Thursday, February 9, 2023

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‘अनहद’ का गांधी विशेषांक: सत्ता के नैतिक विमर्श में गांधी हमेशा बने रहेंगे

गांधी पर ‘अनहद’ का विशालकाय (650 पृष्ठों का) अंक एक सुखद आश्चर्य की तरह आया है; गांधी के हत्यारों के प्रभुत्व-काल में ही गांधी के पुनरोदय के संकेत की तरह के सुखद आश्चर्य की तरह। दरअसल गांधी का व्यक्तित्व अपनी...

जन (स्त्री), जीवन, आज़ादी: ईरान में स्कूली छात्राओं ने संभाला विरोध मोर्चा, 150 से अधिक लोगों की मौत

‘जन (स्त्री) ज़िंदगी आज़ादी’ (Women, Life, Freedom) के नारे के साथ स्कूली किशोरियां आंदोलन का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। 22 वर्षीय कुर्दिश महिला महसा अमीनी की कस्टोडियल हत्या के बाद विगत 21 दिनों से ईरान में ज़ारी विरोध-प्रदर्शन का मोर्चा स्कूली...

कागज़ी आजादी और गुलामी की जड़ें

राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक जाती सड़क का नाम था -'राजपथ'। इसको बदलकर अब इसका नाम 'कर्तव्य पथ' रख दिया गया है। बात इतनी सी है कि प्रत्येक वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजपथ पर जो परेड...

आजादी के बाद भी अंडमान जेल से छूटे त्रैलोक्यनाथ के तेवर रहे तल्ख

कर्नाटक राज्य स्कूल बोर्ड की किताब में, सावरकर द्वारा अंडमान जेल की कोठरी से, एक बुलबुल पर सवार होकर, रोज वहां से निकल कर भारत आने और चले जाने की रूपक कथा का, जब उपहास उड़ा तो कर्नाटक सरकार...

 महिलाओं से फिर-फिर हैवानियत: पितृसत्ता की जड़ें उखाड़े बिना त्राण नहीं 

देश के 75वें स्वतंत्रता दिवस को अभी कुल मिलाकर पखवाड़ा भर ही बीता है। इसलिए पाठकों को याद होगा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस दिन लालकिले की प्राचीर से अपने लम्बे सम्बोधन में स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं के योगदान...

शिक्षकों को भी दरकार है सही शिक्षा की

आजादी के पचहत्तर वर्ष पूरे होने का जश्न एक तरफ बड़े उत्साह और कहीं-कहीं उन्मत्तता के साथ भी मनाया गया, वहीं हाल ही में ऐसी घटनाएँ भी हुईं, जिनसे यह भी इशारा मिला कि जिस आजादी और लोकतंत्र के...

ये कैसी आजादी और कैसा महोत्सव? जहां शिक्षा है न ही मूलभूत सुविधाएं

अगर हम आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम के आलोक में "हर घर तिरंगा" अभियान से फायदे की बात करें, तो मीडिया से आने वाली खबरें बताती हैं कि केन्द्र सरकार को 500 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का लाभ हुआ है।...

आजादी की लड़ाई में कई तरक्कीपसंद शायरों ने सीधे तौर पर की थी हिस्सेदारी

देश की आज़ादी लाखों-लाख लोगों की कु़र्बानियों का नतीज़ा है। जिसमें लेखक, कलाकारों और संस्कृतिकर्मियों ने भी एक अहम रोल निभाया। ख़ास तौर से तरक़्क़ीपसंद तहरीक से जुड़े लेखक, कलाकार आज़ादी के आंदोलन में पेश-पेश रहे। अपने गीत, ग़ज़ल, नज़्म, नाटक, अफ़सानों और आलेखों के...

आज़ादी, उपलब्धियां और जनसंघर्ष

स्वतंत्रता प्राप्ति की एक और वर्षगांठ बीत चुकी है। आजादी कैसे प्राप्त हुई? 75 साल में किसी ने क्या पाया, क्या खोया? देशवासी भी खुश हैं कि ठेल थाल कर ज़िंदगी बसर हुए जा रही है। ये कुछ महत्वपूर्ण...

प्रधानमंत्री का स्वतंत्रता दिवस भाषण: कथनी से ज्यादा करनी का विद्रूप 

आदरणीय प्रधानमंत्री जी का स्वतंत्रता दिवस उद्बोधन कुछ ऐसा था कि जो कुछ उन्होंने कहा वह चर्चा के उतना योग्य नहीं है जितना कि वे मुद्दे हैं जिन पर उनका भाषण केंद्रित होना चाहिए था। वर्ष 2017 में  प्रधानमंत्री जी...

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‘उफ़! टू मच डेमोक्रेसी’: सादा ज़बान में विरोधाभासों से निकलता व्यंग्य

डॉ. द्रोण कुमार शर्मा का व्यंग्य-संग्रह ‘उफ़! टू मच डेमोक्रेसी’ गुलमोहर किताब से प्रकाशित हुआ है। वैसे तो ये व्यंग्य ‘न्यूज़क्लिक’...