Friday, December 2, 2022

सभी बड़े शहर झुग्गी बस्तियों में तब्दील: सुप्रीम कोर्ट

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उच्च्तम न्यायालय ने देश भर में सार्वजनिक भूमि पर हुए अतिक्रमण को लेकर चिंता व्यक्त की और कहा कि यह एक दुखद कहानी है, जो पिछले 75 वर्षों से जारी है। इससे प्रमुख शहर झुग्गी बस्तियों में बदल गए हैं। जस्टिस ए एम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस सी टी रविकुमार की पीठ ने कहा कि यह सुनिश्चित करने की प्राथमिक जिम्मेदारी स्थानीय प्राधिकार की है कि किसी भी संपत्ति पर अतिक्रमण न हो, चाहे वह निजी हो या सरकारी और इससे निपटने के लिए उन्हें खुद को सक्रिय करना होगा। पीठ ने अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आह्वान किया है। पीठ ने मौखिक रूप से कहा है कि अतिक्रमणों के खिलाफ अधिकारियों का समय पर कार्रवाई नहीं करना ही समस्या की जड़ है।

पीठ ने कहा कि यह समय है कि स्थानीय सरकार जग जाए क्योंकि एक अतिक्रमण हटा दिया जाता है, दूसरी जगह वही अतिक्रमण स्थानांतरित हो जाता है तथा ऐसे व्यक्ति भी होंगे जो इसमें हेरफेर कर रहे हैं और वे पुनर्वास का लाभ भी उठा रहे होंगे। यह इस देश की दुखद कहानी है। यह अंततः करदाताओं का पैसा है जो बर्बाद हो जाता है।

पीठ दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें गुजरात और हरियाणा राज्यों में रेलवे भूमि से अतिक्रमण हटाने से संबंधित मुद्दों को उठाया गया है। पीठ ने कहा कि सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण हर जगह हो रहा है और समस्या का समाधान करना होगा। पीठ ने कहा कि इसलिए, सभी प्रमुख शहर झुग्गी बस्तियों में बदल गए हैं। किसी भी शहर को देखें, अपवाद हो सकता है जिसे हम नहीं जानते हैं। चंडीगढ़ कहा जाता है, अपवाद है लेकिन फिर भी चंडीगढ़ में भी मुद्दे हैं।

रेलवे की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज ने पीठ से कहा कि प्राधिकार इस संबंध में देश भर में कार्रवाई करेगा। पीठ ने कहा कि यह हर जगह हो रहा है। हमें वास्तविकता का सामना करना होगा। समस्या को हल करना होगा और इसे कैसे हल करना है, संबंधित सरकार को यह जिम्मेदारी लेनी होगी।

पीठ ने कहा कि यह सुनिश्चित करने की प्राथमिक जिम्मेदारी स्थानीय सरकार की है कि किसी भी संपत्ति, निजी या सरकारी अथवा सार्वजनिक संपत्ति पर कोई अतिक्रमण न हो। यह पिछले 75 वर्षों से जारी एक दुखद कहानी है। पीठ ने कहा कि रेलवे यह सुनिश्चित करने के लिए समान रूप से जिम्मेदार है कि उसकी संपत्तियों पर कोई अतिक्रमण नहीं हो और इस मुद्दे को उसके संज्ञान में लाए जाने के तुरंत बाद उसे अनधिकृत कब्जाधारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करनी चाहिए। पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि गुजरात में सूरत-उधना से जलगांव रेलवे लाइन परियोजना अभी भी अधूरी है, क्योंकि रेलवे संपत्ति पर 2.65 किलोमीटर की सीमा तक अनाधिकृत ढांचे खड़े हैं।

हाईकोर्ट ने अपने फैसलों में रेलवे लाइनों के ‌किनारे अनधिकृत रूप से बसे लोगों को बेदखल करने की अनुमति दी थी। सुनवाई के दरमियन पीठ ने कहा कि रेलवे को अपनी जिम्मेदारी पर नहीं छोड़ा जा सकता। पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज के तर्क को स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि बेदखल व्यक्तियों के पुनर्वास की जिम्मेदारी स्थानीय प्राधिकरण और राज्य सरकार की है।पीठ ने कहा कि विशेष रेलवे अधिनियम है, जिसके तहत रेलवे को अतक्रमण करने वालों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करने का अधिकार प्राप्त है। इसके अलावा, रेलवे अपनी संपत्तियों की सुरक्षा के लिए एक विशेष पुलिस बल रखता है।

जस्टिस खानविलकर ने कहा कि रेलवे को भी जिम्मेदारी लेने दें। जस्टिस खानविलकर ने एएसजी से पूछा कि आप अपनी संपत्ति को खाली कराना चाहते हैं। आप कार्रवाई करें। वह पुलिस बल कहां है? यदि आप अपनी संपत्ति की रक्षा नहीं कर सकते हैं तो आप पुलिस बल पर क्यों खर्च कर रहे हैं?जवाब में, एएसजी ने कहा कि हम अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। मैं मानता हूं, हमारी ओर से चूक हुई है। हमने अब कार्रवाई की है। एएसजी ने आश्वासन दिया कि रेलवे अतिक्रमणकारियों के खिलाफ पूरे भारत में सख्त कार्रवाई करेगा और कहा कि वह इस संबंध में उठाए गए कदमों को निर्दिष्ट करते हुए एक हलफनामा प्रस्तुत करेगा।

पीठ ने कहा कि वह रेलवे के प्रदर्शन की समीक्षा करेगी। पीठ ने रेलवे, स्थानीय सरकार और राज्य सरकार को संयुक्त रूप से उत्तरदायी ठहराया, ताकि बेदखल किए गए लोगों को 6 महीने के लिए प्रति माह 2000 रुपये प्रति माह का भुगतान करने की जिम्मेदारी दी जाए। पीठ  ने अनुमति दी कि रेलवे झुग्गीवासियों को बेदखली नोटिस दे। सा‌थ ही बेदखल व्यक्तियों को अनुमति दी कि वो स्थानीय प्राधिकरण या प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पुनर्वास का प्रयास करें। पीठ ने निर्देश दिया कि रेलवे को अनाधिकृत कब्जाधारियों के खिलाफ तुरंत आपराधिक कार्रवाई शुरू करनी चाहिए। साथ ही अतिक्रमण करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

 (वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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