बीजेपी के विज्ञापन पर कोर्ट की रोक, गंगोपाध्याय के 24 घंटे के लिए चुनाव प्रचार पर रोक

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एक और कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को भाजपा को अगले आदेश तक टीएमसी के खिलाफ किसी भी प्रकार के अपमानजनक विज्ञापन प्रकाशित करने से रोक दिया। हाईकोर्ट ने पार्टी पर व्यक्तिगत हमले करने वाले भाजपा के विज्ञापनों के खिलाफ टीएमसी द्वारा दायर शिकायतों को सुनने में ‘घोर विफल’ होने के लिए भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) को भी फटकार लगाई हैतो दूसरी ओर चुनाव आयोग ने कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व जज और तमलुक सीट से बीजेपी उम्मीदवार अभिजीत गंगोपाध्याय के चुनाव प्रचार पर 24 घंटे के लिए रोक लगा दी है। वे 21 मई की शाम 5 बजे से चुनाव प्रचार नहीं कर सकेंगे। गंगोपाध्याय के खिलाफ टीएमसी ने शिकायत की थी और सीएम ममता बनर्जी पर अमर्यादित टिप्पणी किए जाने का आरोप लगाया था।

सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य ने कहा-कि चुनाव आयोग तय समय में टीएमसी की शिकायतों को सुनने में पूरी तरह विफल रही है। यह अदालत आश्चर्यचकित है कि चुनाव खत्म होने के बाद शिकायतों का समाधान तय समय में करने में भारत का चुनाव आयोग विफल हुआ है। यह अदालत निषेधाज्ञा आदेश (स्टे) पारित करने के लिए बाध्य है। जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य ने भाजपा के विज्ञापनों के खिलाफ टीएमसी द्वारा दायर शिकायतों की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की है।

जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य ने कहा कि ‘साइलेंस पीरियड’ (चुनाव से एक दिन पहले और मतदान के दिन) के दौरान बीजेपी के विज्ञापन आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) और टीएमसी के अधिकारों और नागरिकों के निष्पक्ष चुनाव के अधिकार का भी उल्लंघन थे। अदालत ने आदेश जारी करते हुए कहा-टीएमसी के खिलाफ लगाए गए आरोप और प्रकाशन पूरी तरह से अपमानजनक हैं और निश्चित रूप से इसका उद्देश्य प्रतिद्वंद्वियों का अपमान करना और व्यक्तिगत हमले करना है। इसलिए, उक्त विज्ञापन सीधे तौर पर एमसीसी के विरोधाभासी होने के साथ-साथ याचिकाकर्ता और भारत के सभी नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन है। स्वतंत्र, निष्पक्ष और बेदाग चुनाव प्रक्रिया के लिए, भाजपा को अगले आदेश तक ऐसे विज्ञापन प्रकाशित करने से रोका जाना चाहिए।

भाजपा के आपत्तिजनक विज्ञापनों को लेकर टीएमसी ने 4 मई को ही केंद्रीय चुनाव आयोग से शिकायत की थी। टीएमसी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर बताया कि भाजपा ने बंगाल के कुछ क्षेत्रीय समाचार पत्रों में विज्ञापन दिया है, जो “अपमानजनक, झूठे थे और मतदाताओं से धार्मिक आधार पर वोट करने की अपील करते थे।”

चुनाव आयोग कानों में तेल डाले बैठा रहा। जिस तरह उसने पीएम मोदी के साम्प्रदायिक भाषणों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उसी तरह इस मामले में भी किया गया। चुनाव आयोग ने जब देखा कि मामला अदालत में चला गया है और कोर्ट एक्शन के लिए कह सकता है तो आयोग शनिवार 18 मई को सक्रिय हुआ। आयोग ने शनिवार को पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार को उनकी पार्टी द्वारा कथित तौर पर टीएमसी को निशाना बनाने वाले विज्ञापनों पर दो अलग-अलग कारण बताओ नोटिस जारी किए। आयोग ने बीजेपी नेता को मंगलवार शाम 5 बजे तक अपना जवाब देने को कहा है।

चुनाव आयोग ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को दिए नोटिस में कहा है कि विज्ञापनों को मौजूदा लोकसभा चुनावों के लिए लागू आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) और राजनीतिक दलों को दी गई सलाह का उल्लंघन क्यों नहीं माना जाना चाहिए। नोटिस में दी गई अंग्रेजी प्रतिलिपि के अनुसार, एक विज्ञापन का शीर्षक “तृणमूल भ्रष्टाचार का मूल कारण है” जबकि दूसरे का शीर्षक “सनातन विरोधी तृणमूल” है।

इधर चुनाव आयोग ने कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व जज और तमलुक सीट से बीजेपी उम्मीदवार अभिजीत गंगोपाध्याय विवादों में घिर गए हैं. चुनाव आयोग ने गंगोपाध्याय के चुनाव प्रचार पर 24 घंटे के लिए रोक लगा दी है. गंगोपाध्याय के खिलाफ टीएमसी ने शिकायत की थी और सीएम ममता बनर्जी पर अमर्यादित टिप्पणी किए जाने का आरोप लगाया था।अभिजीत गंगोपाध्याय के खिलाफ टीएमसी ने शिकायत की थी.आयोग ने गंगोपाध्याय को अपने सार्वजनिक बयानों में सावधानी बरतने की भी सख्त चेतावनी दी है।चुनाव आयोग ने अभिजीत की टिप्पणियों की निंदा की और इसे निम्न स्तर का व्यक्तिगत हमला और महिलाओं का सीधा अपमान बताया है।

