Monday, August 8, 2022

किसान आंदोलन ने बदल दी मेरठ जिले की चुनावी फिजा

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राजधानी दिल्ली से 50 किमी दूर स्थित उत्तर प्रदेश का मेरठ जिला उन 11 जिलों में शामिल है, जहां 10 फरवरी को मतदान होना है। मेरठ जिले में कुल सात विधानसभा सीटें हैं – सिवालखास, सरधना, हस्तिनापुर, किठौर, मेरठ कैंट, मेरठ सदर और मेरठ दक्षिण। इनमें हस्तिनापुर विधानसभा सीट आरक्षित है। 

अरशद आलम बताते हैं, “7 में से 6 सीटों पर मुस्लिम डॉमिनेटिंग पोजीशन में है। चुनाव से काफी पहले ही भाजपा ने अपनी मशीनरी का इस्तेमाल करते हुये सांप्रदायिक मुद्दा उठाने की कोशिश की थी, लेकिन किसान आंदोलन ने उसकी हवा निकाल दी। अगर भाजपा का साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण कारगर हो जाता तो 5 जनवरी को मोदी जी न तो सार्वजनिक तौर पर मीडिया के जरिये माफी मांगते और न ही तीनों कृषि क़ानून वापिस होते।”

मौलाना कलीम सिद्दीकी कहते हैं, “चुनाव से पहले पश्चिमी यूपी में सांप्रदायिक आग लगाने की इनकी साजिश थी। लेकिन अब हिंदू मतदाता इनके झांसे में आने वाला नहीं है। यह अभी भी कैराना पलयान और मुज़फ़फ़रनगर दंगे के इशू को उठा रहे हैं लेकिन जनता इनको ठेंगा दिखा रही है। इनके प्रत्याशियों को खदेड़ रही है।”

अरशद आलम कहते हैं, “नाराज़ किसान समुदाय निर्णायक भूमिका में है। गन्ने का पेमेंट एक बड़ा मुद्दा है यहां। समाजवादी पार्टी ने कॉर्पस फंड बनाने और 15 दिन में पेमेंट करने का वादा किया है। कॉर्पस फंड से आशय यह है कि सरकार किसानों को गन्ने का बकाया तत्काल चुका देगी और फिर गन्ना मिलों से अपनी वसूली करेगी। सिंचाई और आवारा पशु भी बड़ा मुद्दा हैं। किसानों को सिंचाई के लिये हजार- पंद्रह सौ देने पड़ते हैं। सपा ने मुफ्त सिंचाई की घोषणा की है, जो किसानों को जंच रहा है। वहीं मुसलमानों के बीच में बूचड़खाने बंद कर दिये जाने की वजह से नाराजगी है। उनकी मीट की दुकानों को लाइसेंस नहीं दिया जा रहा है।”

मेरठ के सामाजिक कार्यकर्ता सुशील गौतम मेरठ विधानसभा की 7 सीटों और उनके इर्द-गिर्द के जिलों की विधानसभा सीटों के बारे में कहते हैं, “पश्चिमि उत्तर प्रदेश का चुनाव किसान आंदोलन से काफी प्रभावित हुआ है। खासकर जाट समुदाय में। लोकसभा में सपा रालोद बसपा गठबंधन के बावजूद जयंत चौधरी और अजीत चौधरी चुनाव हार गये थे, क्योंकि दलित और मुस्लिम वोट तो उन्हें मिले, लेकिन 91 प्रतिशत जाट वोट भाजपा की ओर शिफ्ट कर गया था।”   

वो कहते हैं कि “किसान आंदोलन का सबसे ज़्यादा फायदा रालोद को हुआ है। जाट मतदाता रालोद की ओर वापिस आये हैं। तीन समुदाय का वोट मिले बिना कोई दल जीत नहीं सकता है। मेरठ में अलग-अलग सीटों पर दलित-मुस्लिम कांबिनेशन 45-60 प्रतिशत है। एक-दो सीटें छोड़कर जाट और मुस्लिम का कांबीनेशन विनिंग समीकरण नहीं बना पा रहा है। ऐसे में दलित मतदाता चाहिये ही चाहिये। दलित उत्पीड़न पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चरम पर रहा है। लेकिन दलित मतदाता भाजपा को किसी भी तरह से हराना चाहता है। ऐसी स्थिति में जिन सीटों पर सपा-रालोद प्रत्याशी के जीतने को थोड़ी सी भी संभावना है, उस सीट पर दलित मतदाता सपा रालोद का समर्थन कर रहा है। मेरठ समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 10-15 प्रतिशत गैरजाटव दलित मतदाता सपा-रालोद की ओर शिफ्ट हो रहा है। पश्चिमी यूपी में ऐतिहासिक तौर पर प्रभुत्वशाली समुदाय के तौर जाट कम्युनिटी के होने की वजह से दलित समुदाय को उसका शिकार होना पड़ा है, इसके बावजूद दलित रालोद को समर्थन दे रहा है।”

