कृषि कानून के खिलाफ बिहार में 25 के बदले अब 30 जनवरी को मानव श्रृंखला

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पटना। किसान विरोधी तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने, बिजली बिल 2020 वापस लेने, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीद की गारंटी करने, धान खरीद की सीमा समाप्त करने, बिहार में मंडियों को फिर से बहाल करने आदि मांगों पर अब 25 जनवरी की बजाए महात्मा गांधी शहादात दिवस यानि 30 जनवरी को महागठबंधन के आह्वान पर पूरे बिहार में मानव श्रृंखला का आयोजन होगा। महात्मा गांधी ने बिहार के चंपारण से ही तीनकठिया प्रणाली के खिलाफ किसान आंदोलन की शुरूआत की थी, जो बाद में चलकर पूरे राष्ट्रीय आंदोलन का आधार बना। आज भाजपा सरकार द्वारा एक बार फिर से देश में कंपनी राज थोपने के लिए किसान विरोधी कानून लाए गए हैं। आजादी की इस दूसरी लड़ाई में बिहार एक बार फिर इतिहास रचेगा।

उक्त बातें आज पटना में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए माले व अखिल भारतीय किसान महासभा के नेताओं ने कही। संवाददाता सम्मेलन में पार्टी के राज्य सचिव कुणाल, पोलित ब्यूरो के सदस्य धीरेन्द्र झा, विधायक दल के नेता महबूब आलम, अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष केडी यादव और माले के वरिष्ठ नेता राजाराम शामिल थे।

नेताओं ने यह भी कहा कि अब 25 जनवरी को यानि गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पूरे राज्य में 26 जनवरी को आहूत किसान परेड के समर्थन में मशाल जुलूस का आयोजन भाकपा-माले व किसान महासभा के बैनर से किया जाएगा। चट्टी-बाजारों व गांवों में सभायें आयोजित कर इन कानूनों की असलियत आम लोगों के बीच रखी जाएगी। 26 जनवरी को राज्य में खेती बचाओ-देश बचाओ-संविधान बचाओ संकल्प दिवस का आयोजन किया जाएगा। हम तीनों कानूनों को रद्द करने तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प लेंगे।

बिहार विधानसभा के आगामी सत्र में तीनों किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने की मांग भी उठाई जाएगी।

नेताओं ने कहा कि किसान महासभा के बैनर से पूरे राज्य में जिला व भोजपुर में प्रखंड स्तर पर विगत 5 जनवरी से अनिश्चितकालीन धरने चल रहे हैं। इन धरनों में छोटे-बटाईदार किसानों सहित कृषक मजदूरों की व्यापक भागीदारी हो रही है। हमारी पार्टी के सभी विधायक इन धरनों में हिस्सा ले रहे हैं। 15 जनवरी को धरनास्थलों पर बड़ी सभा आयोजित करने का फैसला लिया गया है। हमारी कोशिश है कि पूरे राज्य में इस तरह के धरने संगठित किये जाएं। चंपारण में उपर्युक्त मांगों के साथ-साथ गन्ना का मूल्य निर्धारण की भी मांग उठाई जा रही है।

पूरे राज्य में किसान-बटाईदार पंचायतों का भी आयोजन चल रहा है। 15 जनवरी से लेकर 26 जनवरी तक सघन रूप से पंचायतों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें हमारी पार्टी और किसान महासभा के नेता भाग लेंगे। इन पंचायतों से किसान विरोधी कृषि बिलों को रद्द करने के प्रस्ताव लिए जा रहे हैं।

किसानों के चल रहे आंदोलनों के दबाव में प्रशासन व पैक्स कुछ हरकत में आए हैं। कुछेक जिलों में प्रशासन को हमने एमएसपी पर धान खरीदने के लिए बाध्य कर दिया है। ग्रामीण इलाकों में पैक्स ने धान खरीदारी बढ़ाई है। उदाहरणस्वरूप भोजपुर में 4 जनवरी तक महज 4 हजार मिट्रीक टन धान की खरीददारी हुई थी, लेकिन विगत 4 दिनों में यह बढ़कर 34 हजार मिट्रीक टन हो गया है। 

आंदोलनों का ही दबाव है कि सरकार को धान खरीद का अपना लक्ष्य बढ़ाना पड़ा है। नया लक्ष्य अब 30 लाख मिट्रीक टन से बढ़ाकर 45 लाख मिट्रीक टन कर दिया गया है। लेकिन दूसरी ओर सरकार ने धान खरीद की तिथि 31 मार्च से घटाकर 31 जनवरी कर दिया है। हम सरकार के इस फैसले की निंदा करते हैं। धान उत्पादन के प्रमुख केंद्रों में फरवरी महीने तक धान तैयार होता है, इसलिए सरकार इस फैसले को अविलंब वापस ले।

सरकार की ओर से कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलने के कारण पैसा के लिए पैक्स को बैंकों पर निर्भर रहना पड़ता है। बैंक एक किश्त यानि 403 क्विंटल धान खरीद की ही राशि एक बार में पैक्स के लिए उपलब्ध करवाती है। पैसा वापस बैंक में लौट जाने के बाद ही दूसरी किश्त जारी हो सकती है। यह प्रक्रिया बहुत जटिल व धीमी है। यह असल में धान नहीं खरीदने का जरिया है। पैक्स की धांधली भी जगजाहिर है। किसानों को अधिकतम 1600 रु. प्रति क्ंविटल मिलता है। खखरी व नमी के नाम पर प्रति क्विंटल 5 किलो अनाज अतिरिक्त लिया जाता है। धान खरीद की सीमा समाप्त कर सभी किसानों के धान खरीद की गारंटी करनी होगी। 

नेताओं ने कहा कि पूर्व घोषित 13 जनवरी को कृषि कानूनों की प्रतियां जलाने, 18 जनवरी को किसान आंदोलन के समर्थन में महिला प्रतिवाद और 23 जनवरी को सुभाषचंद्र बोस की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम को बिहार में मजबूती से लागू करने का हम आह्वान करते हैं।

शराबबंदी के नाम पर फुलवारी के गौरीचक में हाजत में हुई एक युवक और विगत दिनों पीरो में इसी नाम पर एक व्यक्ति की मौत की न्यायिक जांच की भी मांग की गयी।

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित।)

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