Friday, December 9, 2022

झारखंड: दबंगों ने दुर्गा की मूर्ति का फोटो लेने पर कोरवा आदिम जनजाति के 5 युवकों की पिटाई की और सिर मुड़वाया

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झारखंड की राजधानी रांची से करीब 210 किलोमीटर दूर है गढ़वा जिले का पाल्हे गांव। जहां 06 अक्टूबर को दुर्गा की मूर्ति की तस्वीर खींचने पर विलुप्त प्राय आदिम जनजाति कोरवा के पांच युवकों को गांव का मुखिया और उसके लोगों ने यह कहकर पीटा कि तुम लोग कोरवा जाति के हो, इसलिए दुर्गा मां अपवित्र हो जाएगी।

इस बाबत विनोद कोरवा ने बताया कि, “जब मैं विसर्जन के दिन दुर्गा की मूर्ति की तस्वीर खींच रहा था, तो कुछ लोगों ने मुझे पूजा पंडाल से बाहर निकाल दिया और कहा कि मैं कोरवा जाति का हूं, इसलिए यहां नहीं रुक सकता। इतना कहते हुए मुझे उन्होंने पीटना शुरू कर दिया। इसके बाद उसी गांव के दिनेश कोरवा, अजय कोरवा, गंगा कोरवा और रूपेश कोरवा मुझे बचाने के लिए आए तो उनके साथ भी दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें भी पीटा गया।”

विनोद सवालिया अंदाज में कहता है कि ”हम लोगों ने भी दुर्गापुजा के लिए चंदा दिया था। उस वक्त हमारा चंदा का पैसा अछूत क्यों नहीं हुआ? हम कोरवा के सभी लोगों ने चंदा दिया था।”

विनोद के अनुसार अगले दिन पूरे मामले में पंचायत के मुखिया रामेश्वर सिंह सहित गांव के दबंग बंधु यादव, मनोज यादव समेत कई अन्य लोगों ने पांचों कोरवा युवकों को एक बैठक के बहाने बुलाया और रस्सी से बांधने के बाद उनकी जमकर पिटाई की। विनोद का आधा सिर मुंड़वा दिया गया। इनकी दबंगई का आलम यह रहा कि इनकी पिटाई का वीडियो भी बनाया गया। यह अलग बात है कि दबंगों उसे वायरल नहीं किया।

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इतना ही नहीं पंचायत में पीड़ितों को भूखा रखा गया, पानी भी नहीं पीने दिया गया।

इस दौरान जब दिनेश कोरवा ने खुद को बचाने की कोशिश की तो उसके सिर पर हमला करके उसे गहरी चोट पहुंचाई गई। इसकी जानकारी जब रूपेश कोरवा एवं विनोद कोरवा की मां बसंती देवी को हुई तब उन्होंने बीच बचाव के लिए पंचायत के बंधु यादव का पैर भी पकड़ा, मगर दबंगों पर कोई असर नहीं हुआ और उक्त लोगों की पिटाई होती रही।

ग्रामीण सुलेमान कोरवा बताते हैं कि दुर्गा पूजा में आय- व्यय के लिए कमेटी का गठन हुआ। कमेटी में निर्णय हुआ कि हरेक घर से 400 रुपए लिया जाना चाहिए। कोरवा जनजाति के जितने भी हड़-फूट व्यक्ति हैं वे सभी व्यक्ति 400 रुपये कमेटी में जमा किए। जो नहीं जमा करना चाहता था उससे जोर जबरदस्ती कर चंदा वसूल किया गया। दशहरा पूजा के अंदर प्रसाद वितरण होता है तो कोरवा भाइयों से छुआछूत का भेदभाव किया जाता है। प्रसाद बांटने के लिए यादव समाज के ही सदस्य वितरण करते हैं। जब कोरवा भाई के पास जाते हैं तो 1फीट ऊपर से प्रसाद गिराते हैं, आधा हाथ में तो आधा धरती पर गिर जाता है‌। जबकि चंदा सभी से बराबर लिए जाता है और पूजा करते समय भी भेदभाव किया जाता है।

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सुलेमान कोरवा के अनुसार 5 अक्टूबर 2022 को दुर्गा की मूर्ति विसर्जन के दिन करीब 4:00 से 5:00 शाम में दुर्गा की फोटो लेने गए दिनेश कोरवा और विनोद कोरवा को धकेल-धकेल कर भगाया गया और जाति सूचक शब्द लगाकर अश्लील गालियां देते हुए उन्हें पटक-पटक कर लात जूतों से पीटा गया। इनके बचाव में आए गंगा कोरवा, रुपेश कोरवा और अजय कोरवा की भी बुरी तरह से पिटाई की गई। पिटाई करने वालों में मनोज यादव, संजय यादव, मंजय यादव, जुगुन यादव, शर्मा यादव शामिल थे। मनोज यादव ग्राम सीदे का है और बाकी ग्राम पाल्हे के हैं। इनके अन्य भी साथी थे जो कि भीड़ भाड़ मे पहचाने नहीं गए। दूसरे दिन 6 अक्टूबर 2022 की सुबह करीब 6.30 -7.00 बजे के बीच इनमें से गिने लोग दुर्गा मंडप के पास इकट्ठा हुए। जिसमें वर्तमान मुखिया रामेश्वर सिंह पूर्व मुखिया पति बंधु यादव उपस्थित थे। इनके बीच क्या क्या बात हुई कुछ पता नहीं।

