Monday, April 15, 2024

सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई, चंडीगढ़ मेयर मनोज सोनकर ने इस्तीफा दिया

चंडीगढ़ मेयर चुनाव में कथित छेड़छाड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से एक दिन पहले रविवार शाम को बीजेपी नेता मनोज सोनकर ने चंडीगढ़ मेयर पद से इस्तीफा दे दिया। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने पीठासीन अधिकारी को अगली सुनवाई की तारीख, 19 फरवरी को उपस्थित होने के लिए भी कहा था।

मनोज सोनकर ने 30 जनवरी 24 को आप के कुलदीप कुमार को हराकर चुनाव जीता था। इस चुनाव में धांधली के आरोप लगे थे और वीडियो में पीठासीन अधिकारी को कथित तौर पर वोटों से छेड़छाड़ करते देखा गया था। इसको लेकर पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने तीखी टिप्पणी की थी।   

मेयर चुनाव में भाजपा के मनोज सोनकर को 16 वोट मिले थे। बीजेपी के ख़िलाफ़ कांग्रेस-आप गठबंधन में उतरे उम्मीदवार को 12 वोट मिले। इस प्रक्रिया में आठ वोट अवैध घोषित कर दिये गये। गठबंधन के पास कुल 20 पार्षद थे और माना जा रहा था कि चुनाव में कांग्रेस-आप के उम्मीदवार को हराना मुश्किल होगा। कांग्रेस-आप गठबंधन के 8 वोट रद्द होते ही बीजेपी जीत गई थी। इस चुनाव को इंडिया गठबंधन की पहली महत्वपूर्ण लड़ाई क़रार दिया गया था।

आप और कांग्रेस ने चंडीगढ़ मेयर चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली किए जाने का आरोप लगाया। आरोप लगाया कि नियमों से पूरी तरह हटकर, पीठासीन अधिकारी ने पार्टियों के नामांकित व्यक्तियों को वोटों की गिनती की निगरानी करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।

आप ने आरोप लगाया कि ‘पीठासीन अधिकारी ने बहुत ही अजीब ढंग से सदन को संबोधित किया कि वह चुनाव लड़ रहे दलों द्वारा नामित सदस्यों से कोई सहायता नहीं चाहते हैं और वह वोटों की गिनती खुद करेंगे। यह भी आरोप लगाया गया कि चुनाव के वीडियो से पता चलता है कि पीठासीन अधिकारी ने केवल भ्रम पैदा करने के उद्देश्य से वोटों को एक टोकरी से दूसरी टोकरी में बदल दिया, जिसके दौरान उन्होंने जालसाजी और छेड़छाड़ करके चुनाव प्रक्रिया में पूरी तरह गड़बड़ी की।

यही नहीं सुनवाई से कुछ ही दिन पहले चंडीगढ़ भाजपा ने कथित तौर पर मतपत्रों को विकृत करने के आरोप में घिरे पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह को भी अपने अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ से हटा दिया था।

कांग्रेस और आम आदमी पार्टी 30 जनवरी को हुए मेयर चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए सोनकर को हटाने की मांग कर रही थी। विपक्ष का आरोप था कि मसीह द्वारा मतपत्रों पर कुछ लिखने और आठ वोटों को अमान्य करने के बाद सोनकर जीते थे। मसीह चंडीगढ़ भाजपा के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के महासचिव थे। उन्हें सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में पेश होना है। 18 जनवरी को जब मूल रूप से चुनाव होने थे, मसीह बीमार पड़ गए थे, जिसके कारण चुनाव 30 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दिया गया था।

हार के बाद कांग्रेस-आप गठबंधन ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, और परिणाम को रद्द करने और चंडीगढ़ मेयर चुनाव फिर से कराने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने बाद में कहा कि चंडीगढ़ मेयर चुनाव के दौरान जो हुआ वह ‘लोकतंत्र का मजाक’ था। इसने कहा, ‘हम इस तरह लोकतंत्र की हत्या नहीं होने देंगे’। भारत के मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने पीठासीन अधिकारी को अगली सुनवाई की तारीख, 19 फरवरी को उपस्थित होने के लिए भी कहा था।

सिद्धारमैया, एनसीपी, शरद पवार, संदेशखाली मामले से जुड़ी याचिका पर आज सुनवाई

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली गांव में महिलाओं के कथित उत्पीड़न को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। याचिका में मामले की जांच और उसके बाद सुनवाई पश्चिम बंगाल से बाहर कराने की मांग की गई है। वकील आलोक अलख श्रीवास्तव की तरफ से दायर याचिका में संदेशखाली के पीड़ितों के लिए मुआवजे की मांग की गई है। साथ ही अपनी जिम्मेदारी ठीक तरह से न निभाने के लिए पश्चिम बंगाल पुलिस के खिलाफ कार्रवाई करने को भी कहा गया है। याचिका पर जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ सुनवाई करेगी।

