चीफ जस्टिस और विकास सिंह के बीच विवाद थमा, बार में टकराव की आशंका से सिब्बल और कौल के खिलाफ प्रस्ताव वापस

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चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के बीच चल रहा विवाद थम गया है। दोनों ही तरफ के एक्शन में इस बात के साफ संकेत मिल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट बार ने फैसला लिया है कि वो कपिल सिब्बल और नीरज किशन कौल के खिलाफ कोई प्रस्ताव लाने नहीं जा रही है। एग्जीक्यूटिव कमेटी की बुधवार देर शाम हुई मीटिंग में फैसला लिया गया कि 16 मार्च यानि गुरुवार को होने वाली जनरल बॉडी की मीटिंग अब नहीं होगी।

बुधवार सुबह सीजेआई ने जमीन मामले की सुनवाई के लिए स्पेशल बेंच गठित कर दी। इसमें तीन जजों के साथ वो खुद शामिल हैं। मामले की सुनवाई शुक्रवार को होगी। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह तारीख की मांग को लेकर ही सीजेआई के पास गए थे। तभी दोनों के बीच विवाद हुआ था। उधर बुधवार की सुबह सीजेआई ने अपने नरम रुख के संकेत दिए तो शाम होते-होते बार भी पिघलती दिखी।

सुप्रीम कोर्ट बार ने फैसला लिया है कि वो कपिल सिब्बल और नीरज किशन कौल के खिलाफ कोई प्रस्ताव लाने नहीं जा रही है। एग्जीक्यूटिव कमेटी की आज देर शाम हुई मीटिंग में फैसला लिया गया कि 16 मार्च यानि गुरुवार को होने वाली जनरल बॉडी की मीटिंग अब नहीं होगी। होली से एक दिन पहले यानि 7 मार्च को फैसला लिया गया था कि कपिल सिब्बल और कौल के खिलाफ प्रस्ताव को जनरल बॉडी की मीटिंग में रखा जाएगा। वहीं वोटिंग से तय होगा कि क्या एक्शन दोनों पर लिया जाए।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और जूडिशरी के बीच सुलह में वकीलों ने अहम भूमिका अदा की। मंगलवार की शाम तकरीबन पौने पांच सौ वकीलों ने विकास सिंह को चिट्ठी लिख कपिल सिब्बल के स्टैंड को सही करार दिया था। उनका कहना था कि भारत का संविधान सभी को बोलने की आजादी देता है तो वो सुप्रीम कोर्ट के वकीलों की आवाज क्यों दबा रहे हैं। ये तो बिलकुल गलत कदम है।

वकीलों का कहना था कि सिब्बल और कौल ने मामले को ठंडा करने की मंशा के तहत ही सीजेआई चंद्रचूड़ से माफी मांगी थी। विकास सिंह उनके इस कदम को गलत तरीके से ले रहे हैं। उनका कहना था कि बार कपिल सिब्बल और कौल के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम न उठाए तो ये उसके लिए ही बेहतर रहेगा।

वकीलों की चिट्ठी से साफ था कि वकीलों का एक धड़ा गुरुवार को होने वाली जनरल बॉडी मीटिंग में विकास सिंह का पुरजोर विरोध करेगा। बुधवार सुबह ये बात भी सामने आ गई कि भारत के पूर्व अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने भी विकास सिंह को चिट्ठी लिख सिब्बल और कौल के खिलाफ कोई एक्शन न लेने को कहा है।

मतलब साफ था कि वकीलों का एक धड़ा विकास सिंह को मनमानी करने की अनुमति देने नहीं जा रहा था। विकास सिंह पर दबाव साफ दिख रहा था। शाम हुई तो एग्जीक्यूटिव कमेटी की मीटिंग आनन फानन में बुलाकर दोनों के खिलाफ प्रस्ताव लाने की बात को खारिज कर दिया गया।

दरअसल सीजेआई और विकास सिंह के बीच 2 मार्च को तब विवाद हुआ जब बार प्रधान ने जमीन मामले की सुनवाई के लिए तत्काल तारीख देने की बात कही। सीजेआई उनके रवैये से भड़क गए और चिल्लाते हुए उन्हें अपनी कोर्ट से बाहर जाने को कहा।

दरअसल सीजेआई का पारा तब चढ़ा जब विकास सिंह ने कहा कि तारीख के लिए वो उनके घर तक जा सकते हैं। उसके बाद कपिल सिब्बल और कौल ने सीजेआई से बार की तरफ से माफी मांगी। विकास सिंह को ये रास नहीं आया तो एग्जीक्यूटिव बॉडी की मीटिंग में फैसला लिया गया कि 16 मार्च को जनरल बॉडी की मीटिंग बुलाकर दोनों के खिलाफ प्रस्ताव लाया जाएगा। उसके बाद बार के होली मिलन समारोह से भी सीजेआई ने किनारा कर लिया। उसके बाद से तल्खी बरकरार थी।

(जे.पी.सिंह वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं)

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