Sunday, November 27, 2022

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दलित उत्पीड़न: सामने आया ‘देवभूमि’ का दानवी चेहरा

पिछले एक महीने में उत्तराखंड के चम्पावत जिले में दलित समुदाय के साथ हुई दो घटनाओं के बाद यह सोचने पर विवश कर दिया है कि अपने को खुले दिल दिमाग का बताने वाले उत्तराखंड के समाज में दलितों...

त्रिपुरा: सांप्रदायिक हिंसा पर हमारा मौन घातक

त्रिपुरा में भी साम्प्रदायिक हिंसा का जहर पहुंच ही गया। मुख्यधारा के मीडिया ने इस दुःखद एवं दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम पर मौन बनाए रखा। प्रदेश की सरकार का कहना था कि अव्वल तो कुछ हुआ ही नहीं और अगर कुछ...

अब संघ परिवारियों के निशाने पर ईसाई

जैसे-जैसे साम्प्रदायिक राष्ट्रवाद और मजबूत और मुखर होता जा रहा है वैसे-वैसे धार्मिक अल्पसंख्यकों को डराने-धमकाने और उनके विरुद्ध हिंसा की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। पिछले एक दशक में इस प्रवृत्ति में तेजी से वृद्धि हुई है। मुस्लिम...

‘भील विद्रोहः संघर्ष के सवा सौ सवाल’ यानि जुल्म और प्रतिकार का पहला दस्तावेज

(देश में भीलों की अलग-अलग रूपों में चर्चा होती रही है। इस बात में कोई शक नहीं कि वो जेहनी तौर पर विद्रोही और लड़ाके थे। लेकिन उनके इस पक्ष पर न तो अलग से कोई शोध हुआ और...

आदिवासी दिवस पर उठी बोधघाट परियोजना के विरोध की आवाज

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर बस्तर के विभिन्न क्षेत्रों में आदिवासी समुदाय के लोगों द्वारा विभिन्न किस्म के आयोजन किए गए। इस मौके पर सभी आदिवासी जनजाति समुदाय के लोग अपनी पारंपरिक वेशभूषा, अपनी संस्कृति और अपने पारंपरिक...

जीने के मूल अधिकार में भोजन और अन्य बुनियादी सुविधाओं का अधिकार शामिल: सुप्रीम कोर्ट

उच्चतम न्यायालय ने अपने महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि देश भर के तमाम राज्य वन नेशन वन राशन कार्ड की स्कीम 31 जुलाई तक लागू करें। जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 में...

भारत एक गंदगी प्रधान देश है!

हमारा भारत देश महान है। विदेशियों (पश्चिमी देश वाले) का कहना है कि भारत सपेरों, नटों और ठगों (भिखारियों से लेकर टैक्सी व ऑटो ड्राइवर और होटलों के दलालों तक) का देश है। दावा है कि अब सरकार ने...

सुप्रीम कोर्ट का टर्नअराउंड: प्रवासी मजदूरों के लिए सूखा राशन, सामुदायिक रसोई का दिल्ली, यूपी और हरियाणा को निर्देश

क्या यह माना जाये कि देश के सबसे बड़े न्यायालय उच्चतम न्यायालय का टर्नअराउंड हो गया है। पिछले चार चीफ जस्टिसों ,जस्टिस खेहर,जस्टिस दीपक मिश्रा ,जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस एस ए बोबडे के बाद जबसे जस्टिस एनवी रमना...

कानून तो बना दिया, नियमावली बनी नहीं

नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए अर्थात का) की नियमावली अभी तक नहीं बनी। जबकि इस कानून को लागू हुए एक साल से अधिक समय गुजर गया है। इस कानून के खिलाफ असम में लगातार आंदोलन चल रहा है। इसकी शुरुआत...

विकास से महरूम रहे देश के वंचित समुदाय

डॉलटनगंज के शांतिपुरी स्थित नागलोक उत्सव भवन में आयोजित प्रमंडल स्तरीय बजट परिचर्चा में वक्ताओं ने साफ कहा कि आजादी के 75 वर्षों से आदिवासी, दलित व वंचित समुदायों का विकास नहीं होना उनके मौलिक अधिकार व संवैधानिक अधिकारों...
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भाजपा पर भारी पड़ सकती है मोरबी हादसे की मार

राजकोट। गुजरात में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहली सभा मोरबी में हुई। मोरबी वह जगह है,...
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