Sunday, October 17, 2021

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धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े अमेरिकी आयोग ने की अमित शाह के अमेरिका में घुसने पर पाबंदी की मांग

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नई दिल्ली। नागरिक संशोधन विधेयक को गलत दिशा में एक खतरनाक मोड़ करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर आधारित अमेरिकी आयोग (यूएससीआईआरएफ) ने विधेयक के लिए धर्म को आधार बनाने के भारत सरकार के फैसले को बेहद परेशान करने वाला कदम बताया है। इसके साथ ही उसने सदन में इसको पेश करने वाले गृहमंत्री अमित शाह पर अमेरिका में घुसने पर पाबंदी लगाने के लिए अमेरिकी कांग्रेस से विचार करने की अपील की है।

सीएबी के लोकसभा से पारित होने पर चिंता जाहिर करते हुए यूएससीआईआरएफ ने मंगलवार को एक बयान जारी कर कहा कि “सीएबी प्रवासियों को नागिरकता प्रदान करने के लिए एक रास्ता साफ करता है जिसमें खासकर मुस्लिमों को बाहर रखे जाने की बात है। और नागरिकता मुहैया करने का इसका कानूनी प्रावधान धर्म पर आधारित है। कैब गलत दिशा में एक खतरनाक मोड़ है। क्योंकि भारतीय संविधान बगैर किसी धार्मिक भेद-भाव के कानून के सामने बराबरी की गारंटी करता है।”

प्रस्तावित विधेयक के मुताबिक 31 दिसंबर, 2014 तक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई जो वहां धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं, के साथ अवैध नागिरक जैसा व्यवहार नहीं किया जाएगा। और उन्हें भारतीय नागरिकता दे दी जाएगी। विधेयक मुसलमानों को दरकिनार करता है।

संगठन ने कहा कि सीएबी ने एनआरसी के साथ मिलकर मुसलमानों के बीच भय पैदा कर दिया है। और इसके लागू होने के साथ ही उनकी नागरिकता जाने का खतरा पैदा हो गया है।

अमेरिकी हाउस कमेटी की विदेश मामलों की समिति ने एक ट्वीट में कहा कि धार्मिक बहुलतावाद अमेरिका और भारत का दोनों के नींव की बुनियाद रही है। और नागरिकों के लिए किसी भी तरह की धार्मिक परीक्षा इस बुनियादी लोकतांत्रिक वजूद को खारित करती है।

गौरतलब है कि कल शाह ने लोकसभा में यह विधेयक पेश किया था और सात घंटे तक चली लंबी बहस के बाद वह पारित हो गया। हालांकि ज्यादातर विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया है।

दिलचस्प बात यह है कि पूरी बहस के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी सदन से नदारद रहे। वह झारखंड के चुनावी दौरे पर थे। यह शायद उनकी रणनीति का हिस्सा था। क्योंकि उन्हें भी पता था कि इस विवादित विधेयक के साथ खड़े होते दिखने पर उनकी अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंच सकता है। आप को बता दें कि अमेरिका के इसी संगठन की पहल पर गुजरात दंगों के बाद मोदी के अमेरिका में जाने पर प्रतिबंध लग गया था। यह प्रतिबंध तब खुला जब मोदी भारत के प्रधानमंत्री हो गए।

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