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Thursday, September 16, 2021

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बीजेपी आईटी सेल हेड अमित मालवीय बने ‘सर्टिफाइड न्यूज़ मैनीपुलेटर’

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बीजेपी आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय भारत के पहले सर्टिफाइड न्यूज मैनीपुलेटर बन चुके हैं। भारत भर में जारी किसान आंदोलन के दौरान एक फेक वीडियो के ट्वीट को लेकर खुद ट्विटर ने इस तमगे से अमित मालवीय को नवाजा है। हालांकि भारत की जितनी भी फेक न्यूज चेक करने वाली वेबसाइट्स हैं, जैसे अल्ट न्यूज या ब्लूमबर्ग क्विंट वालों की बेवकूफ न्यूज हों, सभी ने बहुत पहले से बीजेपी आईटी सेल के मुखिया को भारत में फेक न्यूज फैलाने वाला साबित कर रखा है, मगर यह भारतीय सोशल मीडिया के अब तक के इतिहास की सबसे बड़ी घटना है, जिसमें खुद सोशल मीडिया साइट ने बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय को फेक न्यूज मैनीपुलेटर बताया है।

इसका अर्थ है कि बीजेपी आईटी सेल का मुखिया अमित मालवीय अपने ट्विटर एकाउंट से लोगों को फर्जी खबरें बताता है और उन्हें बरगलाता है। आपको बता दें कि पिछले दिनों ट्विटर ने अमेरिकी चुनाव में ऐन इसी तरह डॉनाल्ड ट्रंप पर भी यही तमगा लगा दिया था कि वे ट्विटर पर फेक न्यूज फैला रहे हैं। इस बार ट्विटर ने बीजेपी आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय पर यही ठप्पा लगाया है। आज के बाद से बीजेपी आईटी सेल के अगुआ अमित मालवीय का ट्विटर हैंडल भारत में फेक न्यूज फैलाने का सर्टिफाइड हैंडल बन चुका है।

दरअसल मामला दिल्ली में चल रहे ऐतिहासिक किसान आंदोलन का है। कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के विरोध प्रदर्शन में कई तस्वीरें सामने आ रही हैं, जिनमें किसानों और पुलिस में झड़प देखने को मिल रही है। 28 नवंबर को प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया के फोटो पत्रकार रवि चौधरी ने एक बुजुर्ग किसान पर लाठी चलाते हुए कुछ पुलिसकर्मियों की फोटो खींची थी, जिसके बाद से यह तस्वीर सोशल मीडिया पर बुरी तरह से वायरल हो गई। राहुल गांधी ने भी इसी तस्वीर को ट्वीट करते हुए मोदी सरकार पर निशाना साधा।

इसका जवाब देने के लिए बीजेपी आईटी सेल हेड अमित मालवीय ने एक बुज़ुर्ग किसान पर लाठी चलाते हुए पुलिसवाले के 2 वीडियोज कोलाज बनाकर शेयर किए। पहले वीडियो के नीचे लिखा हुआ है कि पुलिस ने एक बूढ़े किसान को मारा। वहीं दूसरे वीडियो के नीचे लिखा है कि पुलिस ने इस बूढ़े व्यक्ति को छुआ भी नहीं है। ऐसा कहकर बीजेपी आईटी सेल का यह शख्स अमित मालवीय राहुल गांधी को झूठा साबित करना चाहता था, मगर हो गया उल्टा। फेक न्यूज की जांच करने वाली वेबसाइट अल्ट न्यूज का कहना है कि बीजेपी समर्थक एक शख्स ने ये फर्जी विडियो बनाए थे। अमित मालवीय के अलावा एक और ट्विटर यूजर अरुण पुडुर ने भी ये वीडियो ट्वीट किया। अरुण पुडुर खुद को एक बिजनेसमैन बताता है, लेकिन फोर्ब्स की इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में बताया गया है कि उसका ये दावा भी फर्जी हो सकता है।

अब सीधे चलते हैं उस किसान की ओर, जिसकी फोटो राहुल गांधी ने ट्वीट की और जिस पर बीजेपी आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने फेक न्यूज फैलाई। जो किसान फोटो में दिखाए गए हैं, उनका नाम है सुखदेव सिंह। फैक्ट चेकिंग वेबसाइट बूम ने किसान सुखदेव सिंह से संपर्क किया, जिन्होंने कहा कि उन्हें डंडे से चोट आई थी। घटना के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस आंसू गैस के गोले छोड़ रही थी और लाठियां चला रही थी। बूम पोर्टल को अपनी चोट दिखाते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने उन्हें लाठियों को चलाते देखा और अपने हाथ से उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन इससे उनकी कलाई के नीचे चोट लग गई।” उन्होंने आगे बताया कि लाठी से उनके पैर पर भी चोट आई, लेकिन ये गंभीर नहीं थी और अंदर पहने हुए कपड़ों ने उन्हें बचा लिया।

अल्ट न्यूज ने बीजेपी आईटी सेल के हेड की तो कलई खोलकर रख दी। अल्ट न्यूज लिखता है कि अमित मालवीय का ट्वीट बिना किसी बात की गहराई जाने उस मुद्दे पर अपनी राय बना लेने का सटीक उदाहरण है। दरअसल आप देखें तो पाएंगे कि राहुल गांधी ने किसी भी किसान को मारने का दावा नहीं किया है। राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में लिखा है कि आज PM मोदी के अहंकार ने जवान को किसान के ख़िलाफ़ खड़ा कर दिया। लेकिन बिना राहुल गांधी का स्टेटमेंट समझे अमित मालवीय ने उसका गलत मतलब निकाल दिया। इसके लिए उन्होंने वीडियो के सिर्फ एक टुकड़े का यूज किया जबकि मूल वीडियो में बुज़ुर्ग किसान पर दो पुलिसवालों ने एक के बाद एक लाठियां चलाईं। जबकि अमित मालवीय ट्वीट करके यह झूठ सच साबित करने की कोशिश कर रहे थे कि बुजुर्ग किसान को कोई लाठी नहीं लगी। आखिरकार ट्विटर ने इनकी चोरी पकड़ ली और अब अमित मालवीय भारत के पहले सर्टिफाइड फेक न्यूज फैलाने वाले और न्यूज मैनीपुलेटर हैं, मतलब सच से आपराधिक खिलवाड़ करने वाला।

प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया के जिन फोटो पत्रकार रवि चौधरी ने बुज़ुर्ग किसान पर लाठी बरसाते पुलिसकर्मी की फोटो खींची, अल्ट न्यूज ने उनसे बात की। फोटो खींचने वाले पत्रकार रवि चौधरी का यह बयान अल्ट न्यूज में छपा हुआ है, रवि चौधरी ने कहा कि उन्होंने ही ये स्वीर दूसरे एंगल से खींची थी। लेकिन ये बात कन्फ़र्म नहीं कर सकते कि लाठी किसान को लगी ही थी। क्योंकि उस वक़्त आस-पास काफ़ी शोर था। पुलिस प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर रही थी और किसान दूसरी दिशा में खुद को बचाने के लिए भाग रहे थे। अगर बुज़ुर्ग किसान को इस पुलिसकर्मी की लाठी नहीं लगी है तो दूसरे किसी पुलिसकर्मी की तो लगी ही होगी। इसके बाद अल्ट न्यूज को वह पूरा वीडियो भी मिल गया, जो पंजाबी फेसबुक पेज पर अपलोड किया गया था। इस वीडियो में बुज़ुर्ग किसान के हाथ में चोट दिखती है।

(राइजिंग राहुल की रिपोर्ट।)


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