Mon. Sep 16th, 2019

नोटों का साइज बार-बार बदलने से बॉम्बे हाईकोर्ट नाराज, लगाई फटकार

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बांबे हाईकोर्ट। फाइल फोटो।

अब इसे क्या कहेंगे कि नीतिगत मुद्दों पर जब न्यायपालिका जवाब तलब करती है तो रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (आरबीआई) या चुनाव आयोग जवाब देने से भागते नज़र आने लगते हैं और लगता है कि जवाब से या तो ये असहज हो जायेंगे या फिर सरकार की किरकिरी होगी।  अब रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया के पास इसका कोई जवाब नहीं है कि वह करंसी नोटों और सिक्कों के फीचर्स और साइज बार-बार क्यों बदलता रहता है? इसी तरह चुनाव आयोग के पास इसका कोई जवाब नहीं है की बीएचइएल (भेल) से जो बीस लाख ईवीएम मशीनें चुनाव आयोग को आपूर्ति की गयी हैं वे कहां हैं ? दोनों ही मामले बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित हैं। लापता ईवीएम के मामले में तारीख पर तारीख लग रही है लेकिन नोट के आकर प्रकार पर कल सुनवाई हुई जिसमें जवाब दाखिल न करने को लेकर हाईकोर्ट ने रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया को कड़ी फटकार लगाई।

 बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस प्रदीप नंदराजोग और जस्टिस भारती डांगरे की पीठ ने आरबीआई से पूछा था कि आखिर नोट की साइज बार-बार बदलने की उसकी क्या मजबूरी है? आरबीआई के वकील ने नोट बदले जाने की हिस्ट्री, कारणों की तलाश और आंकड़े जुटाने के लिए समय की मांग की। इस पर चीफ जस्टिस नंदराजोग ने कहा कि जवाब देने के लिए आपको आंकड़े की जरूरत नहीं है। हम आपसे यह नहीं पूछ रहे हैं कि आपने कितने नोट छापे। इस बारे में नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड ने याचिका दायर की है।

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चीफ जस्टिस ने कहा कि कम-से-कम इतना तो कह दीजिए कि भविष्य में नोटों का आकार नहीं बदला जाएगा। अगर आप यह कह देंगे तो समस्या करीब-करीब खत्म हो जाएगी। आरबीआई को जवाब देने के लिए अब दो हफ्ते का वक्त दिया गया है। हाई कोर्ट ने कहा कि आरबीआई अपनी शक्तियों का इस तरह इस्तेमाल नहीं कर सकता है कि लोगों को तकलीफ हो। उन्होंने कहा कि कोई नागरिक पीआईएल फाइल कर यह भी पूछ सकता है कि एक रुपये का नोट सर्कुलेशन से बाहर क्यों हो गया है। वह तो लीगल टेंडर है।

इस पर आरबीआई के वकील ने नोटों को बदलने के फैसले का पुराना इतिहास, कारणों की तलाश और आंकड़े जुटाने के लिए समय की मांग की तो कोर्ट चिढ़ गया। चीफ जस्टिस नंदराजोग ने कहा,  ‘फैसले के लिए आपको आंकड़े की जरूरत नहीं है। हम आपसे यह नहीं पूछ रहे हैं कि आपने कितने नोट छापे।

जजों ने कहा कि नकली नोटों पर लगाम के लिए नोट बदलने का दावा नोटबंदी में हवा-हवाई हो चुका है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा, ‘आरबीआई से जारी हर मुद्रा वापस उसी के पास जाती है।’  बेंच नोट बदलने का कारण बताने में देरी पर बिफर पड़ी। उसने कहा कि अगर देरी का कोई तार्किक कारण था तो कोर्ट को पहले ही बता दिया जाना चाहिए था।

इसके पहले हाईकोर्ट ने आरबीआई को 1 अगस्त तक इसका जवाब देने का निर्देश दिया था कि आखिर नोट की साइज बार-बार बदलने की उसकी क्या मजबूरी है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने आरबीआई से पूछा था कि ऐसी क्या मजबूरी है जो वह करेंसी नोटों के साइज और उनकी दूसरी विशेषताओं में बार-बार बदलाव कर रहा है। हाईकोर्ट के मुताबिक नोटबंदी ने साबित कर दिया है कि जाली नोटों के अर्थव्यवस्था में प्रचलन को लेकर जो धारणा थी वह गलत थी। नोटबंदी के बाद से आरबीआई ने कई पुराने नोटों की जगह पर नए नोट जारी किए थे। नए नोट जारी करने का यह सिलसिला अभी जारी है।

न्यायाधीश नंदराजोग ने पूछा था कि हम आरबीआई से जानना चाहते हैं कि नोटों में आकार जैसी विशिष्टताओं में लगातार बदलाव करने के पीछे क्या विवशता है। उनका कहना था कि दुनिया में कोई अन्य देश अपने नोटों के आकार और विशिष्टताओं में इतनी जल्दी-जल्दी बदलाव नहीं करता। हाईकोर्ट ने कहा था कि अमेरिका ने डॉलर के नोट का साइज कभी नहीं बदला, लेकिन हमारे यहां 10,20, 50 और यहां तक कि 100 का नोट भी बदल दिया गया है।

नेशनल असोसिएशन ऑफ द ब्लाइंड (एनएबी) की याचिका में दावा किया गया है कि आरबीआई द्वारा जारी किए गए नए नोटों और सिक्कों में बार-बार होने वाले बदलावों से नेत्रहीनों को इन्हें पहचानने और इनमें फर्क करने में दिक्कत हो रही है। याचिका में केंद्रीय बैंक से नए सिक्कों और नोटों में विशिष्ट विशेषताओं को शामिल करने के लिए दिशा-निर्देश मांगे गए हैं।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

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