सुशील गौतम रालोद की कमजोरी को उजागर करते हुए बताते हैं, “रालोद के पास कैडर नहीं है। पार्टी ढांचा नहीं है  2013 दंगे के बाद से पार्ट्री ढांचा ढह गया था। जाट कम्युनिटी के अलावा इन्होंने कभी किसी और वोटबैंक को अपने साथ जोड़ने की कोशिश नहीं की। सपा ने भी  कोई जमीनी संघर्ष नहीं किया है। कुछ प्रतीकात्मक तौर पर किया भी तो बस लाल टोपी में कार्यालय में किया।”

हस्तिनापुर विधानसभा

हस्तिनापुर विधानसभा अनुसूचित जाति के लिये आरक्षित सीट है। 3 लाख 25 हज़ार मतदाताओं वाली एससी  वर्ग के लिए आरक्षित इस सीट पर सबसे ज्यादा मुस्लिम और गुर्जर मतदाता हैं, जिनकी संख्या लगभग 90-90  हजार है। अनसूचित समुदाय के मतदाताओं की संख्या 60 हजार के क़रीब है। 25 हजार जाट वोट हैं और 12 हजार सिख और अन्य समुदाय के मतदाता हैं।

गंगा नदी के किनारे के इलाकों वाली हस्तिनापुर सीट से फिलहाल भाजपा के दिनेश खटीक विधायक हैं, जिन्हें कैबिनेट विस्तार में जगह देते हुए मंत्री बनाया गया है। 2017 चुनाव में भाजपा के दिनेश खटीक (99,436 वोट) ने  बसपा के योगेश वर्मा (63,374 वोट) को 36,062 मतों से हराया था। जबकि समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी प्रभु दयाल, जो इस सीट पर सिटिंग विधायक थे, उन्हें 48,979 वोट मिले थे और वह तीसरे नंबर पर रहे थे। 2012 के चुनाव में सपा के टिकट पर प्रभुदयाल वाल्मीकि और उससे पहले 2007 में बसपा के योगेश वर्मा विधायक बने थे।

2022 विधानसभा चुनाव के लिये इस सीट से बसपा ने संजीव कुमार जाटव को टिकट दिया है। भाजपा ने यहां से दिनेश खटीक को प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस ने अभिनेत्री अर्चना गौतम को टिकट दिया है। सपा-रालोद ने योगेश वर्मा को प्रत्याशी बनाया है।

हस्तिनापुर सीट पर एएसपी से मुकेश सिद्धार्थ के पुत्र हिमांशु सिद्धार्थ चुनाव लड़ रहे हैं। वे निर्दलीय लड़े थे, तो जिला पंचायत में 22 हजार वोट पाये थे। वो सपा के वोट में सेंध लगा रहे हैं। इसका फायदा भाजपा को हो रहा है।

यहां का सबसे बड़ा मुद्दा बाढ़ से होने वाली समस्या है। लगभग हर साल हस्तिनापुर का खादर क्षेत्र बाढ़ के पानी से प्रभावित हो जाता है। विकास के कई दावे हस्तिनापुर विधानसभा क्षेत्र के लिए किए जाते हैं और हस्तिनापुर को एक पर्यटक स्थल के रूप में भी विकसित करने की कई बार बात की जा चुकी है, लेकिन इस क्षेत्र का विकास अभी तक कम ही हुआ  है। नागरिक अधिकार मंच के बैनर तले जाट समुदाय के लोगों ने हस्तिनापुर सुरक्षित विधान सभा क्षेत्र को सामान्य कराने की मांग को लेकर दिसंबर में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा था।

मेरठ सदर विधानसभा

3 लाख 40 हजार मतदाताओं वाले इस विधानसभा क्षेत्र में 1,25,000 मुस्लिम मतदाता, 70 हजार वैश्य मतदाता, 40 हजार ब्राह्मण मतदाता और 35 हजार दलित मतदाता हैं। इसके अलावा 20 हजार त्यागी मतदाता भी निर्णायक साबित हो सकते हैं। यहां जाट बिरादरी और पंजाबी बिरादरी का भी वोट है।

