Saturday, January 22, 2022

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महाराष्ट्र: पवार के पावर का कमाल! एकनाथ खड़से के रूप में भाजपा का एक स्तंभ ढहा

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महाराष्ट्र में भाजपा के बड़े नेता एकनाथ खड़से ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया है। ख़बर है कि वो बेटी रक्षा खड़से के साथ एनसीपी में शामिल हो सकते हैं, जहां उन्हें विधान परिषद के रास्ते कृषि मंत्री के तौर पर महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार में शामिल किया जा सकता है। एकनाथ खड़से ने भाजपा महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल को अपना इस्तीफा भेजा है। वहीं भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने एकनाथ खड़से का इस्तीफा मंजूर किए जाने की पुष्टि करते हुए उन्हें नई पार्टी में शामिल होने की शुभकामनाएं दी हैं।

क्या विडंबना है कि कल तक जो खेल भाजपा गोवा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान और महाराष्ट्र में दूसरी पार्टियों के साथ खेलती आई थी वही खेल अब भाजपा के साथ होने लगा है। गोवा, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में भाजपा ने इसी फॉर्मूले से सरकार बनाई है। महाराष्ट्र और राजस्थान में भी भाजपा ने छपट्टा तो बहुत मारा, लेकिन अशोक गहलोत और शरद पवार जैसे घाघों के सामने उसे अंगूर खट्टे हैं, कह कर संतोष करना पड़ा। महाविकास अघाड़ी की सरकार बनने तक भाजपा ने कई विधायकों को तोड़ कर आधी रात में सरकार बना ली थी। हालांकि तीसरे दिन ही इस्तीफा भी देना पड़ा था।

भाजपा का नुकसान एनसीपी-शिवसेना का फायदा
महाराष्ट्र भाजपा के दूसरे सबसे बड़े नेता एकनाथ खड़से के एनसीपी में जाने से कई अन्य भाजपा विधायकों का भी एनसीपी में जाने का रास्ता खुलेगा। ख़बर है कि भाजपा के कई विधायक शरद पवार के संपर्क में हैं और जल्द ही वो भाजपा से इस्तीफा देकर एनसीपी में शामिल हो सकते हैं। इसके बाद इन विधायकों से भाजपा की पार्टी सदस्यता से इस्तीफा दिला कर उपचुनाव में खड़ा किया जा सकता है।

पिछले साल चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस और एनसीपी से कई नेताओं ने पाला बदल कर भाजपा ज्वाइन की थी, जिनमें से कई भाजपा के टिकट पर विधायक भी निर्वाचित हुए थे। भाजपा के हाथ से सत्ता जाने के बाद अब दूसरी पार्टी के नेता अपनी पार्टी में वापसी करके सत्ता में भागीदार बनना चाहते हैं। वहीं भाजपा के कई विधायक भी अपनी पार्टी से असंतुष्ट होने के चलते एनसीपी कांग्रेस में अवसर देख रहे हैं।

भाजपा के सिटिंग विधायकों के एनसीपी में जाने से एक फायदा ये होगा कि महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार को मजबूती मिलेगी। वहीं अगले साल होने वाले महाराष्ट्र निकाय चुनावों में भी इसका फायदा एनसीपी को होगा। वहीं शिवसेना के उद्धव ठाकरे को विधान परिषद के लिए राज्यपाल कोटे से 12 नाम फाइनल करने हैं। इसलिए कुछ भाजपा नेताओं के शिवसेना में जाने के भी आसार हैं। हो सकता है

भाजपा छोड़ कर एनसीपी में शामिल होने पर एकनाथ खड़से को मुख्यमंत्री राज्यपाल कोटे से ही विधान परिषद भेज दें। अगर वो ऐसा करते हैं तो एकनाथ खड़से सत्ता में आ जाएंगे और फिर उनके निशाने पर भाजपा में उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी देवेंद्र फडणवीस होंगे। अभी कुछ दिन पहले ही आरे कॉलोनी वाले मामले में देवेंद्र फडणवीस सरकार की नीति को उद्धव ठाकरे सरकार ने कूड़ेदान में फेंका है।

खुद अमित शाह ने महाराष्ट्र के संदर्भ में ‘पूंछ तो दबी हुई है’ बयान देकर भाजपा के अंदरखाने के हाल को बखूबी बता दिया है। गौरतलब है कि 19 अक्तूबर को एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने एकनाथ खड़से की तारीफ करते हुए कहा था, “खड़से हाल ही में नेता प्रतिपक्ष रहे हैं और उन्होंने राज्य में बीजेपी को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अगर किसी के योगदान और कड़ी मेहनत पर ध्यान नहीं दिया जाएगा तो वह डिस्टर्ब रहने के लिए बाध्य है। उन्हें (खड़से को) सोचना चाहिए कि उन्हें उस पार्टी में क्यों नहीं शामिल हो जाना चाहिए तो उनके काम की सराहना करती है।”

एकनाथ के जाने से फडणवीस का रास्ता साफ
एकनाथ खड़से के जाने से महाराष्ट्र भाजपा में देवेंद्र फडणवीस का रास्ता निष्कंटक हो जाएगा। महाराष्ट्र में बीजेपी के वरिष्ठ नेता एकनाथ खड़से के एनसीपी में शामिल होने की अटकलों को लेकर 20 अक्तूबर को पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस से मीडिया ने जब इसकी पुष्टि करनी चाही तो उन्होंने कहा, “खड़से के पार्टी से जाने के ‘मुहुर्त’ के बारे में रोज बातें होती हैं और मैं इस संबंध में कुछ नहीं कहूंगा।”

बता दें कि एकनाथ खड़से देंवेंद्र फडणवीस सरकार में राजस्व मंत्री रह चुके हैं और देवेंद्र फडणवीस से अनबन के चलते ही साल 2019 के विधानसभा चुनाव में उन्हें टिकट नहीं दिया गया था। भाजपा में अपनी उपेक्षा और अलग-थलग किए जाने की वजह से वह नाराज चल रहे थे। इसकी शिकायत भी वह कई बार पार्टी आलाकमान से कर चुके थे, लेकिन उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। देवेंद्र फडणवीस से अनबन के चलते ही साल 2016 में उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर उनसे जबर्दस्ती इस्तीफा ले लिया गया था।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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