Sunday, May 29, 2022

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जन्मदिन पर विशेष: जिंदा रहते किंवदंती बन गए थे नजरुल इस्लाम

काजी नज़रुल इस्लाम (24 मई 1899 - 29 अगस्त 1976) बांग्ला के एक प्रसिद्ध कवि, लेखक, संगीतकार और बांग्लादेश के राष्ट्रीय कवि थे। नजरुल को बांग्ला साहित्य के सबसे महान कवियों में से एक माना जाता है। नजरुल के...

पीएम और सीएम का विरोध अगर देशद्रोह है तो फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का क्या हुआ जनाब? 

यह सवाल उठ सकता है कि 1870 से चले आ रहे इस राजद्रोह कानून पर अभी इतनी कौन सी आफत आ गयी कि सुप्रीम कोर्ट को, इस याचिका पर लगातार सुनवाई करना पड़ा, सरकार को इस पर पुनर्विचार करने...

इतिहास के आइने में कांग्रेस के चिंतन शिविर 

स्वतंत्र भारत का संविधान तैयार करने वाली संविधान सभा के अध्यक्ष और संप्रभुता-सम्पन्न भारत गणराज्य के प्रथम राष्ट्रपति डा.राजेन्द्र प्रसाद ( 3 दिसंबर 1884: 28 फरवरी 1963 ) ने लिखा था, “ अक्सर दुनिया में जो लड़ाइयाँ हुई हैं, उनमें शास्त्रार्थों और साज...

टूटते सामाजिक ताने बाने के बीच मेल-मोहब्बत की इफ़्तार पार्टी

हमारा देश बहुलतावादी संस्कृति व सर्वधर्मसमभाव के मूल मंत्र के साथ दुनिया के मानचित्र पर अपनी विशिष्ट पहचान दर्ज़ कराता रहा है। इतिहास में धर्म व जाति के नाम पर बहुत बार तनावपूर्ण स्थिति पैदा हुई। लेकिन, उत्सवधर्मिता का...

भारत से म्यांमार वापस भेजे गए रोहिंग्याओं का जीवन खतरे में: ह्यूमन राइट्स वॉच

न्यूयॉर्क। ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा है कि भारत सरकार द्वारा 22 मार्च, 2022 को एक नृजातीय रोहिंग्या महिला को जबरन म्यांमार वापस भेजना भारत में रोहिंग्या शरणार्थियों के जीवन के समक्ष जोखिमों को उजागर करता है। अंतर्राष्ट्रीय कानून...

भारतीय पुनर्जागरण में महिलाओं का योगदान

यह उस जमाने की बात है, जब भारतीय समाज में गाना-बजाना और नाच में लगी महिलाओं को नीची निगाह से देखा जाता था। तब अचानक कलकत्ता की एक बाई जी गौहर ज़ान ने घोषणा की कि हिंदुस्तान का वायसराय...

‘आधार’ के जिन्न की नई सौग़ात के बहाने नागरिक जीवन और अधिकारों पर सरकार का ताज़ा हमला

हाल ही में, 21 दिसंबर 2021 को, संसद में एक क़ानून पास किया गया जिसके प्रमुख प्रावधान के तहत वोटर कार्ड को 'आधार' से लिंक किया जाएगा। इस क़ानून को चुनाव क़ानून (संशोधन) विधेयक 2021 के नाम से जाना...

जब गांधी ने 125 वर्ष तक जीने की इच्छा त्याग दी थी!

इस समय जब पूरी दुनिया महात्मा गांधी की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रही है और उनके विचारों की प्रासंगिकता पहले से कहीं ज्यादा महसूस की जा रही है, तब भारत में सत्ताधारी जमात से जुड़ा वर्ग गांधी...

सचमुच में नींव की ईंट थे बहुआयामी व्यक्तित्व के मालिक रामवृक्ष बेनीपुरी

रामवृक्ष बेनीपुरी का व्यक्तित्व बहुआयामी था। उन्होंने गद्य-लेखक, शैलीकार, पत्रकार, स्वतंत्रता सेनानी, समाज-सेवी, हिंदी प्रेमी, निबंधकार और नाटककार के रूप में अपनी प्रतिभा की अमिट छाप छोड़ी। बेनीपुरी जी एक महान विचारक, चिन्तक, क्रान्तिकारी, साहित्यकार, पत्रकार और संपादक के...

काकोरी के शहीद बताते हैं कि भीख नहीं कुर्बानियों से मिली है आजादी

'कस ली है कमर अब तो,कुछ करके दिखाएंगे, आजाद  ही  हो  लेंगे, या सर  ही  कटा  लेंगे...'  ( काकोरी केस के वीर शहीदों की पुण्य तिथि के पावन अवसर पर ) ब्रिटिश साम्राज्यवादियों की गुलामी से त्रस्त और सिसकते इस देश को...
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दूसरी बरसी पर विशेष: एमपी वीरेंद्र कुमार ने कभी नहीं किया विचारधारा से समझौता

केरल के सबसे बड़े मीडिया समूह मातृभूमि प्रकाशन के प्रबंध निदेशक, लोकप्रिय विधायक, सांसद और केंद्र सरकार में मंत्री...
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