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कोरोनाः जहां कभी पढ़ाते थे उसी अस्पताल में डॉक्टर की बेबसी से हुई मौत

जैसे-जैसे कोरोना संक्रमण की दर बढ़ती जा रही है तंत्र फेल होता जा रहा है। सारे दावे धरे रह जा रहे हैं। सिस्टम का चेहरा और क्रूर होता जा रहा है। आदमी और लाचार और निसहाय नज़र आ रहा है। कभी सिस्टम का हिस्सा रहे डॉ. जगदीश मिश्रा खुद सिस्टम की क्रूरता का शिकार बन गये। डॉ. जगदीश मिश्र स्वरूप रानी अस्पताल के एचओडी सर्जरी पद से रिटायर हुए थे। कोरोना से संक्रमित होने के बाद वो और उनकी पत्नी डॉ. रमा मिश्र स्वरूप रानी अस्पताल में भर्ती हो गये थे, लेकिन अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के चलते डॉ. जगदीश मिश्र की मौत हो गई। ये जानकारी खुद स्वरूप रानी अस्पताल में कोरोना मरीज के तौर पर भर्ती रहीं उनकी पत्नी डॉ. रमा मिश्र ने बताई हैं।

वहीं उत्तर प्रदेश की कोरोना राजधानी लखनऊ बुरी तरह प्रभावित है। शहर में ऑक्सीजन की कालाबाजारी चरम पर है। आलम यह है कि ऑक्सीजन सिलिंडर दस गुना ज्यादा कीमत पर बेचे जा रहे हैं। पांच हजार कीमत के ऑक्सिजन सिलिंडर के लिए 40-50 हजार रुपये वसूले जा रहे हैं। इतना ही नहीं अडवांस बुकिंग करवाने पर दूसरे दिन डिलीवरी हो रही है। वहीं छोटे ऑक्सीजन सिलेंडर का दाम जो महीने भर पहले ढाई तीन हजार रुपये था वो 15 हजार रुपये हो गया है।

हर दिन बढ़ते कोरोना संक्रमण की दर के हिसाब से ऑक्सीजन की दर में चार से पांच हजार रुपये प्रति सिलेंडर कीमत बढ़ रही है। ऑक्सीजन की कमी पर अब तक आंख मूंदे रही मोदी सरकार ने देश के 12 राज्यों में ऑक्सीजन की किल्लत से निजात पाने के लिए सभी राज्यों में जनस्वास्थ्य सुविधाओं में 162 ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने का निर्णय किया है। इन ऑक्सीजन प्लांट की मदद से कुल 154.19 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन संभव होगा। इस तरह कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहे लोगों के उपचार में भारी मदद मिलेगी।

गौरतलब है कि शनिवार को पीएम मोदी ने कोविड-19 पर समीक्षा बैठक कर ऑक्सीजन की कमी समेत बेड्स की संख्या बढ़ाने के निर्देश, संबंधित अधिकारियों को दिए थे। केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने कहा है कि देश में एक सौ अस्‍पतालों के पास प्रधानमंत्री आपात स्थिति नागरिक सहायता और राहत (पीएम केयर्स फंड) के अन्तर्गत अपने ऑक्‍सीजन संयंत्र होंगे। कोविड महामारी के दौरान आवश्‍यक चिकित्‍सा उपकरण और ऑक्‍सीजन की उपलब्‍धता की समीक्षा के लिए अधिकार प्राप्‍त दूसरे समूह की बैठक में यह निर्णय लिया गया। केंद्र सरकार ने कोविड प्रबंधन के विविध पहलुओं पर नजर रखने के लिए ऐसे छह समूह का गठन किया है।

मंत्रालय ने मीडिया को बताया है कि इस फैसले से प्रेशर स्विंग एर्ब्‍जाब्‍सन-पीएसए प्‍लांट निर्मित ऑक्‍सीजन को बढ़ावा मिलेगा और अस्‍पतालों को मेडिकल ऑक्‍सीजन में आत्‍मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय को ऐसे पीएसए प्‍लांट लगाने की मंजूरी के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में एक सौ अस्‍पतालों की पहचान करने का निर्देश दिया गया है। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने कहा कि कोविड मरीजों के उपचार के लिए मेडिकल ऑक्‍सीजन महत्‍वपूर्ण घटक है। अधिक कोरोना संक्रमण वाले राज्‍यों से मेडिकल ऑक्‍सीजन की मांग विशेष रूप से की जा रही थी। इन 12 राज्‍यों में महाराष्‍ट्र, मध्‍य प्रदेश, गुजरात, उत्‍तर प्रदेश, दिल्‍ली, छत्‍तीसगढ, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा और राजस्‍थान शामिल हैं।

वहीं इसके पहले केंद्र सरकार ने ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए 50 हजार मीट्रिक टन ऑक्सीजन के आयात का फैसला किया था। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक ‘मेडिकल ऑक्सीजन की बढ़ती मांग को देखते हुए 50 हजार मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन के आयात के लिए टेंडर जारी किया जाएगा।

संभावित स्रोतों की पहचान विदेश मंत्रालय करेगा। स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी कहा है कि अप्रैल 20, 25 और 30 के लिए 12 अधिक डिमांड वाले राज्यों के लिए 4880, 5629, 6593 मीट्रिक टन की पहचान की गई है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on April 19, 2021 3:25 pm

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