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आखिर पाकिस्तान कैसे पाया कोरोना पर काबू?

पाकिस्तान में कोविड-19 का पहला केस 26 जनवरी, 2020 को दर्ज़ किया गया। एक कराची और दूसरा इस्लामाबाद में जब ईरान से लौटे दो लोगों को बीमार होने पर कोरोना का टेस्ट किया गया। 29 जनवरी को 4 छात्रों में कोविड-19 पोजिटिव पाया गया चारों छात्र चीन से लौटे थे। 18 मार्च को पाकिस्तान में पहली कोविड-19 मौत खैबर पख़्तूनख्वा में दर्ज़ की गई।

फिलहाल 23 अगस्त की तारीख में पाकिस्तान में सिर्फ़ 10,694 एक्टिव केस बचे हैं, जबकि अब तक कुल संक्रमित लोगों की संख्या 2,92,765 पहुँच चुकी है। और 6235 लोगों की कोविड-19 से मौत हुई है।

जून पाकिस्तान में कोविड-19 वैश्विक महामारी के लिहाज से पीक महीना साबित हुआ। 9 जून को पाकिस्तान में कोविड-19 संक्रमितों की संख्या ने 1 लाख के आँकड़े को पार किया और ठीक 20 दिन में यानि 29 जून को ये आँकड़ा दोगुना होते हुए 2 लाख के आंकड़े को पार कर गया। हालांकि इसके साथ ही कोविड-19 का प्रकोप घटने लगा। नए केस आने की दर कम होने लगी। और आज 23 अगस्त तक पाकिस्तान में कोविड-19 संक्रमितों की कुल संख्या 3 लाख के आंकड़े को नहीं छू पाई है। आखिर पाकिस्तान ने ऐसा क्या किया कोविड-19 के नए केस आने की दर लगातार कम होती गई।

वर्ल्ड मीटर के डेटा के मुताबिक, पाकिस्तान में 14 जून को कोविड-19 के सबसे ज्यादा 6825 नए मामले सामने आए थे। इसके बाद, पाकिस्तान में कोरोना वायरस के मामलों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। 3 अगस्त को पाकिस्तान में सिर्फ 331 नए मामले सामने आए थे जो 14 जून को पीक पर पहुंचने के बाद का सबसे कम आंकड़ा था। 23 अगस्त को 591 नए मामले मिले हैं।

सही समय पर सीमाएं सील की

जबकि ईरान में 43 कन्फर्म कोरोना केस की पुष्टि होने के बाद 23 फरवरी को पाकिस्तान ने ईरान से लगी सीमा (तफ्तान सीमा) को 7 मार्च तक के लिए सील कर दिया। यही वो तारीख है जब भारत नमस्ते ट्रंप का आयोजन करके ट्रंप की खातिरदारी में मगन और दूसरी ओर दिल्ली में जनसंहार चल रहा था।

9 मार्च को पाकिस्तान में 9 नए कोरोना मामलों की पुष्टि हुई। इसमें से 5 सीरिया से और कुछ लंदन से लौटे थे। इसके ठीक बाद ही यानि 13 मार्च को पाकिस्तान से सारी अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें बंद कर दी गईं। पाकिस्तान के राष्ट्रपति डॉ आरिफ अल्वी ने ट्वीट करके कोरोना से बचाव के लिए लोगों से हाथ न मिलाने, गले न लगने और भीड़ न लगाने की सलाह दी।

13 मार्च को शफ़ाकत महमूद ने प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के साथ हुए राष्ट्रीय सुरक्षा काउंसिल मीटिंग में सभी स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी को 30 मार्च तक बंद करने की घोषणा की जिसे आगे 30 मई तक बढ़ा दिया गया।

13 मार्च को ही गिलगिट बल्टिस्तान सरकार ने मेडिकल इमरजेंसी की घोषणा कर दी। 13 मार्च को पाकिस्तान सरकार ने ईरान, अफ़गानिस्तान और चीन से लगी जमीनी सीमा को पूरी तरह से सील करने की घोषणा कर दी।

