स्टेन स्वामी की हत्या की न्यायिक जांच हो: वाम दल

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रांची। फादर स्टेन स्वामी को लेकर आज रांची में कई कार्यक्रम हुए। एक तरफ वाम दलों की ओर से उनकी सांस्थानिक हत्या के विरोध में मार्च निकाला गया। जबकि दूसरी तरफ एक अन्य कार्यक्रम में सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने स्टेन स्वामी को श्रद्धांजलि देने के साथ ही उनकी याद में पौधारोपण भी किया। वामदलों की ओर से होने वाले मार्च की अगुआई सीपीएम की पोलितब्यूरो सदस्य वृंदा करात ने की।

इस मौके पर शहीद चौक से निकल कर जिला स्कूल मैदान होते हुए राजभवन तक मार्च आयोजित किया गया। सीपीआई (एम) की पोलित ब्यूरो सदस्य वृंदा करात, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव और पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता के नेतृत्व में निकला यह मार्च बैरिकेडिंग को तोड़ते हुए गगनभेदी नारों के साथ राजभवन तक पहुंचा। और वहां पहुंच कर सभा में तब्दील हो गया। सभा की अध्यक्षता सामाजिक कार्यकर्ता दयामणि बरला ने की जबकि भुवनेश्वर केवट ने उसका संचालन किया। 

सभा को संबोधित करते हुए वृंदा करात ने कहा कि केंद्र सरकार ने विरोधियों की आवाज को दबाने के लिए एक साजिश के तहत फादर स्टेन स्वामी को फर्जी मुकदमे में जेल भेजा, जहां पर उनकी बगैर इलाज के मौत हो गई। साजिश का पर्दाफाश करने के लिए देश के तमाम जनवादी संगठनों, सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों ने आवाज उठायी। उन्होंने फादर स्टेन स्वामी के मामले की न्यायिक जांच की मांग की और कहा कि अगर केंद्र सरकार ऐसा नहीं करती है, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

हजारीबाग के पूर्व सांसद भुनेश्वर प्रसाद मेहता ने कहा कि केंद्र की सरकार जब से सत्ता में आई है, सरकार के विरुद्ध आवाज उठाने वालों को न केवल मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है बल्कि उन्हें फर्जी मुकदमों में फंसाया जा रहा है। चूंकि फादर स्टेन स्वामी झारखंड की जल जंगल जमीन की लड़ाई लड़ रहे थे, लिहाजा देश के कारपोरेट घराने उनके पीछे पड़ गए थे। फादर स्वामी की मौत जल जंगल जमीन की आवाज उठाने वालों पर दबाव बनाने की साजिश का हिस्सा है। उन्होंने राज्य के प्रत्येक जिले के गांव गांव में आवाज को बुलंद करने की जरूरत पर बल दिया।

भाकपा माले के विधायक विनोद सिंह ने कहा कि हर हाल में केंद्र की सरकार को फादर स्टेन स्वामी के मामले की न्यायिक जांच करानी चाहिए और उसे मामले की असलियत सामने लानी चाहिए। जो आदमी ना ठीक से बोल सकता था, न चल सकता था, न सुन सकता था, वैसे 84 वर्षीय वृद्ध को जानबूझकर केंद्र की सरकार ने मौत के घाट उतार दिया। इसलिए स्वामी की आवाज किसी भी कीमत पर दबने नहीं दी जाएगी। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी झारखंड राज्य के सहायक सचिव महेंद्र पाठक ने कहा कि केंद्र की सरकार जब से सत्ता में आई है तब से लगातार विरोधियों की आवाज दबाने के लिए अपनी एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। सवाल केवल फादर स्टेन स्वामी का नहीं है पहले भी देश के जाने माने राजनेताओं पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज कर विरोधियों की आवाज को दबाने की साजिश की जा चुकी है। लेकिन जन उभार के कारण उन्हें वापस लेना पड़ा। देश में कारपोरेट घरानों के इशारे पर केंद्र की सरकार काम कर रही है।

वह अपनी जनविरोधी नीतियों का विरोध करने वालों को फंसा रही है। इसलिए आने वाले दिनों में अघोषित आपातकाल के विरुद्ध और भी आंदोलन को तेज करना पड़ेगा। सभा को भाकपा माले के राज्य सचिव जनार्दन प्रसाद, शुभेंदु सेन, मासस के मिथिलेश सिंह, सुशांतो मुखर्जी, एसयूसीआई के मिटू पासवान, सुमित राय, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव अजय कुमार सिंह, माकपा के जिला सचिव सुखनाथ लोहरा, भाकपा माले के जिला सचिव भुवनेश्वर केवट, माकपा के राज्य सचिव मंडल के सदस्य प्रकाश विप्लव, वरुण कुमार, राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश यादव, महिला नेत्री दयामणि बरला, भाकपा के फर्जाना फारुकी, प्रफुल्ल लिंडा,वीरेंद्र कुमार, नदीम खान, मेहुल मृगेंद्र, नौरीन अख्तर, सीटू के एसके राय, अलोका कुजूर, सच्चिदानंद मिश्रा, रातू प्रखंड के प्रमुख सुरेश मुंडा, माकपा नेता भवन सिंह आदि ने संबोधित किया।

उधर एक दूसरे आयोजन में सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी शामिल हुए। फादर स्टेन स्वामी की स्मृति में आयोजित इस सभा में उन्होंने कहा कि झारखण्ड शहादत देने में कभी पीछे नहीं रहा। भगवान बिरसा मुंडा से लेकर फादर स्टेन स्वामी तक के जीवन को राज्यवासियों ने देखा है। आने वाली पीढ़ी को भी यह जानना चाहिये। फादर स्टेन स्वामी ने दलित, वंचित, आदिवासी समाज के प्रति सदैव संवेदनशील रहे। फादर स्टेन स्वामी से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात हुई थी। तब यह पता नहीं था कि वे अपने जीवन काल में अमिट लकीर खींचते आ रहे हैं। अब उसका एहसास हुआ। उनका जीवन आसान नहीं था। और वे साधारण व्यक्ति भी नहीं थे। अपने जीवन में उन्होंने हमेशा लोगों को रास्ता दिखाने का कार्य किया था। युगों बाद ऐसे लोग आते हैं, जिनके द्वारा किये गए कार्यों की छाप कभी नहीं मिटती।

मुख्यमंत्री ने कहा जीवन है, तो मृत्यु भी है। लेकिन इस जीवनकाल में हमें सकारात्मक कार्य कर विदा लेना चाहिए।

दलित, वंचित और आदिवासियों के प्रति संवेदनशील सरकार

मुख्यमंत्री ने कहा कि दलित, वंचित और आदिवासी समाज की भौतिकवादी युग में विकास की रफ्तार कम है। इसे बढ़ाने की जरूरत है। मैं अकेले यह कार्य नहीं कर सकता। इसके लिए सभी को व्यक्तिगत प्रयास करना होगा। हालांकि सरकार किसी भी योजना को दलित, वंचित और आदिवासियों की सहभागिता को ध्यान में ही रखकर धरातल पर उतारती है। सरकार इनकी जरुरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दे रही है।

स्मृति सभा में आर्च विशप एसजे रांची, एसएफएक्स थिओडोर मस्कारेन्हास, एसएफएक्स, ऑक्सीलिरी बिशप टेलोस्फर बिलुंग जमशेदपुर, फादर अजित खेस, फादर संतोष मिंज, फादर टोनी, प्रोवेनशियल, सिस्टर जनरल, सरना समिति के प्रतिनिधिगण व अन्य उपस्थित थे।

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