Sunday, June 26, 2022

कोरोना से मौतें रोकने में सरकार की विफलताओं के खिलाफ भाकपा-माले का प्रदर्शन

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लखनऊ। भाकपा-माले ने कोरोना से मौतें रोकने में सरकार की विफलताओं के विरोध में रविवार को राज्यव्यापी वर्चुअल प्रतिवाद किया। यह प्रतिवाद दोपहर बारह से एक बजे के बीच घरों, पार्टी कार्यालयों व कार्यस्थलों से कोविड नियमों का पालन करते हुए किया गया। प्रतिवादकर्ता हाथों में नारे और मांगें लिखी तख्तियां लिये थे। उन्होंने इसकी तस्वीरें व वीडियो सोशल मीडिया पर डाले। कई जिलों से मांग पत्र सरकार को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्रेषित किया गया।

प्रदेशव्यापी विरोध के माध्यम से जिन सवालों और मांगों को पार्टी ने उठाया, उनमें प्रमुख थे, ‘एम्बुलेंस, बेड, ऑक्सीजन व वेंटिलेटर के अभाव में तड़पते कोविड मरीजों की मौतों का जिम्मेदार कौन? योगी-मोदी जवाब दो!’, ‘गंभीर मरीजों के लिए अतिशीघ्र एम्बुलेंस, अस्पतालों में पर्याप्त बेड, आईसीयू, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर व दवा-इंजेक्शन की उपलब्धता की गारंटी करो’, ‘ऑक्सीजन, रेमडेसिविर व अन्य जीवन रक्षक दवाओं की कालाबाजारी रोको’ ‘सरकारी व निजी अस्पतालों में सभी की मुफ्त कोरोना जांच व इलाज, आरटी-पीसीआर टेस्ट की संख्या पर्याप्त रूप से बढ़ाना और रिपोर्ट 24 घंटे में देना सुनिश्चित करो’, ‘जिले व ब्लॉक स्तर पर कोविड इलाज को जरूरी सुविधाओं से लैस अस्पताल, डॉक्टर व आईसीयू उपलब्ध कराओ’, ‘सभी को मुफ्त कोरोना वैक्सीन का इंतजाम करो, निजी अस्पतालों में वैक्सीन-इलाज पर खर्च की प्रतिपूर्ति सरकार करे’, ‘प्रवासी मजदूरों को ससम्मान घर पहुंचाने और उन्हें व सभी गरीबों को अगले तीन माह तक प्रतिमाह 10 हजार रुपये भत्ता व छह माह तक मुफ्त राशन-ईंधन दो,  और ‘मनरेगा में रोजगार सृजन व शहरी गरीबों को भी रोजगार की व्यवस्था करो’।

इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर को रोकने में योगी-मोदी सरकार की लापरवाही आपराधिक व विफलता अक्षम्य है। यदि राज्य में ऑक्सीजन सिलेंडरों, कोविड अस्पतालों व बिस्तरों का अग्रिम इंतजाम हुआ रहता, तो कई कीमती जानें बचाई जा सकती थीं। कई महत्वपूर्ण अस्पतालों में वेंटिलेटर तो सप्लाई कर दिए गये, मगर उन्हें चलाने वाले तकनीशियनों व विशेषज्ञों की उचित व्यवस्था नहीं की गई। लिहाजा वैंटिलेटर का स्टॉक होते हुए भी दो-तिहाई संख्या धूल फांक रही है। केरल जैसे राज्य ने इसी महामारी के बीच ऑक्सीजन प्लांट पूर्व में लगाकर ऑक्सीजन के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल कर ली और दूसरे राज्यों को आपूर्ति करने की क्षमता भी बना ली। मगर यूपी जैसे बड़े राज्य की मौजूदा सरकार राम भरोसे रही, जिसका हस्र सभी देख व झेल रहे हैं।

वक्ताओं ने कहा कि योगी सरकार ने कोरोना की पहली लहर और उसके भी पहले गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज ऑक्सीजन कांड से कोई सबक नहीं लिया। वह व्यवस्थाओं के लिए कोरोना लहर के सुनामी बनने का इंतजार करती रही और प्यास लगने पर कुआं खोदने चली। लिहाजा उत्तर प्रदेश कोरोना प्रदेश और श्मशान प्रदेश बन गया है, जहां जनाजों के लिए कई गुनी कीमत चुकानी पड़ रही है और लाशों को दफनाने के लिए लकड़ियां तक कम पड़ गईं। इस आपराधिक लापरवाही की जिम्मेदारी लेते हुए सरकार को पदत्याग कर देना चाहिए।

राज्यव्यापी आह्वान के तहत लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, गाजीपुर, मथुरा सहित विभिन्न जिलों में प्रतिवाद किया गया। राज्य सचिव कामरेड सुधाकर यादव ने राबर्ट्सगंज (सोनभद्र) में प्रतिवाद का नेतृत्व किया। उन्होंने सरकार को चेताया कि वैज्ञानिकों ने मई के महीने में कोरोना संक्रमण में और भी तेजी आने की संभावना जताई है। लिहाजा सरकार को कोरोना से निपटने में अभी भी रह गई कमियों (लूपहोल्स) को समय से पूर्व दूर कर लेनी चाहिये और चुनावों व वोटों की तुलना में इंसानी जिंदगियां बचाने को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।

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