चुनाव आयोग ने कहा, अभिजीत गंगोपाध्याय का ऐसा बयान जो किसी भी महिला के संबंध में उपयोग किए जाने पर पूरी तरह से निंदनीय है। किसी वरिष्ठ राजनीतिक नेता की बात छोड़िए। एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को निशाना बनाया गया है।
ईसीआई ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को भी सलाह दी है कि वे अपनी पार्टी की ओर से सभी उम्मीदवारों और प्रचारकों को एक एडवाइजरी जारी करें, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि चुनावी अभियान के दौरान यह चूक दोबारा ना हो।

इससे पहले आयोग ने अभिजीत को नोटिस भेजा था और जवाब मांगा था। अब आयोग ने कहा, हमने अभिजीत के जवाब को ध्यान से पढ़ा है और दिए गए बयान को फिर से देखा है और आश्वस्त हैं कि उन्होंने निम्न स्तर का व्यक्तिगत हमला किया है और इस प्रकार आदर्श आचार संहिता के प्रावधान उल्लंघन किया है। ईसीआई का कहना है कि अतीत और वर्तमान में महिलाओं को भारतीय समाज में सर्वोच्च सम्मान मिला है और भारतीय संविधान और देश की सभी संस्थाओं ने सभी मोर्चों पर महिलाओं के अधिकारों और सम्मान को सुनिश्चित करने और उन्हें और अधिक सशक्त बनाने के विचारों और आदर्शों को लगातार आगे बढ़ाया है।

ईसीआई का कहना है कि आयोग चुनावी प्रक्रिया में महिलाओं के प्रतिनिधित्व और भागीदारी को मजबूत करने में लगा है।जबकि इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन और वोटर टर्नआउट में जेंडर गैप में काफी सुधार हुआ है और वास्तव में महिलाएं आगे बढ़ी हैं. आयोग का कहना था कि इस तरह के घृणित शब्द अभिजीत गंगोपाध्याय की एजुकेशनल और प्रोफेशनल बैकग्राउंड से जुड़े व्यक्ति ने कहे हैं। इसलिए वो किसी भी लाभ के हकदार नहीं हैं। अभिजीत के शब्दों ने पश्चिम बंगाल को नुकसान और बदनामी पहुंचाई है, जहां महिलाओं के सम्मान की एक विशिष्ट परंपरा है।

अभिजीत गंगोपाध्याय ने 15 मई को हल्दिया में चुनावी सभा को संबोधित किया था और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी पर विवादित टिप्पणी की थी।कथित वीडियो में अभिजीत को हालिया संदेशखाली स्टिंग का जिक्र करते हुए ममता बनर्जी की ‘कीमत’ पर सवाल उठाते सुना जा रहा है। इस वीडियो में अभिजीत कहते हैं कि तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि रेखा पात्रा (बीजेपी की संदेशखाली उम्मीदवार) को 2,000 रुपये में खरीदा गया है। आपकी कीमत क्या है, ममता बनर्जी? यदि आपको 8 लाख रुपये दिए जाते हैं तो आप एक नौकरी देती हैं। यदि आपको 10 लाख रुपये दिए जाते हैं तो आप एक नौकरी देती हैं। राशन दूसरे देश ले जाया जाता है।क्या आपकी कीमत 10 लाख रुपये है? क्या रेखा पात्रा को खरीदना आसान है, क्योंकि वो गरीब है? अभिजीत ने आगे सवाल किया कि एक महिला दूसरी महिला पर ऐसे आरोप कैसे लगा सकती है। क्या वे (ममता बनर्जी) भी एक महिला हैं?

लोकसभा चुनाव 2024 में केंद्रीय चुनाव आयोग की खासी किरकिरी हो रही है। वो पीएम मोदी सहित तमाम भाजपा नेताओं के साम्प्रदायिक भाषणों को रोक नहीं पाया। देश-विदेश के मीडिया ने इस बारे में खुलकर रिपोर्ट छापी। ईवीएम को लेकर भी चुनाव आयोग विवादों में घिरा हुआ है। आयोग इस जिद पर पड़ा है कि ईवीएम बिल्कुल सही है और गड़बड़ी नहीं हो सकती। जबकि जनता ईवीएम को लेकर प्रदर्शन कर रही है, तमाम चिन्ताएं जता रही है।

अभी कल ही यूपी के एटा में एक युवक को ईवीएम के जरिए भाजपा को 8 वोट फर्जी तरीके से दिलाने का वीडियो वायरल हुआ। वो युवक एक भाजपा नेता का बेटा है। चुनाव आयोग ने उस वीडियो का संज्ञान रविवार शाम को लिया और कार्रवाई का निर्देश यूपी के अधिकारियों को जारी किया। उस युवक को अब गिरफ्तार कर लिया गया है। इस तरह चुनाव आयोग पाक साफ होने की दलीलें देता रहता है लेकिन उसकी असलियत जल्द सामने आ जाती है।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं)

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