Wednesday, October 27, 2021

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विज्ञान के विकास के लिए स्वतंत्रता सबसे बड़ी शर्त, संदर्भ सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर

भारत की इस धरती पर कई ऐसे महान वैज्ञानिक पैदा हुए हैं, जिन्होंने अपनी खोज और रिसर्च से दुनिया के विकास को नई दिशा दी है। विडंबना यह है कि यह काम वे भारत में रहते हुए नहीं कर...

माफीनामों के वीर हैं सावरकर

सावरकर सन् 1911 से लेकर सन् 1923 तक अंग्रेज़ों से माफी मांगते रहे, उन्होंने छः माफीनामे लिखे और सन् 1923 के बाद वह लगातार ही इस देश की जनता को बांटने की बात करते रहे। नफरत और हिंसा की...

शख्सियत: गांधी के विचार, विनोबा का सानिध्य और जयप्रकाश का साथ पाए अमरनाथ भाई की दास्तान

सार- -अमरनाथ भाई कहते हैं कि गांधी के विचार, विनोबा का सानिध्य और जयप्रकाश नारायण के साथ रह कर उनका जीवन धन्य हुआ।-वर्तमान परिस्थितियों से अमरनाथ भाई खिन्न हैं, वह कहते हैं आज़ादी तक तो भारतीय जनता ने संघर्ष किया...

व्यक्ति की स्वतंत्रता अहम है,जमानत अर्जियों पर जल्द से जल्द सुनवाई की जाए: सुप्रीम कोर्ट

उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि व्यक्ति की स्वतंत्रता ‘अहम’है और ज़मानत की अर्ज़ी पर जितनी जल्दी मुमकिन हो सुनवाई की जानी चाहिए। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि गिरफ्तारी पूर्व और गिरफ्तारी के बाद ज़मानत के लिए दायर होने...

जेपी-लोहिया की विरासत को मजबूती देता किसान आंदोलन

आज समाजवादी चिंतक, प्रखर सांसद, सप्तक्रांति विचार को प्रतिपादित करने वाले,पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु की गद्दी को झकझोर देने वाले डॉ.राम मनोहर लोहिया की 54 वीं पुण्यतिथि है। कल 11 अक्टूबर को लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 119 वी जयंती...

जन्मदिन पर विशेष: जवाहर के साथ था जेपी का घनिष्ठ रिश्ता

जवाहरलाल नेहरू (1889 -1964) और जयप्रकाश नारायण (1902 -1979) हमारे स्वतंत्रता आंदोलन की दो ऐसी विभूतियाँ हैं , जिनमें समानता के अनेक तत्व हैं, हालांकि विभेद के भी अनेक बिंदु हैं। दोनों ने विदेशों में शिक्षा पायी और दोनों...

आइडिया ऑफ इंडिया की रीढ़ थे मौलाना अबुल कलाम आज़ाद

मौलाना आज़ाद के विचार और उनका लेखन सबसे कठिन होता है धार्मिक कट्टरता और धर्मान्धता से उबल रहे समाज में, सेक्युलर सोच या सर्वधर्म समभाव के, सार्वभौम और सनातन मूल्यों को बचाये रखना, उन पर टिके रहना और उनके पक्ष...

भाषा की गुलामी खत्म किये बिना वास्तविक आज़ादी संभव नहीं

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के लिए आज़ादी का सवाल केवल अंग्रेजों से देश को मुक्त कराना भर नहीं था बल्कि उनके लिए आज़ादी व्यक्ति और समाज की मुक्ति का भी प्रश्न था। यह मुक्ति अपनी भाषा में ही संभव थी...

…हां भगत सिंह ये तुमसे सीखने का वक्त ही तो है

पाखण्ड का हमारे जीवन में कोई स्थान नहीं है। हमने अपने देश की परिस्थिति और इतिहास का गहरा अध्ययन किया है। यहां की जन आंकाक्षाओं को हम खूब समझते हैं।’ -भगतसिंह भगतसिंह को अपने समय ने गढ़ा था। मुल्क में...

कमला भसीन का स्त्री संसार

भारत में महिला अधिकार आंदोलन की दिग्गज नारीवादी कार्यकर्ता, कवयित्री और लेखिका कमला भसीन का शनिवार सुबह निधन हो गया वह 75 वर्ष की थीं। वह कैंसर से पीड़ित थीं। भसीन का निधन दिल्ली के एक अस्पताल में हुआ। भसीन...
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बाजारवादी समाजवाद के बाद साझा समृद्धि: अब कैसे दिखेगा चीन?

चीन में कम्युनिस्ट पार्टी की अगले महीने (8-11 नवंबर) एक विशेष बैठक होगी। खबरों के मुताबिक उसमें ‘इतिहास पर...
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