14 मार्च को पाकिस्तान दिवस की वार्षिक परेड को कैंसिल कर दिया गया।

21 मार्च को सिंध सरकार ने 14 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की। इसी दिन इस्लामाबाद शहर प्रशासन ने क्षेत्र में 15 दिन के लिए धारा 144 लागू कर दी। और अगले दिन यानि 22 मार्च को गिलगिट बल्टिस्तान में अनिश्चकालीन लॉकडाउन घोषित कर दिया गया। 24 मार्च को सिंध प्रांत बलूचिस्तान और पीओके में लॉकडाउन लगा दिया गया। 24 मार्च को पेशावर हाईकोर्ट समेत प्रांत के सारे कोर्ट बंद कर दिए गए।

पाकिस्तान ने कोरोना महामारी आने के बाद से आर्थिक स्थिति के मद्देनजर पूरी तरह से लॉकडाउन लागू नहीं किया। जहां-जहां हॉटस्पॉट थे, वहां स्मार्ट लॉकडाउन लगाया गया ताकि आर्थिक गतिविधियां सीमित स्तर पर चलती रहें।

ताली थाली से काम चलाने के बजाय चिकित्सकों को उपलब्ध करवाए गए ज़रूरी मेडिकल उपकरण

21 मार्च से घरेलू उड़ानों के लिए स्क्रीनिंग का कार्यक्रम शुरु किया गया।

23 मार्च को पूरे देश में चिकित्सकों ने उपयुक्त उपकरणों की कमी को लेकर शिकायत की। 26 मार्च को 5 लाख N-95 चीनी मास्क सिंध प्रांत पहुँचा। 27 मार्च को चीन ने मेडिकल उपकरण और 10 टन अन्य मेडिकल सामान गिलगिट बल्टिस्तान सरकार को सौंपा। इसमें 5 वेंटिलेटर, 2000 एन-95 मास्क, 2 लाख फेस मास्क 2 हजार टेस्टिंग किट और मेडिकल प्रोटेक्टिव किट दिया।

28 मार्च को 67 मिलियन कीमत और 2 टन वजन का मेडिकल उपकरण जैक मा और अली बाबा की तरफ से दूसरा विमान भेजा गया जिसमें 50 हजार टेस्टिंग किट, फेस मास्क, वेंटिलेटर और पीपीई शामिल था।

30 मार्च को लेफ्टिनेंट जनरल अफ़जल ने बताया कि सिंध में 20 हजार, पंजाब में 5 हजार, बलूचिस्तान में 4800 दिए गए जबकि 37 हजार किट रिजर्व रखे गए हैं।

50 कंपनियों को मास्क और सैनिटाइजर बनाने के काम में लगा दिया गया।

पाकिस्तान नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (NUST) को टेस्टिंग किट बनाने और पाकिस्तान इंजीनियरिंग काउंसिल को यूनिवर्सिटी और इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (NED) के साथ मिलकर वेंटिलेटर बनाने तथा पाकिस्तान काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्स्ट्रियल रिसर्च (PCSIR) को हैंड सैनेटाइजर बनाने के काम में लगाया गया।

5 अप्रैल को पंजाब प्रांत ने महज 9 दिन में 1000 बेडों वाले कोविड-19 फील्ड अस्पताल तैयार कर लिया। पाकिस्तान WHO ने भी इसकी सराहना की।

सही समय पर आर्थिक पैकेज का ऐलान, किसान और दिहाड़ी मजदूरों का विशेष ख्याल

24 मॉर्च को प्रधानमंत्री ने 1.2 ट्रिलियन रुपए के आर्थिक सहायता पैकेज की घोषणा की। जिसमें से 150 बिलियन रुपए निम्न आय वर्ग के लिए आवंटित किया गया विशेषकर श्रमिक वर्ग को। 280 बिलियन रुपए गेहूँ की सरकारी खरीदारी के लिए।

निर्यातकों के लिए लोन पर ब्याज भुगतान को अस्थायी तौर पर स्थगित कर दिया गया।

इसके अलावा 100 बिलियन रुपए छोटे उद्योगों और कृषि के लिए आवंटित किए गए।

पाकिस्तान सरकार द्वारा पेट्रोलियम की दरों में भारी कटौती की गई। बिजली और गैस बिल एक निम्नतम आसान किस्तों में जमा करने के लिए व्यवस्था दी गई।       

