Wednesday, October 27, 2021

Add News

पंजाब के लाखों लोग केंद्रीय राशन योजना से वंचित

ज़रूर पढ़े

कोरोना वायरस के चलते जारी लॉकडाउन और कर्फ्यू ने गरीबों को बेतहाशा बेजार कर दिया है। बेशुमार लोग दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं। भुखमरी की नौबत ऐन सिर पर है। ऐसे हालात में भी सियासत और हुकूमत की नालायकी की वजह से पंजाब के लाखों लोग केंद्र सरकार से मिलने वाले आधिकारिक राशन से वंचित हैं। राज्य सरकार उनकी इस बड़ी दिक्कत की ओर पीठ किए बैठी है।                       

जिक्रेखास है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत नीले कार्ड धारियों को 3 महीने का राशन मुफ्त दिए जाने का प्रावधान सुनिश्चित हुआ है। सत्ता में आने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार ने एक लाख से ज्यादा नीले कार्ड रद्द कर दिए और इनके धारक वे गरीब परिवार थे जिनके चूल्हे अब काम-धंधे बंद होने के कारण एकदम ठंडे हैं। मौजूदा संकट काल में तीन महीने का मुफ्त राशन उनके लिए बहुत बड़ी सहायता है। इसके लिए वे बेबसी के साथ पुरजोर गुहार कर रहे हैं लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हो रही।         

पंजाब सरकार ने जुलाई 2019 में आटा-दाल योजना के तमाम नीले कार्ड नए सिरे से बनाने की मुहिम शुरू की थी। इस तर्क के साथ कि पिछली अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के वक्त इस योजना का लाभ उन लोगों ने भी जमकर लिया जो संपन्न थे और गरीबी रेखा से कहीं ऊपर थे। इस पत्रकार की छानबीन बताती है कि नए कार्ड कांग्रेस के विधायकों, नेताओं और हल्का प्रभारियों की सीधी सिफारिश पर बनाए गए। गैर कांग्रेसी रुझान वाले गरीब परिवारों की बाकायदा शिनाख्त की गई और उनके कार्ड नहीं बनने दिए गए। योजनाबद्ध तरीके से कांग्रेस पक्षीय परिवारों के कार्ड बड़े पैमाने पर बनाए गए। अन्यों के फॉर्म रद्द करवाए गए। इनमें वे लोग बड़े पैमाने पर शामिल हैं जो गरीबी रेखा के नीचे आते हैं और हर लिहाज से नीला कार्ड हासिल करने की पात्रता रखते हैं। उनका ‘गुनाह’ यह है कि वे कांग्रेसियों की ‘हिटलिस्ट’ में हैं और खुलकर कांग्रेस का समर्थन नहीं करते।                                               

हासिल जानकारी के मुताबिक पंजाब के खाद्य-आपूर्ति विभाग ने सितंबर, 2020 तक 34.60 लाख नीले कार्ड जारी करने हैं। जबकि अक्टूबर 2018 से मार्च 2019 तक कार्ड धारियों की तादाद 35.42 लाख थी। यानी छह महीनों में ही 81.191 नीले कार्ड निरस्त कर दिए गए और इसकी वजह से 4.01 लाख लोगों पर नागवार असर पड़ा। गौरतलब है कि कार्डों में नई गिनती भी शामिल है, जिसकी वजह से निरस्त कार्डों का आंकड़ा 1.50 लाख से ज्यादा हो सकता है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के गृह जिले पटियाला में 9143 कार्ड रद्द किए गए और पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के पुश्तैनी जिले मुक्तसर में 30,196 लोगों को नीले कार्ड से वंचित कर दिया गया। लुधियाना में 4076, बरनाला में 6184 और गुरदासपुर में 2897 कार्ड काट दिए गए। इसी तर्ज पर हर इलाके में कार्ड काटे गए।                                 

विधायक बुधराम।

बुढलाडा से आम आदमी पार्टी के विधायक और पार्टी की कोर कमेटी के चेयरमैन बुधराम ने इस सरकारी विसंगति के खिलाफ मुहिम शुरू की है। वह कहते हैं, “सरकार लोगों को अभाव के इस दौर में नीले कार्ड से वंचित करके बहुत बड़ी बेइंसाफी कर रही है। बड़ी तादाद में जायज लोगों के कार्ड भी काट दिए गए हैं। अपंगों को तक को घटिया राजनीति के चलते मुफ्त राशन से मरहूम किया जा रहा है। वे भूखों मरने को मजबूर हैं। विधानसभा में इस मसले को उठा चुका हूं। अब जिला उपायुक्त के जरिए मुख्यमंत्री को फिर विरोध दर्ज कराया है।”                       

शिरोमणि अकाली दल के किसान प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व मंत्री सिकंदर सिंह मलूका के अनुसार कैप्टन सरकार ने 95 फ़ीसदी कार्ड जायज लोगों के निरस्त किए हैं और यह बहुत बड़ा अन्याय है। राशन बांटने में खुलकर भेदभाव बरता जा रहा है। उधर पंजाब के खाद्य आपूर्ति मंत्री भारत भूषण आशू कहते हैं कि किसी किस्म का कोई भेदभाव नहीं किया जा रहा और पूरी वेरिफिकेशन के बाद कार्ड निरस्त किए गए हैं।

खैर, जो हो फिलहाल कोरोना वायरस के संकट में पंजाब के लाखों लोग प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के जरिए मिलने वाले राशन से महरूम हैं।

(अमरीक सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल जालंधर में रहते हैं।)

तत्काल समाचारों के लिए, हमारा जनचौक ऐप इंस्टॉल करें

Latest News

दो सीटों पर हो रहे उपचुनाव में बीजेपी-जेडीयू को मिलेगी करारी शिकस्त: दीपंकर भट्टाचार्य

पटना। दो विधानसभा सीटों पर हो रहे उपचुनाव में अपनी हार देख नीतीश कुमार एक बार फिर अनाप-शनाप की...
जनचौक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें

Janchowk Android App

More Articles Like This

- Advertisement -