Thursday, December 2, 2021

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महाराष्ट्रः किसानों ने नासिक से मुंबई तक निकाला मार्च, 21 जिलों के कई लाख लोग हुए शामिल

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महाराष्ट्र के 21 जिलों के हजारों किसान शनिवार को नासिक में इकट्ठा हुए और राजधानी मुंबई तक का 180 किलोमीटर का मार्च निकालकर दिल्ली बॉर्डर पर दो महीने से आंदोलनरत किसानों को अपना समर्थन दिया। ये मार्च अखिल भारतीय किसान सभा के बैनर तले निकाला गया है।

इस विरोध मॉर्च के दौरान नासिक और मुंबई के बीच कसारा घाट क्षेत्र की सड़क पर किसानों के जनसैलाब का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वीडियो में देखा जा सकता है कि हजारों किसान हाथों में बैनर झंडा लिए नारे लगाते आगे बढ़ते जा रहे हैं।

बता दें कि आज अखिल भारतीय किसान महासभा के बैनर तले विभिन्न छोटे-छोटे किसान सगठनों से जुड़े किसान एकत्र हुए। और फिर नासिक से मुंबई के लिए पैदल मार्च के लिए निकल पड़े। ये मार्च आज मुंबई पहुंच जाएगा, और कल मुंबई के आजाद मैदान में आयोजित रैली में हिस्सा लेगा। कल आयोजित होने वाली इस किसान रैली में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) अध्यक्ष शरद पवार, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बालासाहेब थोराट और शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे हिस्सा लेंगे और किसान रैली को संबोधित करेंगे। रैली के बाद एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को एक ज्ञापन सौंपेगा।

केंद्र सरकार लगातार दिल्ली के आंदोलन को हरियाणा पंजाब तक सीमित बताकर बाकी के राज्यों के किसानों को कृषि कानून के फेवर में बताती आ रही है, लेकिन किसान आंदोलन उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र समेत तकरीबन पूरे भारत में फैल गया है। महाराष्ट्र में निकाला गया यह मार्च अपने आपमें ऐतिहासिक है।

बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीनों कृषि क़ानूनों को रद्द करने और एमएसपी पर खरीद और खरीद की गारंटी का क़ानून बनाने की मांग लेकर हजारों किसान जिसमें बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं, 26 नवंबर से दिल्ली बॉर्डर पर धरना दे रहे हैं। इनमें देश भर के किसान शामिल हैं। सरकार और किसान यूनियनों के बीच 11 दौर की बैठक हो चुकी है पर अब तक गतिरोध दूर नहीं हो पाया है, क्योंकि सरकार लगातार इन कृषि क़ानूनों को किसानों के लिए फायदेमंद बताकर इस क़ानून को वापिस लेने से साफ मना कर चुकी है। सुप्रीम कोर्ट गतिरोध दूर करने के लिए एक समिति गठित कर चुकी है जिसे आंदोलनकारी किसान सरकारी समिति और कृषि क़ानून समर्थकों की टोली बताकर खारिज कर चुके हैं।

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