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Friday, August 6, 2021

स्टाफ व पीपीई की कमी और कम वेतन से परेशान रहे स्वास्थ्यकर्मी : सर्वे

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नई दिल्ली। स्वास्थ्य कर्मियों को कार्यस्थल पर अभूतपूर्व चुनौतियों और खतरों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि वे अपने परिवारों के गुजारे के लिए संघर्ष कर रहे हैं। एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर वर्कर्स एंड टेक्नीशियन (एक्ट) ने काम करने की स्थिति, काम के बोझ, स्वास्थ्य और सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता के बारे में सैकड़ों स्वास्थ्य कर्मियों का सर्वेक्षण किया है। परिणाम बताते हैं कि कोरोना काल में स्वास्थ्यकर्मी अत्यंत कठिन परिस्थितियों में गुणवत्तापूर्ण देखभाल प्रदान करने का प्रयास कर रहे हैं।

सर्वेक्षण में पाया गया कि स्वास्थ्य कर्मियों ने और अधिक प्रशिक्षण की आवश्यकता, स्टाफ की कमी को ख़त्म करना, वेतन बढ़ाना, कार्यालय संवाद में सुधार, बेहतर संक्रमण नियंत्रण, और अन्य ज़रूरतों की आवश्यकता बताई। कुछ स्वास्थ्य कर्मियों ने रोगियों की देखभाल करने के लिए और समय की आवश्यकता के बारे में बात की। लगभग 60% ने यह भी कहा कि महामारी के बाद से उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारियां उठानी पड़ी हैं।

एक्ट से जुड़े डायलिसिस तकनीशियन मान सिंह ने कहा, ” स्वास्थ्य कर्मियों को कोरोना काल में मुश्किल हालात का सामना करना पड़ रहा है।” ऐसी परिस्थिति में और काम करना कठिन होता जा रहा है, विशेष रूप से इस अंतहीन महामारी के बीच। हम नियोक्ताओं से वेतन में निवेश करने और उनकी सबसे बड़ी संपत्ति, उनके स्वास्थ्य कर्मियों के प्रति सम्मान दिखाने की मांग करते हैं।

सर्वे के मुताबिक महामारी ने स्टाफ की कमी को और जटिल बना दिया है। चूंकि स्वास्थ्य कर्मियों को क्वारंटीन होना पड़ा और कई कोरोना संक्रमित भी हुए, ऐसी स्थिति में  उनके सहयोगियों और बिना किसी अतिरिक्त सहयोग के अधिक ज़िम्मेदारी उठानी पड़ी। एक्ट के महासचिव इंद्र नारायण झा कहते हैं, “हमारे कई सदस्य डायलिसिस कर्मचारी हैं,” उनकी सेवाएं रोगियों के लिए जीवन रक्षक हैं, वे रोगियों को दैनिक आधार पर जीवन रक्षक सेवाएँ प्रदान करते हैं।

सभी अतिरिक्त दबावों का स्वास्थ्य कर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इस सर्वेक्षण में 40% से अधिक स्वास्थ्य कर्मियों ने कहा कि उनका काम उनके मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है, और 50 प्रतिशत ने कहा कि उनके मालिकों ने इस मुश्किल परिस्थिति में सहयोग करने के बजाये उनकी ज़रूरतों की उपेक्षा की।

इन सबमें महत्वपूर्ण यह है कि 75% स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि उनका वेतन इतना कम है कि परिवार की मूलभूत ज़रूरतें भी ठीक से पूरी नहीं हो पा रही हैं।

एक्ट सामाजिक संवाद और सामूहिक सौदेबाजी के लिए एक तकनीशियन परिषद के निर्माण की मांग कर रहा है जो डायलिसिस से संबंधित मुद्दों को निर्वाचित तकनीशियनों के उचित प्रतिनिधित्व के साथ मिलकर काम करने की स्थिति, डायलिसिस तकनीशियनों के लिए राष्ट्रीय भर्ती नीति, सरकारी क्षेत्र के तकनीशियनों के समान वेतन और अन्य कामकाजी परिस्थितियां सार्वजनिक स्वास्थ्य, सभी तकनीशियनों के लिए उचित बीमा और सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थलों पर मजबूत सुरक्षा मानकों की मांग करता है।

झा ने कहा कि ‘इन सभी मुद्दों के साथ एक्ट इस बढ़ते क्षेत्र में नए स्वास्थ्य कर्मियों के आने और पुराने स्वास्थ्य कर्मियों को बनाये रखने के लिए बहुत चिंतित है। यदि इन स्वास्थ्य कर्मियों के लिए ज़रूरी और आवश्यक सुविधाओं के लिए उचित कदम नहीं उठाया गया, तो आने वाले दिनों में जीवन रक्षक सेवाओं के लिए भारत के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

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