बेनजीर इनकम सपोर्ट प्रोग्राम (BISP) के तहत मिलने वाले मासिक स्टाइपेन को 2000 से बढ़ाकर 3000 रुपए कर दिया गया।

28 मार्च को पंजाब प्रांत की सरकार ने 10 बिलियन का रिलीफ पैकेज 2.5 मिलियन दिहाड़ी मजदूरों के परिवारों की सहायत के लिए दिया। जिसके तहत प्रत्येक परिवार को मासिक 4000 रुपए की आर्थिक मदद दी गई। इसमें BISP लाभार्थी शामिल नहीं किए गए थे।

ये सब पाकिस्तान में तब हो रहा था जब वहाँ कुल कोविड-19 केसों की संख्या 1408 पहुँची थी, 26 लोग रिकवर हो चुके थे और 11 लोगों की मौत हुई थी।

29 मार्च को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के गवर्नमेंट ने बिजनेस समुदाय और लोगों के लिए 32 बिलियन रुपए के आर्थिक पैकेज की घोषणा की। प्रांतीय सूचना मंत्री अजमल वजीर ने घोषणा किया कि 11.4 बिलियन रुपए 1.9 मिलियन परिवारों में एहसास प्रोग्राम के तहत 3000 रुपए और खैबर पख्तूनख्वा सरकार की ओर से 2000 रुपए दिए जाएंगे। साथ ही व्यापारी समुदाय को 5 बिलियन के टैक्स से राहत देने का ऐलान किया।

31 मार्च को संघीय मंत्रालय ने आर्थिक राहत पैकेज को रिव्यू और एप्रूव किया। इकोनॉमिक कोऑर्डिनेशन कमेटी ने राहत पैकेज को अंतिम रूप देते हुए आपातकालीन राहत फंड में 100 बिलियन रुपए के सप्लीमेंट्री रकम को भी मंजूरी दी।

साथ ही 1 करोड़ 20 लाख गरीब परिवारों के लिए एहसास कार्यक्रम के तहत नगद सहायता, कफालत कार्यक्रम, और जिला प्रशासन की सिफारिश पर इमरजेंसी कैश असिस्टेंस के तहत नगदी हस्तांतरण की व्यवस्था की गई।

बाद में इसमें हॉकरों को भी शामिल कर लिया गया। नगद आर्थिक मदद की व्यवस्था 4 महीने के लिए किया गया। 12 हजार एक बार में या 6-6 हजार के दो किस्तों में देने के लिए कहा गया। बायोमीट्रिक वेरीफिकेशन के बाद कफालत पार्टनर बैंक, बैंक अलफाला, हबीब बैंक लिमिटेड द्वारा।

29 मार्च को पंजाब के वित्तमंत्री हाशिम जवान बख़्त ने 11.5 बिलियन रुपए की आर्थिक पैकेज स्वास्थ्य क्षेत्र और प्रोवेंशियल डिजास्टर मैनेजमेंट अथोरिटी (पीडीएमए) के लिए विशेष तौर पर घोषित किया।

31 मार्च को प्रांतीय सरकार ने 500 मिलियन रुपए पुनर्वास और क्वारंटीन सेंटर तैयार करने के लिए आवंटित किया गया।

2 अप्रैल को पाकिस्तान सरकार ने कहा कि 2.5 ट्रिलियन रुपए कोविड-19 महामारी के चलते पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को नुकसान हुआ है।

दिहाड़ी मजदूरों के घर जाकर राशन वितरण

30 मार्च को मुख्यमंत्री सईद मुराद अली शाह ने ‘सिंध रिलीफ इनीशिएटिव’ नाम से एक पब्लिक मोबाइल एप लांच की। जिसमें कल्याणकारी संस्थाएं सरकार के साथ मिलकर दिहाड़ी मजदूरों के घर-घर तक राशन वितरित करने के काम के लिए पंजीकरण कर सकती थीं।