यह याचिका वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने दायर की है, जिन्होंने संदेशखली गांव में रहने वाली महिलाओं के साथ दुष्कर्म की जांच और उसके बाद के मुकदमे को पश्चिम बंगाल के बाहर स्थानांतरित करने की मांग के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। वकील अलख आलोक श्रीवास्तव द्वारा दायर याचिका में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में केंद्रीय जांच ब्यूरो या विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच की भी मांग की गई है।

पश्चिम बंगाल का संदेशखाली बीते कुछ दिनों से सुर्खियों में है। टीएमसी नेता शाहजहां शेख पर गांव की महिलाओं द्वारा दुष्कर्म का आरोप लगाया गया है, जिसके बाद से विपक्षी दल ममता सरकार के खिलाफ आक्रामक हो गए हैं। इस बीच, बशीरहाट सबडिवीजन कोर्ट ने संदेशखाली में जमीन हड़पने और महिलाओं के उत्पीड़न मामले के मुख्य आरोपियों में से एक शिबू हाजरा को आठ दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। तृणमूल कांग्रेस नेता शिबू हाजरा को एक दिन पहले ही गिरफ्तार किया गया था।

संदेशखाली में जमीन हड़पने और महिलाओं के यौन उत्पीड़न के मामले में मुख्य आरोपियों में से एक आरोपी को शनिवार को कोर्ट में पेश किया गया, जिसके बाद पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। हालांकि मुख्य आरोपियों में शामिल शाहजहां शेख अब भी फरार है। इसके साथ ही इस मामले में गिरफ्तार लोगों की संख्या अब 18 हो चुकी है। बता दें कि पुलिस ने उत्तम सरदार और शिबप्रसाद (शिबू) हाजरा के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के प्रयास की दो धाराएं जोड़ी हैं।

एनसीपी को लेकर चुनाव आयोग के आदेश के खिलाफ  शरद पवार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। तीन जजों की पीठ इस मामले पर सुनवाई कर सकती है। 16 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई थी। शरद पवार ने कहा था कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाले गुट द्वारा व्हिप जारी किया जा सकता है। शरद पवार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए याचिका पर तुरंत सुनवाई की मांग की थी। महाराष्ट्र विधानसभा का विशेष सत्र 20 फरवरी से शुरू हो रहा है।

एनसीपी को लेकर चाचा-भतीजे में रार का फैसला करते हुए महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने अजित पवार गुट वाली एनसीपी को ही असली पार्टी करार दिया था। साथ ही उन्होंने कहा था कि दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों को पार्टी के भीतर असंतोष को दबाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। इससे पूर्व चुनाव समिति ने छह फरवरी को घोषणा की थी कि अजित गुट की एनसीपी ही असली है। जिसके बाद अजित पवार गुट को ही पार्टी का चुनाव चिन्ह घड़ी सौंपा गया था।

गौरतलब है कि अजित पवार गुट के वकील ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट में एक कैविएट दायर की थी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अगर शरद पवार गुट सुप्रीम कोर्ट का रुख करता है तो, मामले में एकपक्षीय आदेश न दिया जाए। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने पिछले साल जुलाई में एनसीपी के समर्थित विधायकों के साथ एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल हो गए थे।

कांग्रेस के 2022 के एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ दर्ज मुकदमें को रद्द करने की याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था, जिसके बाद सूबे के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। दो जजों की पीठ मामले की सुनवाई कर सकती है। गौरतलब है कि उन्होंने हाईकोर्ट के छह फरवरी के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें सिद्धारमैया और कांग्रेस महासचिव और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला, राज्य के मंत्रियों एमबी पाटिल और रामलिंगा रेड्डी पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया था और उन्हें अदालत के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया गया था। 

कांग्रेस नेताओं के खिलाफ मामला तब दर्ज किया गया था जब 2022 में बंगलूरू में तत्कालीन मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के आवास की घेराबंदी करने के लिए एक मार्च निकाला था, जिसमें मंत्री केएस ईश्वरप्पा के इस्तीफे की मांग की गई थी। एक ठेकेदार संतोष पाटिल द्वारा ईश्वरप्पा पर अपने गांव में एक सार्वजनिक कार्य पर 40 प्रतिशत कमीशन मांगने का आरोप लगाते हुए खुदकुशी की गई थी, जिसके बाद विपक्षी दल कांग्रेस द्वारा प्रदर्शन किया गया था।  

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं।)

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