Thursday, December 2, 2021

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राफेल डील मामला:माकपा ने की पीएम की भूमिका की जेपीसी से जांच की मांग

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माकपा ने रविवार को राफेल सौदे में सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के गठन की मांग की तो वहीं कांग्रेस ने राफेल विमानों की खरीद में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए सौदे की जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराए जाने की मांग की और कहा कि सच का पता लगाने के लिए जांच का केवल यही रास्ता है। अन्य विपक्षी दलों ने राफेल मुद्दे पर एक रहस्यमय चुप्पी ओढ़ रखी है। भ्रष्टाचार के हमाम में नंगे होने के कारण ज्यादातर विपक्षी दल चुप ही रहना बेहतर सझते हैं। वैसे राफेल संसद के पावस सत्र ,जो 19 जुलाई से शुरू होने जा रहा है, के जेपीसी के मुद्दे पर हंगामेदार होने की सम्भावना है।   

माकपा सचिव सीताराम येचुरी ने रविवार को एक प्रेस बयान जारी कर कहा कि फ्रांसीसी लोक अभियोजन सेवा (पीएनएफ) ने मोदी सरकार द्वारा 2016 में राफेल लड़ाकू विमानों के लिए किए गए अरबों डॉलर के सौदे में एक फ्रांसीसी न्यायाधीश द्वारा जांच करने का आदेश दिया है और पीएनएफ की वित्तीय शाखा के एक निर्णय के बाद, 14 जून को अंतर-सरकारी समझौते में न्यायिक जांच औपचारिक रूप से शुरू हो गई है।

माकपा ने कहा कि एक फ्रांसीसी खोजी वेबसाइट द्वारा उजागर किए गए सौदे से संबंधित आधिकारिक कागजात बताते हैं कि राफेल जेट के निर्माता डसॉल्ट एविएशन और अनिल अंबानी के रिलायंस समूह ने मोदी के नए सौदे की घोषणा और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को इससे बाहर करने से 15 दिन पहले 26 मार्च, 2015 को एक समझौता किया था।यह माकपा द्वारा उठाई गई आशंकाओं की पुष्टि करता है कि पहले के खरीद समझौते से प्रधानमंत्री मोदी का हटना गहरे भ्रष्टाचार और धनशोधन से संबंधित है।’

बयान में कहा गया है कि माकपा पोलित ब्यूरो इस पूरे प्रकरण में प्रधानमंत्री और सरकार की भूमिका की जांच करने और सौदे की सच्चाई स्थापित करने के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति के गठन की सितंबर, 2018 में उठाई गई अपनी मांग को दोहराता है।

कांग्रेस ने राफेल विमानों की खरीद में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए सौदे की जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराए जाने की मांग की और कहा कि सच का पता लगाने के लिए जांच का केवल यही रास्ता है। राफेल सौदे को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा कि सौदे से जुड़ी घटनाएं और तथ्य एक-एक करके अलमारी से बाहर आ रहे हैं। उन्होंने ट्वीट किया कि अगर इसमें कोई रहस्य नहीं है तो एक बैठक में पूरी कहानी क्यों नहीं बता देते?

पी चिदंबरम ने कुछ तारीखों का जिक्र कर पूछा है कि पीएम बताएं इन डेट्स पर क्या हुआ था।चिदंबरम ने राफेल विमान सौदे के दौरान हुए खुलासों की तारीख ट्वीट करते हुए पूछा कि क्या पीएम, या रक्षामंत्री इस बात की जानकारी दे सकते हैं कि इन तारीखों पर क्या हुआ?

25 मार्च 2015 को दसाल्ट एविएशन के चेयरमैन एरिक ट्रैपियर ने कहा था कि 126 राफेल खरीदने की डील 95 फीसदी पूरी हो चुकी है। इसके ठीक एक दिन बाद, 26 मार्च को दसां और रिलायंस के बीच MoU साइन हुआ।8 अप्रैल 2015 को तत्कालीन विदेश सचिव ने कहा था कि दसॉल्ट, रक्षा मंत्रालय और HAL के बीच चर्चा जारी है. 10 अप्रैल 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने 36 राफेल विमान खरीदने का ऐलान किया था।26 जनवरी 2016 को भारत और फ्रांस के बीच 36 राफेल विमान खरीदने को लेकर MoU साइन हुआ था। नवंबर 2016 में सरकार ने संसद में राफेल की कीमत की जानकारी दी थी।

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा फ्रांस की वेबसाइट ‘मीडियापार्ट’ ने रिलायंस-डसॉल्ट डील के सारे सबूत सार्वजनिक कर दिए हैं।मोदी सरकार और राफेल डील अब साफ हो गई है।क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब संयुक्त संसदीय समिति की जांच की अनुमति देंगे। सुरजेवाला ने कहा कि भ्रष्टाचार, देशद्रोह, सरकारी खजाने को नुकसान से जुड़े राफेल घोटाले का घिनौना पदार्फाश आखिरकार उजागर हो गया है। उन्होंने पूछा कि क्या प्रधानमंत्री मोदी देश को जवाब देंगे?जिस तरह से राजनीति कर रहे हैं वह दुखद है।

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद, सभी केंद्र सरकारों ने राष्ट्रीय सुरक्षा को एक गंभीर मुद्दा माना है और इसका राजनीतिकरण करने से परहेज किया है लेकिन, मोदी सरकार को जब अपने उद्योगपति मित्रों की जेब भरनी होती है तो, राष्ट्रीय सुरक्षा केंद्र के लिए नारेबाजी का एक रूप बन जाती है।उन्होंने कहा कि बीजेपी 24 घंटे बीत जाने के बाद भी चुप क्यों है।प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य इस मामले को लेकर चुप हैं लेकिन इस चुप्पी की गूंज दुनिया भर में सुनी जा रही है।

उन्होंने कुछ दस्तावेज पेश किए और कहा कि भारतीय वार्ताकारों द्वारा सौदे के लिए तय की गई राशि में भारी वृद्धि हुई है और यह भी आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार खंड रहस्यमय तरीके से गायब हो गया।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जांच का आदेश देना चाहिए और सौदे पर सफाई भी देनी चाहिए।

गौरतलब है कि फ्रांसीसी वेबसाइट मीडियापार्ट ने 2016 के अंतर-सरकारी सौदे पर इस साल अप्रैल में रिपोर्टों की एक सीरीज में बताया कि इस डील में भ्रष्टाचार और पक्षपात की न्यायिक जांच के लिए एक न्यायाधीश की नियुक्ति की गई थी।मीडियापार्ट ने आगे कहा कि 2016 में भारत को 36 डसॉल्ट-निर्मित राफेल लड़ाकू विमानों की 7.8 बिलियन यूरो की बिक्री पर फ्रांस में संदिग्ध भ्रष्टाचार की न्यायिक जांच खोली गई है। मीडियापार्ट ने कहा कि जांच राष्ट्रीय वित्तीय अभियोजकों के कार्यालय द्वारा शुरू की गई थी।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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