अन्य प्रांतीय सरकारों द्वारा दिहाड़ी मजदूरों को घर घर राशन मुहैया करवाने काम प्राथमिक देकर करवाया।

प्रधानमंत्री ने 27 मार्च को ‘कोरोना रिलीफ टाइगर्स’ के नाम से एक युवा बल का गठन किया जो कोरोना के खिलाफ़ देशव्यापी लड़ाई में सरकार की मदद करे। इस युवा बल को पूरे देश में तैनात किया गया जो कि घर-घर राशन पहुँचाने के काम में इस्तेमाल किया गया। 31 मार्च से इसमें लोगों को भर्ती किया गया।

राज्य सरकारों द्वारा लॉकडाउन लगाया गया था। तो 29 मार्च को संघ सरकार ने फैसला किया कि देश भर में हाईवे सड़क खुली रहेंगी साथ ही मालगाड़ी ट्रेन की संख्या बढ़ाई गई ताकि खाद्य सामान और दूसरे ज़रूरी सामानों की कमी न हो। प्रधानमंत्री ने एक मीटिंग में राज्य सरकारों से कहा कि वे सुनिश्चित करें कि कालाबाजारी और मुनाफाखोर लोगों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई हो। 

कामगारों को पूरा पेमेंट करने के लिए निजी संस्थाओं को जारी किया गया सर्कुलर

सिंध सरकार ने 30 मार्च को सर्कुलर जारी करते हुए निजी स्कूलों, कारखानों, और अन्य निजी संस्थाओं को आदेश दिया कि 31 मार्च तक के पूरे वेतन का भुगतान करें। अन्य प्रांतों ने भी ऐसे कदम उठाए।

मुख्यमंत्री के सलाहकार अजमल वजीर ने बताया कि सरकार ने व्यापारी समुदाय को राहत देने के लिए टैक्स भरने में छूट दी है। 17.5 बिलियन रुपए गेहूँ की सरकारी खरीदारी के लिए जारी किए हैं। जबकि 8 बिलियन रुपए जिला अस्पतालों को आपातकालीन आपूर्ति के लिए जारी किए गए हैं।

31 मार्च को समाजिक सुरक्षा और गरीबी उन्मूलन मामले में प्रधानमंत्री की विशेष सहायक डॉ. सानिया निश्तर ने बताया कि 12 हजार रुपए की आर्थिक सहायता राशि ‘एहसास इमरजेंसी कैश प्रोग्राम’ के लिए 30.5 मिलियन (8171 नंबर पर एसएमएस) प्राप्त हुए हैं।

31 मार्च को प्रधानमंत्री ने बताया कि केंद्रीय बैंक की ओर से व्यापारी समुदाय के लिए इंसेंटिव की घोषणा की गई है ताकि इस महामारी में बड़े पैमाने पर होने वाली बेरोजगारी से बचा जा सके।

जेलों से रिहा किए गए कैदी

पंजाब सरकार ने अपने विशेष पॉवर का इस्तेमाल करते हुए 29 मार्च को 4000 सजायाफ्ता कैदियों को छोड़ने के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए कैदियों को रिहाई दी।

स्वास्थ्य कर्मियों की भर्ती और एक महीने का सम्मान राशि

29 मार्च को पंजाब के वित्तमंत्री हाशिम जवान बख़्त ने कहा – 11.5 बिलियन रुपए का आर्थिक पैकेज स्वास्थ्य क्षेत्र और प्रॉविंशियल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (पीडीएमए) के लिए भी फायदेमंद होगा।

पंजाब प्रांत की सरकार ने मार्च के आखिर में हेल्थवर्करों के लिए एक महीने का मानदेय (honorariam) देने की घोषणा की। साथ ही स्वास्थ्यकर्मियों के मरने पर ‘मार्टर पैकेज’ क्षेत्रीय सरकार के राहत पैकेज में शामिल किया गया। 

पंजाब संक्रामक बीमारी रोकथाम और नियंत्रण अधिनियम 2020 लागू किया गया जिसके तहत सिविल एडमिनिस्ट्रेशन और हेल्थ विभाग को कानून के अंतर्गत विशेष अधिकार दिए गए।

