के दावे अभी भी लंबित है और उनका निपटारा न कर पहले ही अधिकार पत्र हासिल कर चुके (CFR) गांवों से दोबारा दावा फार्म भराया जा रहा है। लोगों का कहना है कि यह सब कुछ आंकड़ों को पूरा करने के मकसद से किया जा रहा है।

कांकेर जिले के अंतागढ़ के मड़पा गांव से मोहन दर्रो ने टेलीफोन पर बताया कि 2019 के नवम्बर महीने में मड़पा गांव को सामुदायिक वन संसाधनों पर अधिकार का पत्र मुख्यमंत्री ने खुद अपने हाथों से दिया था जिसका अभी तक कागज उन्हें नहीं दिया गया है। मोहन दर्रो ने बताया कि सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के तहत मड़पा गांव की पारम्परिक सीमा का मालिकाना हक ग्राम सभा को मिला है जिसमें नदी, पहाड़, जंगल, निस्तारी, मैदान इत्यादि शामिल हैं। लेकिन 14 जून 2020 को यानी आज हो रही बैठक में ग्राम सभा में उन्हें अचानक फिर से वन विभाग द्वारा सामुदायिक वन अधिकार का फॉर्म भरने के लिए कहा गया। जबकि सच्चाई यह है कि उन्हें पहले ही यह अधिकार मिल चुका है। लिहाजा दोबारा दावा फॉर्म भराने का मतलब समझ से बाहर है।

अंतागढ़ ब्लॉक के ग्राम गोंड़बिनापाल निवासी लाभेश हुपेंडी कहते हैं कि 2014 में सामुदायिक वन अधिकार (CFR) का दावा फॉर्म भर कर ग्राम सभा ने जमा कर दिया है। और इसको खुद मुख्यमंत्री के हाथों 2019 के आखरी महीनों में ग्रामवासियों को दिया जा चुका है। लेकिन आज हो रही ग्राम सभा की बैठक में राजस्व विभाग, पंचायत और वन विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें फिर से मैदान और चारागाह को लेकर दावा फॉर्म भरना है । अभी ग्राम सभा ने कोई फॉर्म नहीं भरा है। उनके निवासियों का कहना है कि हम पहले ही दावा कर चुके हैं फिर दोबारा क्यों दावा फॉम भराया जा रहा? हमें तो सामुदायिक वन संसाधनों पर अधिकार पत्र मिल गया है।

ग्राम सभा की बैठक।

इस संबंध में अंतागढ़ ब्लॉक के वन विभाग के एसडीओ ईश्वर प्रसाद से बात करने पर उन्होंने कहा कि पहले जो सामुदायिक वन अधिकार का पत्र मुख्यमंत्री के हाथों दिया गया था वो अधूरा है इसीलिए फिर से सामुदायिक वन अधिकार का फॉर्म भरा कर उन्हें अधिकार पत्र दिया जाएगा और पहले का निरस्त किया जाएगा।

वन अधिकारों पर काम करने वाले केशव शोरी कहते हैं कि वन विभाग मूर्खता पूर्ण काम कर रहा है। उन्हें सामुदायिक वन अधिकार को लेकर बिल्कुल भी ज्ञान नहीं है। अंतागढ़ के ग्राम मड़पा के साथ 17 गांवों को सामुदायिक वन संसाधनों पर अधिकार पत्र पहले ही मिल चुका है। उस समय वन विभाग के अफसर ध्यान नहीं दिए। अभी जब मुख्यमंत्री ने इस कार्य में तेजी लाने को कहा तो वो गलत तरीका अपना रहे हैं। जब सामुदायिक वन संसाधनों पर अधिकार के दावे के तहत पत्र मिल गए हैं तो अब विभागीय अफसर सामुदायिक अधिकार के दावे करने को कह रहे हैं?

बता दें कि अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परम्परागत वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत सामुदायिक एवं व्यक्तिगत वनाधिकार के निरस्त दावों तथा नवीन दावों के परीक्षण के पश्चात दावों को पारित किये जाने के लिए जिले के सभी गांवों में 12 जून को विशेष ग्रामसभा का आयोजन किया गया। लेकिन अचरज की बात यह है कि इस ग्राम सभा में पहले से मिले सामुदायिक वन संसाधनों पर अधिकार (CFR) वाले गांवों को भी फिर से दावा फार्म भरने का निर्देश दिया गया है।

विभागीय सूत्रों से मिली जानकरी के अनुसार भारत में CFR अधिकार पत्र को लेकर उड़ीसा पहले नम्बर पर आता है। जबकि छत्तीसगढ़ का स्थान दूसरा है। छत्तीसगढ़ को पहले नम्बर पर लाने की होड़ में एक गांव से 5 CFR का दावा फॉर्म भराया जा रहा है जो गैर कानूनी है। एक गांव का निस्तार पत्र एक रहता है वैसे ही सामुदायिक वन अधिकार का पत्र भी एक रहता है लेकिन गांवों में 5 दावा फॉर्म भराने की कार्ययोजना चल रही है।

विदित हो कि छत्तीसगढ़ में पहली बार सबसे अधिक सामुदायिक वन संसाधन का अधिकार पत्र कांकेर जिले के 20 गांव के ग्राम सभाओं को प्रदान किया गया था। इसके साथ ही कांकेर, छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा 45 हज़ार एकड़ वन भूमि पर सामुदायिक वन संसाधन सीएफआर का हक देने वाला जिला बन गया है। कांकेर जिले के 20 गांवों- किरगोली, खैरखेड़ा, कुरसेल, मड़पा, भैंसागांव, बागझर, बड़े जैतपुरी, पोटेबेड़ा, गोड़बिनापाल, चिंगनार, माहुरपाट, कुम्हारी, तहसील डांगरा, आतुरबेड़ा, फुलपाड़, तारलकट्टा, हिन्दुबिनापाल, टोटीनडांगरा, गिरगोली और फुलपाड को 18 हजार 464 हेक्टेयर का सामुदायिक वन संसाधन अधिकार पत्र मुख्यमंत्री के हाथों सौंपा गया था।

(कांकेर से जनचौक संवाददाता तामेश्वर सिन्हा की रिपोर्ट।)

This post was last modified on June 14, 2020 6:25 pm

Leave a Comment
Disqus Comments Loading...
Share

Recent Posts

ऐतिहासिक होगा 25 सितम्बर का किसानों का बन्द व चक्का जाम

देश की खेती-किसानी व खाद्य सुरक्षा को कारपोरेट का गुलाम बनाने संबंधी तीन कृषि बिलों…

9 mins ago

लेबर कोड बिल के खिलाफ़ दस सेंट्रल ट्रेड यूनियनों का देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन

नई दिल्ली। कल रात केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में 3 लेबर कोड बिल पास कराए…

1 hour ago

कृषि विधेयक: ध्वनिमत का मतलब ही था विपक्ष को शांत करा देना

जब राज्य सभा में एनडीए को बहुमत हासिल था तो कृषि विधेयकों को ध्वनि मत से…

3 hours ago

आशाओं के साथ होने वाली नाइंसाफी बनेगा बिहार का चुनावी मुद्दा

पटना। कोरोना वारियर्स और घर-घर की स्वास्थ्य कार्यकर्ता आशाओं की उपेक्षा के खिलाफ कल राज्य…

4 hours ago

अवैध कब्जा हटाने की नोटिस के खिलाफ कोरबा के सैकड़ों ग्रामीणों ने निकाली पदयात्रा

कोरबा। अवैध कब्जा हटाने की नोटिस से आहत कोरबा निगम क्षेत्र के गंगानगर ग्राम के…

4 hours ago