साल 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के रफ़ीक़ अंसारी ने भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पार्टी के कद्दावर उम्मीदवार डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी को मात दी थी। बता दें कि वाजपेयी यहां से चार बार विधायक रह चुके हैं। इस चुनाव में रफीक अंसारी को 1,03217, जबकि लक्ष्मीकांत वाजपेई को 74,448 वोट मिले थे। वहीं बसपा के पंकज जूली को 12636 वोट हासिल हुए थे।

2022 विधानसभा चुनाव के लिये कांग्रेस ने रंजन शर्मा, भाजपा ने कमल दत्त शर्मा और सपा ने रफ़ीक अंसारी तथा एआईएमआईएम ने इमरान अंसारी को टिकट दिया है। बसपा ने दिलशाद शौकत को प्रत्याशी बनाया है।

मेरठ सदर (शहर) विधानसभा सीट में हमेशा से सांप्रदायिक ध्रुवीकरण होता रहा है। यहां पर हार जीत का फैसला चंद हजार वोटों के मार्जिन से ही होता है। यह प्रदेश की इकलौती सीट है जहां जब-जब सांप्रदायिक ध्रुवीकरण हुआ है तब-तब इस खेल की माहिर भाजपा को नुकसान उठाना पड़ा है। सपा के रफ़ीक़ अंसारी के लिये यहां से जीतना आसान दिख रहा है।

मेरठ दक्षिण (साउथ)

मेरठ दक्षिण (साउथ) विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या 4,74,512 है। इस विधानसभा सीट पर लगभग 1 लाख 20 हजार मुस्लिम मतदाता हैं। जबकि अनुसूचित जाति, वैश्य जैन मतदाताओं की संख्या लगभग 45-45 हजार है। जाटव 75 हजार, ब्राह्मण 40 हजार, गुर्जर 40 हजार, जाट 25 हजार, प्रजापति 17 हजार, बाल्मीकि 14 हजार, सैनी 13 हजार, गोस्वामी 12 हजार, अन्य पिछड़ा वर्ग के 15 हजार मतदाता हैं। जाट, गुर्जर, ब्राह्मण वोटर भी इस सीट पर निर्णायक भूमिका निभाने की स्थिति में हैं। जैन, सैनी, प्रजापति, पाल, यादव, सिख भी यहां चुनाव परिणाम को प्रभावित करने की क्षमता रखते स्थिति में हैं।

भाजपा के डॉक्टर सोमेंद्र तोमर विधायक हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बसपा के हाजी मोहम्मद याकूब को 35,395 वोटों के अंतर से हराया था। सोमेंद्र तोमर को 1,13,225 वोट मिले थे, जबकि दूसरे नंबर पर रहे हाजी मोहम्मद याकूब को 77,830 वोट हासिल हुए थे। वहीं इस सीट से तीसरे नंबर पर कांग्रेस के मोहम्मद आज़ाद सैफी थे, जिन्हें 69, 117 वोट प्राप्त हुए थे।

2022 विधानसभा चुनाव के लिये कांग्रेस ने नफीस सैफी, भाजपा ने सोमेंद्र तोमर, सपा ने मोहम्मद आदिल, और बसपा ने कुंअर दिलशाद अली को अपना उम्मीदवार बनाया है।  

मेरठ दक्षिण विधानसभा में परतापुर, मोहकमपुर इंडस्ट्रियल एरिया है, बड़ी कंपनियों और खेल के सामान यहां बनते हैं, हवाई पट्टी भी यहीं पर स्थित है। इसी क्षेत्र में प्रसिद्ध गगोल तीर्थ, मंशा देवी मंदिर और सरदार बल्लभ भाई पटेल मेरठ मेडिकल कॉलेज स्थापित है।

मेरठ दक्षिण पर कांग्रेस, बसपा और सपा तीनों ने मुस्लिम प्रत्याशी उतारा है। भाजपा आराम से ये सीट निकाल सकती है। 47 हजार कुरैशी और 75 हजार के क़रीब सैफी मुस्लिम है। आज़ाद सैफी पिछली बार चुनाव लड़े थे और उन्हें कोई नहीं जानता था, फिर भी वो क़रीब 70 हजार वोट पा गये थे। बसपा के हाज़ी याकूब ने 78 हजार वोट पाये थे। सपा ने आज़ाद सैफी को टिकट नहीं दिया। यदि 10 प्रतिशत दलित भी सपोर्ट करेगा, तो भी इतना मार्जिन नहीं बन रहा है कि सपा जीतने की स्थिति में पहुंचे।

