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Wednesday, September 29, 2021

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छत्रपति शिवाजी एयरपोर्ट का नाम बदलना अडानी को पड़ा भारी

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सन् 2014 के बाद का समय अपने एक खास किस्म के बदलाव की ओर अग्रसर रहा है इस दौरान नीति आयोग के नामकरण के बाद से अनेक नगरों, स्टेशनों, हवाईअड्डों यहां तक कि गली कूचों तथा चौराहों के नाम बदलकर नया इतिहास लिखने की जो कोशिशें हुईं। उसका कभी कहीं लेशमात्र भी विरोध संभवतः नहीं हुआ। हर परिवर्तन को जनता ने सहज रूप से स्वीकार कर लिया क्योंकि प्राचीन इतिहास और खासकर मध्य कालीन नायकों का खात्मा एक तरह से बहुसंख्यक आबादी को अच्छा लगा। उसके बाद आज़ाद भारत के नेताओं पर हमला हुआ वह भी गुजरात में जहां सरदार बल्लभभाई पटेल स्टेडियम का नाम बदल कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने नाम कर लिया। शायद इसलिए क्योंकि उन्होंने उनको स्टेचू ऑफ यूनिटी में कैद कर एक विख्यात पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित कर दिया था।

अफसोस होता है कि भाजपा और संघ के पास अपना कोई कद्दावर नेता नहीं था जो कांग्रेस के नेता जवाहरलाल जी की सरकार के और गांधी जी की हत्या के बाद संघ पर प्रतिबंध लगाने वाले गृहमंत्री लौह पुरुष पटेल को यह सम्मान दिया। बहरहाल यह गुजरात की अपनी राजनीति का हिस्सा हो सकता है। मूल बात ये कि जब पटेल स्टेडियम का नाम बदला गया तब गुजरात शांत रहा। सहजता से गुजरात की जनता ने नरेंद्र मोदी स्टेडियम नाम स्वीकार कर लिया। कतिपय लोग कहते  हैं महात्मा गांधी दुनिया के आईकन हो सकते हैं पर गुजरात के नहीं। इसलिए गांधी को कहीं जगह नहीं।

लेकिन महाराष्ट्र और गुजरात में फ़र्क साफ है वहां उनके आईकन शिवाजी हैं वे नहीं बदलने वाले। अब ताज़ी घटना पर गौर करिए जो मोदी राज की पहली और महत्वपूर्ण घटना है। हुआ यह है कि शिवसेना ने छत्रपति शिवाजी एयरपोर्ट का नाम बदलने की अडानी की करतूत पर पानी फेर दिया। जहां अडानी एयरपोर्ट लिखा गया था उसे मटियामेट कर दिया तथा वहां शिवसेना ने अपने झंडे फहरा कर यह जतला दिया कि शिवाजी का नाम नहीं बदला जा सकता। ये एक नई शुरुआत है। छत्रपति शिवाजी महाराज एयरपोर्ट पर शिवसैनिकों की ओर से अडानी ग्रुप के नाम वाला बोर्ड हटाने का मामला सामने आया है। अडानी एयरपोर्ट लिखे बोर्ड को हटाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। दरअसल मुंबई एयरपोर्ट का नाम अडानी एयरपोर्ट किए जाने को लेकर शिवसेना एतराज जताती रही है। इसी साल जुलाई में अडानी एयरपोर्ट ने मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के मैनेजमेंट का काम संभाला है। इससे पहले मुंबई एयरपोर्ट के मैनेजमेंट का काम जीवीके ग्रुप के पास था। अडानी ग्रुप की मुंबई एयरपोर्ट में 74 फीसदी की हिस्सेदारी है।

इसमें से 50.5 फीसदी की हिस्सेदारी उसने जीवीके ग्रुप से खरीदी है, जबकि 23.5 फीसदी हिस्सेदारी उसने अन्य छोटे पार्टनर्स से ली है। इनमें एयरपोर्ट्स कंपनी साउथ अफ्रीका और बिडवेस्ट ग्रुप शामिल है। यही नहीं बोर्ड तोड़े जाने के बाद शिवसेना ने इसकी जिम्मेदारी भी ली है। शिवसेना ने कहा कि उसे एयरपोर्ट को अडानी के नाम पर रखे जाने को लेकर शिकायतें मिल रही थीं।

अडानी ग्रुप एयरपोर्ट्स की संख्या के लिहाज से देश में सबसे बड़ा एयरपोर्ट ऑपरेटर बनने जा रहा है। अडानी ग्रुप ने पिछले साल के आखिर में AAI से मंगलुरु, लखनऊ और अहमदाबाद एयरपोर्ट्स का अधिग्रहण किया था। अब मुंबई एयरपोर्ट भी अडानी का हो गया है। अडानी समूह अगले महीने नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का निर्माण शुरू करेगा और अगले 90 दिनों में वित्तीय समापन पूरा करेगा, और हवाई अड्डे को 2024 में चालू किया जाएगा।

गौतम अडानी को मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के मैनेजमेंट कंट्रोल मिलने के कुछ ही दिन बाद अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड ने बड़े स्तर पर फेरबदल का ऐलान किया है। ताजा फैसले के तहत मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड  के सीईओ आरके जैन को अब सीईओ एयरपोर्ट्स की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा एएएचएल का अपना हेड ऑफिस मुंबई के बदले अहमदाबाद में शिफ्ट करने का फैसला लिया है। एएएचएल की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि एयरपोर्ट सेक्टर में अडानी ग्रुप बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी के साथ यह निर्णय भी लिया गया है कि AAHL का हेड ऑफिस अब मुंबई के बजाए गुजरात में होगा। हमें उम्मीद है कि यह निर्णय हमें सभी के सहयोग के साथ तेजी से फैसले लेने में मदद करेगा, जो कि इस वक्त सबसे ज्यादा जरूरी है।

देखना यह है कि गुजरात और महाराष्ट्र के बीच गौतम अडानी के रिश्ते किस तरह के बन पाते हैं। अंबानी की नगरी में अडानी की ये दस्तक केंद्र के विश्वास पर ही टिकी है पर शिवसेना के तेवर स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि यहां उनकी राह अन्य प्रदेशों की तरह आसान नहीं होगी। हेड आफिस भी मुम्बई की जगह गुजरात में बनाना भी यही दर्शाता है। कुल मिलाकर अडानी के नाम की पट्टिका हटाना एक उम्दा शुरुआत है।

(सुसंस्कृति परिहार स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

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