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छत्तीसगढ़ः वनाधिकार आवेदनों की पावती न देने पर आदिवासियों ने ग्राम पंचायत को घेरा

कोरबा। जिले के पाली विकासखंड के रैनपुर खुर्द ग्राम पंचायत का घेराव करके सैकड़ों आदिवासी धरने पर बैठ गए हैं। उनकी मांग है कि वनाधिकार दावे का आवेदन लेकर उन्हें पावती दी जाए, जबकि पंचायत सरपंच और सचिव न आवेदन लेने को तैयार हैं, न पावती देने को। ग्रामीणों द्वारा इस इनकार को लिखित में देने की मांग को भी नकार दिया गया है। इसके बाद ही ग्रामीण धरने पर बैठ गए। पंचायत के अंदर न किसी को जाने दिया जा रहा है, न कार्यालय से किसी को बाहर निकलने दिया जा रहा है। ग्रामीण जिम्मेदार अधिकारियों को बुलाने की मांग कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ किसान सभा के बैनर तले कोरबा के आदिवाससी पाली विकासखंड के रैनपुर खुर्द ग्राम पंचायत का घेराव कर के धरने पर बैठ गए हैं। आवेदन लेकर पावती मिलने पर ही आदिवासी ग्रामीण घेराव खत्म करने की बात कह रहे हैं। पंचायत के इस घेराव का नेतृत्व प्रशांत झा, जवाहर कंवर, दीपक साहू आदि कर रहे हैं। शुक्रवार को सुबह 11 बजे शुरू हुआ किसान सभा का घेराव खबर लिखे जाने तक जारी था।

उल्लेखनीय है कि एक ओर जहां राज्य सरकार द्वारा आदिवासियों को वनाधिकार देने के बढ़-चढ़ कर दावे किए जा रहे हैं, वहीं वास्तविकता यह है कि वनाधिकार दावों के आवेदन तक नहीं लिए जा रहे हैं या फिर उन्हें पावती ही नहीं दी जा रही है, जबकि वनाधिकार कानून के तहत आवेदन लेना, उसकी पावती देना और दावेदारी निरस्त होने पर आवेदनकर्ता को लिखित सूचना देना अनिवार्य है। पूरे प्रदेश में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है। रैनपुर ग्राम पंचायत का घेराव इसका जीता-जागता सबूत है।

छत्तीसगढ़ किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष संजय पराते ने राज्य सरकार और पंचायतों द्वारा वनाधिकार कानून के नियमों का उल्लंघन किए जाने की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि कोरबा जिला प्रशासन द्वारा बार-बार वनाधिकार दावों की प्रक्रिया को सुगम बनाने का विज्ञापन किया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत यही है कि उनके आवेदन लेकर पावती तक नहीं दी जा रही है।

उन्होंने कहा कि रैनपुर खुर्द पंचायत के अंतर्गत सैकड़ों ऐसे आदिवासी निवास करते हैं, जिनका पीढ़ियों से जंगल-जमीन पर कब्जा है। कुछ लोगों को आवास योजना का लाभ भी मिल चुका है, लेकिन इसके बावजूद इन आदिवासियों को वन भूमि से विस्थापित करने की कोशिशें जारी हैं। पिछले वर्ष ही पंचायत द्वारा कई परिवारों के आवास तोड़ दिए गए थे, लेकिन किसान सभा के संघर्ष के कारण पंचायत उन्हें विस्थापित नहीं कर पाई है। इन सभी आदिवासियों ने पहले भी पट्टे के लिए आवेदन दिए थे, लेकिन उन्हें रद्दी की टोकरी में फेंक दिया गया और पावती न मिलने के कारण इन आदिवासियों के पास इसका कोई प्रमाण भी नहीं है। इस बार आदिवासी पावती लेने पर अड़े हुए हैं और पंचायत को घेर कर बैठ गए हैं।

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This post was last modified on October 16, 2020 5:02 pm

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