Wednesday, October 27, 2021

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राजनीतिक बदले की भावना से हुई दारापुरी की गिरफ्तारी: अखिलेन्द्र

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लखनऊ। राजनीतिक बदले की भावना से मजदूर किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष व लोकप्रिय अम्बेडकरवादी मूल्यों के नेता पूर्व आईपीएस अधिकारी एसआर दारापुरी की गिरफ्तारी प्रदेश सरकार ने की है। यह बयान स्वराज इण्डिया के नेशनल प्रेसीडियम सदस्य अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने प्रेस को जारी किया।

उन्होंने कहा कि दरअसल एसआर दारापुरी योगी सरकार की हर जन विरोधी, लोकतंत्र विरोधी कार्यवाहियों के आलोचक रहे हैं और हर वक्त अपनी जनपक्षधरता के प्रति प्रतिबद्ध रहे हैं, इसीलिए वह उत्तर प्रदेश सरकार की आंख की किरकिरी बने हुए हैं। यह दुखद है कि गम्भीर बीमारी से ग्रस्त जिसमें कैंसर होने की भी पूरी आशंका है उन दारापुरी जी को 19 दिसम्बर की घटना में बेवजह लिप्त बताकर गिरफ्तार किया गया। जबकि दारापुरी तो 19 दिसम्बर के मार्च में शरीक भी नहीं थे। यह हास्यापद है कि दारापुरी जैसे एक जिम्मेदार, अनुशासित नागरिक के ऊपर उत्तर प्रदेश पुलिस यह अभियोग लगाए कि वे फोन से लोगों को उग्र व हिंसक प्रदर्शन के लिए भड़का रहे थे। आपको बता दें कि दारापुरी ने बड़े ओहदे पर रहते हुए भी जनपक्षधरता को नहीं छोड़ा लेकिन कभी भी उन्होंने किसी जनसमूह के अराजक भीड़ कार्यवाहियों का समर्थन भी नहीं किया।

उन्होंने कहा कि आंदोलन के मामले में वह पूरी तौर पर डा. अम्बेडकर के विचारों के अनुयायी रहे हैं। इसलिए दारापुरी की गिरफ्तारी को हम उत्तर प्रदेश सरकार की गैरजिम्मेदाराना और अधिनायकवादी कार्यवाही मानते हैं और सरकार से तत्काल उनकी रिहाई की भी मांग करते हैं। 19 दिसम्बर को संशोधित नागरिकता कानून और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के खिलाफ लोकतांत्रिक ढ़ंग से आंदोलन कर रहे निर्दोष लोगों की गिरफ्तारी की भी आलोचना करते हैं और रिहाई की मांग करते हैं।

इस बीच, दारापुरी को गिरफ्तार कर पुलिस ने लखनऊ जेल भेज दिया। बताया जा रहा है कि दारापुरी गंभीर बीमारी से ग्रस्त हैं। लिहाजा इसको लेकर उनके परिजन बेहद परेशान हैं। उधर, 78 वर्षीय एडवोकेट और रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब को भी पुलिस ने जेल भेज दिया। उनकी पत्नी का कहना था कि उन्हें दिल की बीमारी है। लिहाजा इस तरह के किसी तनाव भरे माहौल में उनको ले जाना और रखना उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करना होगा।

इनमें सबसे बुरी हालत पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता सदफ जाफर की है। बताया जा रहा है कि पुलिस ने उनको बेरहमी से पीटा है। जिसके चलते उनके पेट में घाव हो गया है। और साथ ही ब्लीडिंग शुरू हो गयी है। लेकिन उन्हें किसी अस्पताल में भर्ती कराने की जगह जेल में रखा गया है। इसको लेकर उनके तमाम समर्थक बेहद चिंतित हैं। और यह चिंता सोशल मीडिया पर भी बार-बार सामने आ रही है। जबकि सच्चाई यह है कि 19 दिसंबर के सामने आए वीडियो में सदफ असमाजिक तत्वों को पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने की बात करते देखी जा सकती हैं। वह शांतिपूर्ण आंदोलन के पक्ष में और हिंसा के खिलाफ बोल रही हैं। और एक ऐसी जगह खड़ी हैं जहां मीडिया के तमाम लोग मौजूद हैं।

उधर, बदायूं से लोकमोर्चा के अध्यक्ष अजीत सिंह यादव को भी पुलिस ने उस समय गिरफ्तार कर लिया जब वह अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के साथ प्रदर्शन कर रहे थे।

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