महामारी से निपटने के लिए 10 हजार डॉक्टर पैरामेडिक्स की भर्ती की गई। प्रांत में लैबों की क्षमता बढ़ाकर प्रतिदिन 3200 लोगों की कोविड-19 की टेस्टिंग की गई।

30 मार्च को केपी के मुख्यमंत्री महमूद ख़ान ने घोषणा की कि उन्होंने 1300 नए चिकित्सकों की भर्ती कांट्रैक्ट बेस पर की है। साथ ही केपी पब्लिक सर्विस कमीशन ने प्रांतीय स्वास्थ्य बल को ज्वाइन करने के लिए 635 और चिकित्सकों की भर्ती के लिए मंजूरी दी।

ट्रेसिंग और ट्रैकिंग पर विशेष जोर

NIH ने पूरे पंजाब में हाई डिपेंडेंसी यूनिट, आइसोलेशन और क्वारंटीन स्टाफ के लिए जिला स्तर पर ट्रेनिंग शुरु की।

27 मार्च को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) ने खैबर पख़्तूनख़्वा हर जिले के प्रवेश और निकास द्वार पर स्क्रीनिंग दलों को लगाया गया ताकि हर आगंतुक की कोविड-19 स्क्रीनिंग सुनिश्चित की जा सके।

गिलगिट बल्टिस्तान की सरकार ने तफ्तान सीमा से आने वाले हर शख़्स की कोविड-19 टेस्टिंग शुरु किया।

13 जून को वॉक्स न्यूज ने रिपोर्ट किया कि पाकिस्तान ने 1.66 बिलियन रुपए सिक्योरिटी स्पाई एजेंसी आईएसआई को दिए हैं उनकी ट्रैकिंग और ट्रेसिंग विशेषज्ञता का इस्तेमाल महामारी के खिलाफ़ करने के लिए किया जा सके। हालांकि मानवाधिकार कार्यकर्ता मीडियाकर्मियों ने इसे मेडिकल इमरजेंसी का सैन्यीकरण करने और कोरोना पीड़ितों को भयभीत करने वाला बताते हुए चिंता जाहिर की।

22 अप्रैल को देश में कोविड-19 संक्रमितों की संख्या 10 हजार पार हुई और 24 अप्रैल को पाकिस्तान की संघीय सरकार ने लॉकडाउन 9 मई तक बढ़ा दिया

29 अप्रैल तक कुछ सरकारी कार्यक्रम को जारी रखा गया ताकि लोगों का रोजगार बरकरार रहे। जैसे कि प्लांट फॉर पाकिस्तान रिफॉरेस्टेशन कार्यक्रम जिसमें 60 हजार लोगों को रोजगार दिया। वहीं दूसरी ओर 5 जून को सरकार ने स्टील मिल समेत कई सरकारी उद्योगों को बेचने का फैसला किया।

9 मई को लॉकडाउन हटा दिया गया और धीर धीरे सीमाओं को खेल दिया गया।

समाज का वंचित तबका हमेशा आपकी प्राथमिकता में होना चाहिए- प्रधानमंत्री इमरान खान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उनकी सरकार कोरोना वायरस महामारी पर नियंत्रण करने में कामयाब रही है।

इमरान खान ने आगे कहा, जब मुझसे कोरोना महामारी पर काबू पाने के लिए लॉकडाउन लगाने के लिए कहा गया तो मैंने पहले गरीबों और समाज के सबसे वंचित तबके के बारे में सोचा। तब मुझे निशाने पर लिया गया और कहा गया कि मुझे समझ नहीं है और मैं देश को बर्बाद कर रहा हूं। इन सबके बावजूद समाज का वंचित तबका हमेशा आपकी प्राथमिकता में होना चाहिए।

इमरान ने कहा कि उनकी पार्टी के कुछ सदस्यों ने भी लॉकडाउन लगाने का सुझाव दिया था लेकिन हमारी स्थिति इटली और स्पेन की तरह नहीं थी। अगर हमने लॉकडाउन लागू किया होता तो एक कमरे में छह-सात लोग साथ रह रहे लोगों, मजदूरों और आम आदमी के सामने मुश्किल खड़ी हो जाती इसीलिए मैंने प्रतिरोध किया।

