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कोरोना वैक्सीन के लिए क्लीनिकल ट्रायल देने वाले 45 आत्म बलिदानी

“हर कोई इतना असहाय महसूस कर रहा है मुझे एहसास हुआ कि मैं कुछ मदद कर सकती हूँ। इसलिए मैं यहाँ आने के लिए उत्साहित हूँ। कोरोना वायरस की वैक्सीन की जाँच के लिए मैं पहली हूँ, यह अविश्वसनीय है। मैं इसके बारे में उत्साहित हूँ। ये काफी आसान था, वैक्सीन का इंजेक्शन एक फ्लू के इंजेक्शन की तरह था। मैंने कुछ महीने पहले भी फ्लू का इंजेक्शन लगाया था। ये उसी की तरह था।

मुझे इसमें किसी तरह के दर्द का एहसास नहीं हुआ। मैं इसके बारे में बहुत खुश हूँ। मैं आशा करती हूँ कि ये वैक्सीन जल्द से जल्द काम करे जिससे ज़्यादा से ज़्यादा लोगों की जान बच सके और लोग जल्द से जल्द पुराने तरीके से अपना जीवन गुज़ारने लगें।”  ये बयान है कोरोना वायरस के लिए खुद को प्रस्तुत करने वाली पहली शख्स जेनिफर हेलर का। 47 वर्षीय जेनिफर हेलर 2 बच्चों की माँ हैं और वो एक टेक कंपनी में ऑपरेशनल मैनेजर की पोस्ट पर कार्यरत हैं।

जेनिफर हेलर गाँधी को कितना जानती हैं या कि उनसे कितना प्रभावित हैं मुझे नहीं मालूम। पर मनुष्यता के लिए आत्मबलिदान को सदैव तत्पर रहने के गांधी के सिद्धांत को उन्होंने बखूबी पालन किया है। परम हिंसा और कोरोना संक्रमण के इस दौर में जब सांप्रदायिक दिमाग वाले दरिंदे और कोरोना वायरस दोनो इंसानों की जान लेने पर आमादा हैं, मनुष्यता को बचाने के लिए खुद को मौत के सामने आत्मबलिदान के लिए प्रस्तुत कर देना ही परम अहिंसक होने का चरम है। 

आज जब पूरी दुनिया कोरोना के भय से आतंकित है अमेरिकी नागरिक जेनिफर हेलर समेत 45 लोगों ने कोरोना वैक्सीन बनाने के प्रयोग के लिए अपनी स्वस्थ्य देह वैज्ञानिकों के सामने प्रयोग के लिए प्रस्तुत कर दी।

46 वर्षीय नील ब्राउनिंग ने भी खुद को कोरोना वैक्सीन टेस्ट के लिए प्रस्तुत किया। वैक्सीन टेस्ट के बाद दिए अपने बयान में लो कहते हैं, “हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे उनसे प्रेरणा लें और इसके लिए वो ज़िंदगी में कुछ अच्छा और ज़रूरी करना चाहते हैं। ताकि जब वो थोड़े बड़े हों तो ये बात समझ सकें कि दुनिया में जब भी कोई छोटी या बड़ी परेशानी आये वो इससे लड़ने के लिए तैयार रहें, और ज़रूरत पड़ने पर आगे आएं।”

25 वर्षीय रेबेका सीरुल भी क्लीनिकल ट्रायल देने वाले लोगों में शामिल हैं। वो कहती हैं, “ ये सिर्फ़ मेरे और आपके बारे में नहीं है, महत्वपूर्ण ये है कि ये वैक्सीन कैसे आम लोगों पर असर करेगी। इसलिए मैं अपने हिस्से का काम करने की कोशिश कर रही हूं। इसलिए मैं ज़्यादातर घर पर ही रहती हूँ और सार्वजनिक जगहों पर जाने से बचती हूँ। मैं आशा करती हूँ कि यह काम करे औऱ दुनिया के सभी लोगों के लिए जल्द से जल्द उपलब्ध हो। किसी भी दवा का परीक्षण होने से पहले थोड़ी आशंका रहती है, लेकिन मैं पूरी उम्मीद करती हूँ कि ये परीक्षण सफल हो।”

नए वैक्सीन का प्रयोग अपने ऊपर करने के लिए खुद को आगे बढ़कर प्रस्तुत किया। 18-55 आयुवर्ग के 45 लोगों ने इस कोरोना वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल के लिए ख़ुद को पस्तुत किया। ये टेस्ट 16 मार्च 2020 को सिएटल अमेरिका के कैसर पर्मानेंट हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट में हुआ। इन 45 लोगों को वैक्सीन की अलग-अलग डोज दी गई। इन 45 प्रतिभागियों को 15-15 के तीन ग्रुप में बांटा गया और इन्हें 25mcg, 100mcg और 250mcg की खुराक़ दी गई।

पहले फेस के ट्रायल को KPWHRI के सीनियर इनवेस्टीगेटर एमडी लीसा ए जैक्सन के नेतृत्व में अंजाम दिया गया। क्लीनिकल ट्रायल के लिए शामिल लोगों को 28 दिन के अंतराल पर वैक्सीन का दूसरा डोज दिया जाएगा। प्रतिभागियों को वैक्सीनेशन की दूसरा डोज देने से पहले जाँचकर्ता सेफ्टी डाटा का रिव्यू करेंगे।   

अब तक 6500 से ज़्यादा लोग कोरोना वायरस से अपनी जान गँवा चुके हैं जबकि दो लाख के करीब लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हैं पूरी दुनिया में। ऐसे में कोरोना वैक्सीन को दुनिया में इंसानों को बचाए रखने के लिए एक बड़ी उम्मीद के तौर पर देखा जा रहा है।

मानवता के इतिहास में जब भी कोरोना का जिक्र आएगा, कोरोना वैक्सीन को जानवरों पर आजमाने के बजाय सीधे इंसानों पर इसका क्लीनिकल ट्रायल किए जाने और क्लीनिकल ट्रायल के लिए खुद को स्वेच्छा से प्रस्तुत करने वाले इन 45 आत्मबलि दानियों को बड़े आदर के साथ याद किया जाएगा।

(सुशील मानव जनचौक के विशेष संवाददाता हैं और आजकल दिल्ली में रहते हैं।)

This post was last modified on March 20, 2020 1:25 pm

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