सिवालखास विधानसभा सीट

3,18,658 मतदाताओं वाले सिवालखास विधानसभा क्षेत्र में 1 लाख 16 हजार मुस्लिम, 70 हजार जाट, 48 हजार जाटव, 10 हजार त्यागी, 21 हजार ब्राह्माण, 16 हजार गुर्जर, 16 हजार ठाकुर, प्रजापति 12 हजार और लगभग 40 हजार में पाल, कश्यप, सैनी, वाल्मीकि, जोगी आदि आते हैं। जबकि 4000 यादव मतदाता हैं।

2017 में भारतीय जनता पार्टी से जितेंद्र पाल सिंह (बिल्लू) ने समाजवादी पार्टी के गुलाम मोहम्मद को 11,421 मतों से हराया था।

2022 विधानसभा चुनाव के लिये कांग्रेस ने जगदीश शर्मा,  भाजपा ने मनेंद्र पाल सिंह , रालोद ने गुलाम मोहम्मद  और बसपा ने  मुकरम अली (नन्हे खान) को अपना उम्मीदवार बनाया है।

सिवालखास विधानसभा में खेती-किसानी अहम मुद्दा है। यहां का किसान ज्यादातर गन्ने की पैदावार करता है। गन्ना मूल्य, गन्ने का भुगतान यहां का अहम मुद्दा है। इसके अलावा कूड़ा प्रबंधन, कानून व्यवस्था का मुद्दा भी चुनाव में शामिल है। यह ऐसा विधानसभा क्षेत्र है, जहां किसान आंदोलन का सबसे अधिक प्रभाव रहा।

सुशील गौतम के मुताबिक “इस सीट पर रालोद जीती हुई है। मुस्लिम जाट और पिछड़ा वोट मिलाकर उसे इस सीट पर एक लाख से अधिक वोट मिल रहे हैं। टक्कर बसपा ज़रूर देगी पर इसका फायदा भाजपा को इस सीट पर नहीं मिलेगा।”

सरधना विधानसभा सीट

सरधना विधानसभा क्षेत्र में 3,57,0363 मतदाता हैं। 90 हजार मुस्लिम मतदाता, ठाकुर 50 हजार, दलित 65 हजार, गुर्जर 35 हजार, सैनी 30 हजार, ब्राह्मण, 15 हजार और जाट मतदाता 15 हजार हैं। इनके अलावा प्रजापति 15 हजार, कश्यप 8 हजार मतदाता हैं। इस विधानसभा सीट से ज्यादातर ठाकुर और जाट प्रत्याशी ही जीतते आए हैं। ठाकुर चौबीसी भी सरधना विधानसभा क्षेत्र में ही है। और सरधना विधानसभा सीट पर ठाकुर चौबीसी का बड़ा प्रभाव है। 2017 विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी से संगीत सिंह सोम ने समाजवादी पार्टी के अतुल प्रधान को 21,625 मतों से हराया था। सरधना विधानसभा सीट मुज़फ्फ़रनगर के अंतर्गत आती है। इस संसदीय क्षेत्र से सांसद संजीव कुमार बाल्यान हैं।

2022 विधानसभा चुनाव के लिये भाजपा ने संगीत सोम (ठाकुर) को अपना प्रत्याशी बनाया है। जबकि कांग्रेस ने सैयद रिहानुद्दीन (मुस्लिम), बसपा ने संजीव धामा (दलित) और सपा ने अतुल प्रधान (गुर्जर) को अपना प्रत्याशी बनाया है।

यहां अधिकतर लोग पेशे से किसान है और मिठास की खेती करते हैं। गंगा-यमुना का दोआब होने की वजह से अधिकतर किसान गन्ने की खेती पर आश्रित हैं। गन्ना भुगतान, गन्ना मूल्य जैसी उनकी कई समस्या हैं।

सांप्रदायिक लिहाज से सरधना बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। 2013 में मुज़फ्फ़रनगर दंगों में मुख्य भूमिका निभाने वाले भाजपा विधायक ठाकुर संगीत सोम दंगे के प्रमुख आरोपी बनाए गए थे, और उन्हें जेल जाना पड़ा था। भाजपा पिछले दो बार से चुनाव जीत रही है। इस बार भाजपा और सपा में कड़ा मुक़ाबला है।