भारत में बढ़ते कोरोना मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा- जबकि भारत के कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और पूरी तरह से लॉकडाउन लागू करने की वजह से अब मुश्किलें झेल रहा है। भारत ने अपनी गरीब आबादी की फिक्र नहीं की।

बिल गेट्स ने पाकिस्तान में स्टडी करने की इच्छा जताई

9 अगस्त को सीएनएन से बातचीत में बिल गेट्स ने कहा कि पाकिस्तान के कराची में कोरोना संक्रमण चरम पर पहुंच गया था लेकिन अब वहां के हालात यूरोप की तरह लग रहे हैं। वहां कोरोना के केस में कमी आई है। हालांकि, दुर्भाग्य से भारत अभी भी कोरोना संक्रमण के ग्रोथ फेज में है और उसकी स्थिति दक्षिणी अमेरिका की तरह है।

प्रधानमंत्री इमरान खान ने बताया कि बिल गेट्स ने भी पाकिस्तान में गिरते हुए कोरोना ग्राफ का अध्ययन करने की इच्छा जताई है।

कोरोना काल में भी पाकिस्तान को नीचा दिखाने में लगी रही भारतीय मीडिया और भगवा नेता

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने 11 जून को कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में भारत को मदद की पेशकश करते हुए एक ट्वीट में लिखा- “भारत में 34 फीसदी परिवार किसी मदद के बगैर हालात को एक हफ्ते से ज्यादा नहीं झेल पाएंगे। ‘मैं मदद और नकद सहायता की हमारी वह योजना साझा करने के लिए तैयार हूं जिसकी पहुंच और पारदर्शिता की सारी दुनिया तारीफ कर रही है।’ इस योजना का नाम एहसास है। इसके तहत पाकिस्तान सरकार गरीब परिवारों को आर्थिक मदद देती है।”

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की पेशकश पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा -“पाकिस्तान अगर यह याद रखे कि उस पर उसकी जीडीपी के 90 फीसदी के बराबर कर्ज है तो शायद उसका भला हो जाएगा। जहां तक भारत की बात है, हमारा प्रोत्साहन पैकेज पाकिस्तान की जीडीपी जितना बड़ा है। अनुराग श्रीवास्तव का आगे कहना था, ‘पाकिस्तान अपने लोगों को पैसे देने के बजाय देश से बाहर बैंक खातों में पैसे डालने (आतंकी फंडिंग) के लिए अच्छे से जाना जाता है। साफ है कि इमरान खान को बेहतर सलाहकारों और बेहतर जानकारी की जरूरत है।”

इससे पहले भारतीय मीडिया में लगातार कोरोना काल के दौरान भी पाकिस्तान के आर्थिक स्थिति के बारे में काफी कुछ प्रोपोगैंडा चलाया जाता रहा है।

पिछले साल खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई मंचों से कहा था- “पाकिस्तान कटोरा लेकर घूम रहा है, लेकिन उसे कोई मदद देने को भी तैयार नहीं है।”

शुरु से आखिर तक डब्ल्यूएचओ ने पाकिस्तान के प्रयासों का सराहा

10 अप्रैल को डब्ल्यूएचओ के पाकिस्तान प्रतिनिधि डॉक्टर Palitha Gunarathna Mahipala ने कोविड-19 के खिलाफ़ पाकिस्तानी प्रयासों की सराहना करते हुए बेस्ट बताया था। उन्होंने कहा था पाकिस्तान ने कोविड-19 के खिलाफ़ विश्व की सबसे अच्छे ‘नेशनल रिस्पांस प्रोग्राम’ के साथ आगे बढ़ा है।

इससे पहले पंजाब प्रांत के लाहौर में महज 9 दिन में 1000 बेडों वाले कोविड-19 अस्पताल बनाए जाने के मामले को भी WHO ने ट्वीट करके सराहना किया था।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

This post was last modified on August 24, 2020 7:17 pm

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