इसके बाद वर्तमान मुखिया रामेश्वर सिंह द्वारा एक-एक करके दिनेश कोरवा, गंगा कोरवा, रुपेश कोरवा और अजय कोरवा को बारी बारी से बुलाकर उनके हाथ पैर बांध दिए गए तथा बंधु यादव और रामेश्वर सिंह द्वारा इनकी बेरहमी से पिटाई की गई। पिटाई के बाद उठक बैठक करवाया एवं नीचा दिखाने के लिए दिनेश कोरवा का सिर मुंडन करवाया, जमा हुए व्यक्तियों का दंड प्रणाम भी करवाया गया। पांचों लड़कों को रामेश्वर सिंह एवं बंधु यादव ने धमकी दी और कहा कि इधर-उधर करोगे तो तुम लोगों पर और भी कार्रवाई की जाएगी। वे सभी पीड़ित डर के मारे पुलिस को शिकायत करने थाना तक नहीं पहुंचे। जब इस मामले की जानकारी किसी तरह स्थानीय मीडिया को चली तो यह घटना प्रकाश में आयी।

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उक्त घटना के बाद पीड़ित युवक और उनका परिवार काफी डरा सहमा रहा। वे लोग इस मामले को लेकर डर से थाना में नहीं पहुंच रहे थे। लेकिन कुछ ग्रामीणों के समझाने के बाद 9 अक्टूबर को पांचों इस मामले को लेकर चिनियां थाना पहुंचे तथा बेता पंचायत के मुखिया रामेश्वर सिंह, पाल्हे निवासी बंधु यादव व मंजय यादव तथा सिदे गांव निवासी मनोज यादव के विरुद्ध कार्रवाई के लिए थाना में आवेदन दिया।

एक सवाल के जवाब में ग्रामीण सुलेमान कोरवा ने कहा कि लगभग पांच छह साल साल से यहां दुर्गापुजा हो रही है। कोरवा समुदाय के लोग इसे उत्सुकता वश पूजा-पाठ को दूर से ही देखते थे। फिर यहां की पूजा कमेटी ने कोरवा समुदाय से भी चंदा लेना शुरू कर दिया। लेकिन इन्हें पूजा में शामिल नहीं किया जाता था। यहां यादव और खेरवार द्वारा शुरू से ही छुआछूत का व्यवहार किया जाता रहा है।

चिनियां थाना प्रभारी वीरेंद्र हांसदा ने बताया कि इस मामले में मुखिया रामेश्वर सिंह समेत आठ लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है तथा तीन आरोपियों मनोज यादव, शर्मा यादव और मंजय यादव को गिरफ्तार कर लिया गया है। बाकी की गिरफ्तारी की प्रक्रिया चल रही है।

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वहीं आरोपी चिनियां के बेता पंचायत के मुखिया रामेश्वर सिंह का कहना था कि उन पर लगा आरोप निराधार है। उक्त युवकों द्वारा शराब पीकर बदमाशी किया जा रहा था। इस कारण उनकी पिटाई की गई है। ताकि गलत काम करने से ग्रामीण बचें। वैसे रामेश्वर सिंह सहित अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।

मुखिया की इस दलील पर आदिम जनजाति के जिला अध्यक्ष नन्हेश्वर कोरवा कहते हैं कि अगर लड़कों ने शराब पी थी और बदमाशी कर रहे थे तो मुखिया को चाहिए था पुलिस को बुलाकर इन युवकों को पुलिस के हवाले करना न कि खुद पुलिस व जज बनकर सजा देना।

नन्हेश्वर कोरवा ने कहा कि कोरवा आदिम जनजाति के युवकों की बेवजह पिटाई की गई है। इस दौरान छुआछूत की भावना से जातिसूचक शब्द का प्रयोग किया गया है तथा गाली-गलौज किया गया है। दुर्गा की प्रतिमा को लेकर छुआछूत को लेकर सारा मामला हुआ है, विनोद के सिर के बाल का मुंडन किया गया है।

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वे सवाल करते हुए कहते हैं कि गांव के कोरवा जनजाति के लोगों से जब दुर्गापूजा का चंदा लिया गया तब वे अछूत नहीं थे?

नन्हेश्वर कोरवा कहते हैं कि वैसे तो हमारा कोरवा समाज दुर्गा पूजा नहीं करता है लेकिन जब से पूजा के नाम पर मेला वगैरह लगने लगा है समाज के युवा वर्ग उत्सुकतावश उधर मुखातिब हुआ है। जबकि उन्हें शुरू से ही पूजा से दूर रखा जाता था। जबकि इनसे जबरन चंदा भी लिया जाता रहा है।

वे कहते हैं कि प्रशासन इस मामले पर तमाम दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करे अन्यथा हम लोग बाध्य होकर जिला कार्यालय का घेराव करेंगे।

(झारखंड से वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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