अरशद आलम कहते हैं, “अतुल चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष रहे हैं, युवाओं में प्रिय हैं। विनम्र और मिलनसार है। मुस्लिम और दूसरी कम्युनिटी भी इनको सपोर्ट कर रही है। अबकी बार संगीत सोम की हार निश्चित है। अतुल प्रधान की पत्नी सीमा प्रधान जिला पंचायत अध्यक्ष रही है। महिला मतदाता भी इनके साथ जायेंगे।”

सुशील गौतम कहते हैं – “अतुल प्रधान एक्टिव कैंडिडेट हैं। अभी तक इस सीट पर गुर्जर बिरादारी अतुल प्रधान से कम संगीत सोम से ज़्यादा अटैच्ड थी। लेकिन उनका मोहभंग हुआ है और गुर्जर मतदाता अतुल प्रधान के साथ जा रहा है। मुस्लिम समुदाय उन्हें पहले से ही वोट करता आ रहा है शुरु से। दलित भी उनको थोड़ा सपोर्ट करेगा ही।” 

किठौर विधानसभा सीट

कुल 3,38,733 मतदाताओं वाले किठौर विधानसभा क्षेत्र में 1,17000 हजार मुस्लिम, 70 हजार दलित जाटव, करीब 20-20 हजार त्यागी-ब्राह्मण, 30 से 40 हजार गुर्जर, जाट 15 हजार, ठाकुर करीब 25 हजार और करीब 50 हजार पाल, कश्यप, प्रजापति आदि  हैं।

किठौर विधानसभा क्षेत्र में तीन नगर पंचायत किठोर, शाहजहांपुर और खरखौदा, तीन ब्लाक माछरा, खरखौदा और रजपुरा आते हैं। सपा के तत्कालीन कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर को 2017 के चुनाव में बीजेपी के सत्यवीर त्यागी ने 10822 मतों से हराया था।

2022 विधानसभा चुनाव के लिये समाजवादी पार्टी ने शाहिद मंजूर, भाजपा ने सत्यवीर त्यागी, कांग्रेस ने बबिता गुर्जर और बसपा ने के. पी. मावी को अपना प्रत्याशी बनाया है।

मेरठ कैंट विधानसभा

लगभग 4 लाख 25 हजार मतदाताओं वाले मेरठ कैंट विधानसभा क्षेत्र में वैश्य 90 हजार, पंजाबी मतदाता 60 हजार है। दलित मतदाता 50 हजार, और मुस्लिम मतदाता 30 हजार हैं। अन्य पिछड़ा वर्ग के 20 हजार वोट भी हार-जीत तय करने में निर्णायक भूमिका अदा करते हैं। इसके अलावा ब्राह्मण 35 हजार, गुर्जर 20 हजार, सैनी 17 हजार, जाटव मतदाता 13 हजार हैं।

मेरठ कैंट विधानसभा सीट भाजपा का गढ़ माना जाता है। और पिछले तीन दशक से भाजपा यहां अजेय बनी हुई है। 2017 में भाजपा के सत्यप्रकाश यहां से लगातार चौथी बार विधायक निर्वाचित हुये थे।

2022 विधानसभा चुनाव के लिये समाजवादी पार्टी ने मनीषा अहलावत को, बसपा ने अमित शर्मा को, कांग्रेस ने अविनाश कजाला को और भाजपा ने अमित अग्रवाल को टिकट दिया है।

अरशद आलम के मुंताबिक “पंजाबी मतदाता  तीन हिस्सों में बंटा है। एक पक्ष किसानों के साथ है। एक पक्ष सांप्रदायिक है और भाजपा के साथ है। तीसरा पक्ष कन्फ्यूज है।” पंजाबी मतदाता क्रिकेट के सामान बनाते हैं और जूलरी शोरूम चलाते हैं। 

सुशील गौतम के मुताबिक “पंजाबी मतदाता दो तरह के हैं- सिख पंजाबी तथा हिंदू पंजाबी। पंजाबी सिख सपा के साथ जायेगा और पंजाबी हिंदू भाजपा के साथ खड़ा है। ये व्यवसाय से जुड़े समुदाय हैं तो भाजपा को सपोर्ट करते हैं। इसके अलावा इस सीट के 90 हजार वैश्य मतदाता भी भाजपा के सॉलिड वोटबैंक हैं। यही कारण है कि कांग्रेस के बाद अब यह सीट भाजपा के लिये अजेय बनी हुई है।”

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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