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सीबीआई बनाम सीबीआईः पूर्व निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ ठोस सबूत का दावा फिर भी बचाने का आरोप

भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई के पूर्व निदेशक राकेश अस्थाना अब क्लीनचिट और पर्याप्त सबूतों के बीच न्यायिक चक्रव्यूह में फंसते दिख रहे हैं। सीबीआई बनाम सीबीआई का यह हाईप्रोफाइल मामला दिनोंदिन गर्माता जा रहा है। सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में शुक्रवार को पूर्व निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में जारी सुनवाई में जांच अधिकारी सतीश डागर और पूर्व जांच अधिकारी अजय कुमार बस्सी के बीच तीखी बहस हुई।

बस्सी ने डागर पर राकेश अस्थाना और अन्य आरोपित अफसरों को बचाने का आरोप लगाया। इस पर कोर्ट में ही मौजूद डागर उनसे भिड़ गए। बस्सी ने कहा कि अस्थाना के खिलाफ दोष साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। इसके बावजूद डागर उन्हें बचाने में जुटे हैं। सीबीआई कोर्ट में अब इस मामले की सुनवाई सात मार्च को होगी।

सीबीआई के विशेष न्यायाधीश संजीव अग्रवाल को मामले के पूर्व जांच अधिकारी अजय कुमार बस्सी ने बताया कि सतीश डागर अस्थाना और अन्य सरकारी कर्मचारियों को बचाने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अस्थाना के खिलाफ पर्याप्त सबूत थे, लेकिन डागर ने न तो उनका मोबाइल फोन जब्त किया न ही अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य। इससे ऐसा लगता है कि वह उन्हें बचाना ही चाह रहे हैं।

कोर्ट में बस्सी ने दावा किया कि मुख्य खिलाड़ी मनोज प्रसाद ने अक्टूबर 2018 में पूछताछ के दौरान इन नामों का खुलासा किया था, लेकिन डागर द्वारा इनकी जांच नहीं की गई थी। बस्सी ने डागर पर यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने न तो अस्थाना का नंबर सीज किया और न ही उनके द्वारा प्रयोग किए जा रहे अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर पाबंदी लगाई। इन सब चीजों से अस्थाना के खिलाफ काफी सबूत मिल सकते हैं।

इस पर डागर भड़क गए। दोनों के बीच बहस शुरू हो गई। डागर ने बस्सी पर आरोप लगाया कि पक्षपातपूर्ण जांच के चलते ही उन्हें हटाया गया है। डागर ने पूर्व जांच अधिकारी के आरोपों पर कहा कि मेरे पास संगठन में आपसे बेहतर एंटीकेडेंट्स हैं। व्यक्तिगत स्तर पर आरोप न लगाएं। मैंने आपको छह बार तलब किया, यदि आप जांच में सहायता करना चाहते हैं तो आप क्यों नहीं आए?

डागर ने कहा कि बस्सी से पूछना चाहिए, उन्होंने केवल 15 और 23 अक्टूबर, 2018 के बीच जांच की, लेकिन उन्हें कैसे पता चला कि सीबीआई में क्या हो रहा है? उसने हमारी जांच में घुसपैठ कैसे की?” इस पर विशेष सीबीआई न्यायाधीश संजीव अग्रवाल ने हस्तक्षेप करते हुआ कहा कि आप दोनों एक ही एजेंसी में हैं। आप दोनों को वहां वापस जाना होगा। सार्वजनिक रूप से इस तरह की हरकत न करें। न्यायाधीश ने कहा कि यदि आवश्यकता हुई तो मैं फिर से आप दोनों को आगे स्पष्टीकरण के लिए बुलाऊंगा, लेकिन साथ में नहीं। सीबीआई ने हैदराबाद के कारोबारी सतीश सना की शिकायत के आधार पर अस्थाना के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

सना 2017 के उस मामले में जांच का सामना कर रहा है जिसमें मांस व्यापारी मोइन कुरैशी की भी संलिप्तता है। कोर्ट ने घूसखोरी के इस मामले में सीबीआई की जांच को लेकर 12 फरवरी को नाखुशी जाहिर करते हुए पूछा था कि बड़ी भूमिकाओं वाले आरोपी खुलेआम क्यों घूम रहे हैं? जबकि जांच एजेंसी ने अपने ही एक डीएसपी को गिरफ्तार कर लिया।

अस्थाना और डीएसपी देवेंद्र कुमार का नाम चार्जशीट के 12वें कॉलम में था, क्योंकि इसमें कहा गया कि उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं। डीएसपी देवेंद्र को 2018 में गिरफ्तार किया गया था, जिसे बाद में जमानत मिल गई थी। सीबीआई ने हैदराबाद के कारोबारी सतीश सना की शिकायत के आधार पर अस्थाना के खिलाफ घूसखोरी का मामला दर्ज किया था।

सना 2017 के उस मामले में जांच का सामना कर रहा है जिसमें मीट कारोबारी मोइन कुरैशी का नाम आया था। इससे पहले 19 फरवरी को अदालत ने सीबीआई से पूछा था कि रिश्वतखोरी के मामले में एजेंसी के पूर्व विशेष निदेशक राकेश अस्थाना का उसने मनोवैज्ञानिक परीक्षण एवं लाई डिटेक्टर टेस्ट क्यों नहीं करवाया।

सीबीआई ने राकेश अस्थाना और डीएसपी देवेन्द्र कुमार को 2018 में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें जमानत दे दी गई थी। दोनों को मामले में आरोपी बनाने के पर्याप्त सबूत न मिलने पर इनके नाम आरोप पत्र के कॉलम 12 में लिख दिए गए थे। सीबीआई ने हैदराबाद के कारोबारी सतीश सना की शिकायत के आधार पर अस्थाना के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और कानूनी मामलों के जानकार हैं। वह इलाहाबाद में रहते हैं।)

This post was last modified on February 29, 2020 10:08 am

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