Tuesday, December 7, 2021

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मानवाधिकार कार्यकर्ता परवेज़ को फिर एनआई ने किया गिरफ्तार

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जम्मू और कश्मीर में NIA ने छापेमारी की है। कथित टेरर फंडिंग के मामले में NIA ने मानवाधिकार कार्यकर्ता परवेज़ खुर्रम के आवास और दफ्तर पर छापेमारी करके उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। एनआईए के अधिकारियों ने सोमवार 22 नवंबर को श्रीनगर स्थित उनके निवास और जेकेसीसीएस के दफ्तर पर छापा मारा और उन्हें पूछताछ के लिए साथ ले गए। बाद में परवेज को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया और उनके आवास पर अरेस्ट मेमो पहुंचा दिया गया। अरेस्ट मेमो के मुताबिक़ उनके ख़िलाफ़ आईपीसी की कई धाराओं और यूएपीए के तहत आरोप दर्ज किए गए हैं। इनमें आतंकवादी संगठनों और गतिविधियों के लिए पैसे उपलब्ध कराने के आरोप भी शामिल हैं। NIA अधिकारियों ने मंगलवार को ये जानकारी देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर कोलिशन ऑफ सिविल सोसाइटी के समन्वयक परवेज़ को सोमवार को उनके सोनावर स्थित आवास पर छापेमारी के दौरान हिरासत में लिया गया और रात करीब 11.30 बजे गिरफ्तार कर लिया गया।परवेज के खिलाफ धारा 17 (आतंकवादी अधिनियम के लिए धन जुटाना), 18 (साजिश), 18 बी (आतंकवादी कृत्य के लिए किसी व्यक्ति या व्यक्तियों की भर्ती), 38 (एक आतंकवादी संगठन की सदस्यता से संबंधित अपराध), और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 40 (एक आतंकवादी संगठन के लिए फंड जुटाना) के तहत मामला दर्ज़ किया गया है। खुर्रम परवेज पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश), 121 (सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए उकसाना), और 121 ए (धारा 121 द्वारा दंडनीय अपराध करने की साजिश) के तहत भी मामला दर्ज़ किया गया है। 
बता दें कि मोदी-शाह-डोभाल के कार्यकाल में ही इससे पहले साल एनआईए ने अक्टूबर 2020 में भी परवेज के घर और दफ्तर समेत कश्मीर में कई स्थानों पर छापे मारे थे। वहीं साल 2016 में उन पर जम्मू और कश्मीर के विवादास्पद कानून पीएसए के तहत आरोप लगाए गए थे और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। और 76 दिनों की हिरासत के बाद उन्हें जम्मू और कश्मीर हाई कोर्ट के आदेश पर रिहा करना पड़ा था। उस समय अदालत ने उनकी गिरफ्तारी को ही “अवैध” बताया था और कहा था कि उनकी गिरफ्तारी का आदेश जारी करने वाले जिला मजिस्ट्रेट ने अपनी शक्तियों का “दुरुपयोग” किया है। इतना ही नहीं अदालत ने पुलिस की जांच और गवाहों पर भी सवाल उठाए थे।गौरतलब है कि खुर्रम परवेज़ कश्मीर के जाने माने मानवाधिकार कार्यकर्ता और मानवाधिकार संगठनों के संघ जेकेसीसीएस के कार्यक्रम संयोजक हैं। परवेज सुरक्षाबलों के हाथों प्रताड़ित किए गए लोगों के लिए काम करने वाली संस्था एएफडी के प्रमुख भी हैं और लंबे समय से कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों को ट्रैक करते रहे हैं। साल 2006 में उन्हें अंतरराष्ट्रीय रीबॉक मानवाधिकार पुरस्कार दिया गया था। 2004 में वो सिविल सोसायटी की तरफ से कश्मीर के लोलाब में चुनावों की निगरानी कर रहे थे जहां उनकी गाड़ी में हुए एक बम विस्फोट ने उनके एक सहयोगी और उनके ड्राइवर की जान चली गई। परवेज को भी उस धमाके की वजह से अपने एक टांग गंवानी पड़ी। 

परवेज़ की गिरफ्तारी पर सवाल

परवेज़ की गिरफ्तारी का कई राजनेताओं, पत्रकारों और ऐक्टिविस्टों ने विरोध किया है। 
संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर विशेष अधिकारी मैरी लॉलर ने एक ट्वीट में परवेज का समर्थन करते हुए लिखा कि “वो एक आतंकवादी नहीं बल्कि मानवाधिकारों के संरक्षक” हैं।
राष्ट्रीय जनता दल सांसद मनोज झा ने ट्विटर पर कहा कि वो खुर्रम को जानते हैं और उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि उन्हें गिरफ्तार करने की सलाह सरकार को किसने दी। 

जन हस्तक्षेप ने घाटी में नागरिक अधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज की गिरफ्तारी की निंदा की।

कश्मीर घाटी में प्रसिद्ध नागरिक अधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज़ की गिरफ्तारी की जन हस्तक्षेप ने कड़ी निंदा किया है। जन हस्तक्षेप ने एक बयान देकर कहा है कि  हमारा मानना है कि भारतीय दंड संहिता और यूएपीए (गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम) की खतरनाक धाराओं और एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) का लंबे समय से शासक वर्गों का अपने जन विरोधी शासन का विरोध करने वालों को चुप कराने का पसंदीदा हथियार बन गया है।जन हस्तक्षेप ने अपने बयान में आगे कहा है कि खुर्रम परवेज़ को मनमाने ढंग से गिरफ्तार करके सरकार अपने फासिस्ट शासन को जायज ठहराने के लिए दुष्प्रचार कर रही है। इससे पूर्व हैदरपोरा में हुई मुठभेड़ में सुरक्षाबलों द्वारा निर्दोष नागरिक को मार दिया गया जिसकी व्यापक निंदा देशभर में हो रही है। परवेज कश्मीर के नागरिक अधिकारों से संबंधित गठबंधन में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं जिन्होंने कश्मीर घाटी में नागरिक अधिकारों और स्वतंत्रता के हनन पर कई उल्लेखनीय जांच रिपोर्ट तैयार की थी। ऐसा लगता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एनएसए अजीत डोभाल जिन्होंने कुछ दिनों पूर्व नागरिक समाज को नष्ट करने के लिए एक नया युद्ध क्षेत्र घोषित करने की बात कही थी, उसकी शुरुआत खुर्रम परवेज जैसे कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी से शुरुआत कर दिया गया है।
जन हस्तक्षेप के सहसंयोजक डॉ विकास बाजपेई ने अपने बयान में कहा है कि – जन हस्तक्षेप समाज के सभी वर्गों के जनवादी और नागरिक अधिकारों के समर्थकों से अपील करता है और उम्मीद करता है कि सत्तारूढ़ फासीवादी शासन के खिलाफ लड़ने वालों की रक्षा के लिए और परवेज की गिरफ्तारी का वह विरोध करेंगे।

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