Monday, October 25, 2021

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बंगाल में चुनाव बाद हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को जारी किया नोटिस

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बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा के मामले में ममता सरकार की याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। जस्टिस विनीत सरन और अनिरुद्ध बोस की पीठ ने चुनाव के बाद हिंसा जांच के खिलाफ बंगाल सरकार की याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा है। पीठ ने कहा कि बंगाल सरकार ने नोटिस जारी करने का मामला बनाया है। हम केंद्र को जवाब दाखिल करने के लिए कम समय देंगे। मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी।

सुनवाई के दौरान बंगाल सरकार ने कहा जांच पैनल के सदस्य भाजपा से जुड़े हैं। कानूनी मुद्दों को आपराधिक कानून से निपटने की जरूरत है, कमेटी द्वारा नहीं। ये जांच संघीय ढांचे के खिलाफ है। मुख्यमंत्री के शपथ लेने के बाद जो घटनाएं हुईं, उन्हें भी चुनाव के बाद की हिंसा की श्रेणी में रखा गया। अगर राज्य की एजेंसियां सही तरीके से काम नहीं कर रही हैं तो केस-टू-केस के आधार पर केस ट्रांसफर करें। लेकिन यहां, कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा सभी मामलों को एक साथ ट्रांसफर कर दिया गया है। सीबीआई एक केंद्रीय एजेंसी है जो राजनीतिक बदले में काम कर रही है।

पीठ ने सभी पक्षकारों की दलील सुनने के बाद केन्द्र सीबीआई, चुनाव आयोग और कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता रहे लोगों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी। पीठ ने कहा कि राज्य ने जनहित याचिका याचिकाकर्ताओं को नोटिस जारी करने का मामला बनता है, जिसके आधार पर हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया था।

पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने व्यापक सवाल उठाते हुए कहा कि 2 मई से 5 मई के बीच कानून और व्यवस्था चुनाव आयोग की निगरानी में थी। चुनाव बाद हिंसा की परिभाषा को विस्तारित किया गया। सरकार बनने के बाद हुए सामान्य अपराधों को भी चुनाव बाद हिंसा के दायरे में लाया गया। -एनएचआरसी की फैक्ट फाइंडिंग टीम में ऐसे सदस्य शामिल थे, जिनका भाजपा के साथ खुला संबंध है। इसलिए पूर्वाग्रह की आशंका है।

कपिल सिब्बल ने कहा कि एनएचआरसी की फैक्ट फाइंडिंग टीम ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया। हाईकोर्ट का आदेश नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है, क्योंकि राज्य को जवाब देने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। राज्य को सात दिनों के भीतर हजारों शिकायतों का जवाब देने के लिए कहा गया था। कोई भी जांच सात दिनों के भीतर पूरी नहीं की जा सकती है। हाईकोर्ट ने राज्य द्वारा रखी गई सामग्री पर विचार भी नहीं किया।

कपिल सिब्बल ने दलील दी है कि 2 मई से लेकर 5 मई तक चुनाव आयोग का सुपरविजन राज्य में था। साथ ही चुनाव बाद की हिंसा को आगे के अपराध से भी जोड़ दिया गया है। राज्य में होने वाले सामान्य अपराध को चुनाव बाद की हिंसा के साथ जोड़ने की कोशिश की गई है।

कपिल सिब्बल ने कहा कि एक संघीय ढांचे में राज्य सरकार को पर्याप्त अवसर दिए बिना उसे फटकार नहीं लगाई जा सकती। हाईकोर्ट ने राज्य को एनएचआरसी समिति की अंतरिम रिपोर्ट की प्रति प्रस्तुत किए बिना आदेश पारित किया।हाईकोर्ट ने राज्य के साथ बलात्कार की शिकायतों के अनुलग्नकों को यह कहते हुए साझा करने से इनकार कर दिया कि पीड़ितों की गुमनामी को सुरक्ष‌ित रखने की आवश्यकता है। सीबीआई को मामलों को सामूहिक रूप से स्थानांतरित नहीं किया जा सकता है। सीबीआई जांच का आदेश देने से पहले, मामला-दर-मामला स्थानीय पुलिस की ओर से विफलता का पता लगाना होगा।

कपिल सिब्बल ने कहा कि मुद्दा यह है कि आप राज्य को फटकार लगाते हैं और राज्य को यह तक नहीं बताते कि क्या जांच की जा रही है और कितनी गिरफ्तारियां की गई हैं और आप जवाब दाखिल करने के लिए 7 दिन का समय देते हैं, जबकि हजारों मामले दर्ज किए गए।आर्टिकल 226 के तहत क्या हाईकोर्ट बड़े पैमाने पर मामलों के ट्रांसफर का आदेश दे सकता है? यदि आप पाते हैं कि एजेंसी पक्षपाती है तो ठीक है, लेकिन सिर्फ इसलिए कि आपको कई मामले मिले हैं, आप यह नहीं कह सकते कि हम सभी को ट्रांसफर कर देंगे। हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से दाखिल जवाब पर कोई गौर ही नहीं किया और सीबीआई जांच का आदेश सुना दिया।

सवाल ये भी है कि क्या हाईकोर्ट एक साथ इतने सारे केस के (बिना हरेक केस की मेरिट में जाए) जांच को ट्रांसफर करने का आदेश सुना सकता है। रेप से जुड़ी शिकायतों को लेकर संलग्नक भी हमें इस आधार पर नहीं दिया गया कि इससे शिकायतकर्ताओं के नाम खुलासा होगा। आप ऐसे मामलो में प्राइवेट पार्टी के सामने नाम नहीं खुलासा कर सकते। पर राज्य सरकार के साथ ये साझा करने में क्या दिक़्क़त है। इस मामले में जो टाइम लाइन है, वो न्याय के प्राकृतिक सिद्धांत के खिलाफ है। मुजफ्फरनगर दंगा केस में ख़ुद उच्चतम न्यायालय में हर केस की तह तक जाने में 5 महीने लगे।

लगभग दो घंटे तक सिब्बल को सुनने के बाद, पीठ ने कहा कि सिब्बल, आपने नोटिस जारी करने के लिए एक मामला बनाया है। देखते हैं उनका क्या कहना है। हम सुनेंगे, यह एक बार में ही हो जाता है जब दूसरा पक्ष भी होता है। हम पाते हैं कि आपने नोटिस के लिए एक मामला बनाया है। पीठ द्वारा नोटिस दिए जाने के बाद, सिब्बल ने पीठ से यह टिप्पणी मांगी कि सीबीआई जांच मामले के परिणाम के अधीन होगी। पीठ ने कहा कि बिना विशिष्ट आदेश पारित किए भी ऐसा ही समझा जाता है।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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