Friday, October 22, 2021

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सीपी-कमेंट्री : नोबेल पुरस्कार 2021 के मायने

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अफगानिस्तान से लेकर भारत में असम के दरांग और उत्तर प्रदेश में लखीमपुर खीरी तक फैली अशान्ति के बीच इस बरस के नोबेल शांति और साहित्य पुरस्कार के सिवा साहित्य , अर्थशास्त्र , भौतिकी ,रसायन और मेडिसिन के लिए सभी श्रेणी के नोबेल पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। ऐसा नहीं है कि इस बरस नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिए जाएंगे या फिर इसके लिए नॉमिनेशन नहीं मिले। दरअसल , परंपरा ही ऐसी है कि नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा अन्य सबके बाद नार्वे की राजधानी ओस्लो में कायम कमेटी आठ अक्टूबर के दिन ही करती है। नोबेल साहित्य पुरस्कार की घोषणा सात अक्तूबर को होनी है।

नोबेल शांति पुरस्कार के लिए दिल्ली के शाहीन बाग को नॉमिनेट करने की कोशिश जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) , नई दिल्ली के दो पूर्व छात्रों की पहल पर फ्रांस की राजधानी पेरिस और बिहार के एक गाँव , बसनहीं से की गई। चूंकि भारत की नरेंद्र मोदी सरकार ने कोरोना कोविड 19 महामारी का मुकाबला करने के बहाने शाहीन बाग को ही उजाड़ दिया उसके नॉमिनेशन की कोशिश आगे नहीं बढ़ सकी। वैसे इस नॉमिनेशन के बारे में जमशीत रिजवानी और इस स्तंभकार द्वारा संचालित एक पेज ( नॉमिनेशन ऑफ शाहीन बाग फॉर द नोबल पीस प्राइज ) कायम है और देश विदेश में लोकप्रिय माना जाता है ।

नोबेल पुरस्कारों की स्पष्ट नियमावली के तहत इसके लिए आस्तित्वविहीन हो चुके व्यक्ति या संस्था आदि का नॉमिनेशन स्वीकार्य नहीं है। यही कारण है कि दुनिया भर में शांति के अप्रतिम पुजारी माने गए महात्मा गांधी को कभी ये पुरस्कार नहीं दिया गया। गांधी जी की 150 वीं जयंती के अवसर पर नोबेल पुरस्कार के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने बस उनकी एक तस्वीर शेयर की। महात्मा गांधी को नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिए जाने के औचित्य के संदर्भ में सन 2006 में नॉर्वे की उपरोक्त कमेटी के तत्कालीन प्रमुख गिअर लुंडेसटाड ने खेद जता लिखा था , “ यह हमारे इतिहास में निःसंदेह सबसे बड़ी भूल चूक है। गांधी बगैर नोबेल शांति पुरस्कार के भी अपना काम करते रहे। सवाल तो ये है कि क्या नोबेल कमेटी , गांधी के बगैर काम कर सकती है?

उन्होंने संकेत दिए कि 30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली की एक प्रार्थना सभा में महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दिए जाने से पहले उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान करने का सुझाव लगभग अंतिम दौर में पहुँच गया था। लेकिन गाँधी जी की हत्या हो जाने के बाद उपरोक्त नियमावली के कारण ये सुझाव भी फ़ाइलों में दब कर मर गया।
बहरहाल , नोबेल पुरस्कार हर साल 10 दिसंबर को प्रदान किए जाते हैं। एसोसिएटेड प्रेस की खबर के मुताबिक इस बार के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किये जाने वालों में यूरोप के देश बेलारूस की आत्म-निर्वासित विपक्षी महिला नेता स्वेतलाना तिखनोस्काया भी शामिल हैं।

रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने भौतिक विज्ञान के लिए वर्ष 2021 का नोबेल पुरस्कार स्यूकूरो मनाबे ( जापान ) ,क्लॉस हैसलमैन ( जर्मनी ) और जॉर्जियो पारिसी ( इटली ) को देने का एलान किया है। इन्हें जटिल भौतिक प्रणालियों को समझने में उपयोगी उनके शोध के लिए पुरस्कार के वास्ते चुना गया है। पुरस्कार की जूरी के अनुसार मनाबे और हैसलमैन को पृथ्वी की जलवायु की भौतिक मॉडलिंग और ग्लोबल वॉर्मिंग के पूर्वानुमान की परिवर्तनशीलता और प्रामाणिकता के मापन क्षेत्र में उनके कार्यों के लिए चुना गया। उन्होंने दिखाया कैसे वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड के बढ़े स्तर से पृथ्वी की सतह पर तापमान में वृद्धि होती है। उनके काम ने वर्तमान जलवायु मॉडल के विकास की नींव रखी। परिसी को परमाणु से ग्रहों के मानदंडों तक भौतिक प्रणाली में विकार और उतार-चढ़ाव की पारस्परिक प्रक्रिया की खोज के लिए इस पुरस्कार के लिए चुना गया।

अमेरिकी वैज्ञानिक डेविड जूलियस और अरडेम पैटापूटियन को संयुक्त रूप से मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार विजेता घोषित किया गया है। उन्हें ये पुरस्कार इस शोध के लिए दिया गया कि मानव शरीर की गर्मी अपनों को स्पर्श करने पर कैसे परिवर्तित होती है और किस तरह हमारा जिस्म संवेदना को विद्युतीय तरंग में बदल उसे नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र ) से मस्तिष्क तक सिग्नल के रूप में पहुंचाता है।

अल्फ्रेड बर्नहाड़ नोबेल

अल्फ्रेड नोबेल (21 अक्टूबर 1833:10 दिसंबर 1896 ) ने कुल मिलाकर 355 आविष्कार किए जिनमें 1867 में डायनामाइट का आविष्कार भी शामिल है। उन्होंने इन आविष्कारों की बदौलत हासिल विशाल संपदा का 94 फीसद हिस्सा 1896 में अपनी मृत्यु के पहले एक ट्रस्ट के लिए सुरक्षित छोड़ दिया था। उनकी इच्छा थी इस धन से अर्जित ब्याज से हर बरस उनको पुरस्कृत किया जाए जिनका काम मानव जीवन के लिए कल्याणकारी हो । 29 जून 1900 को एक ट्रस्ट के रूप में कायम नोबेल फाउंडेशन , स्वीडिश बैंक में जमा उनके धन पर प्राप्त ब्याज से 1901 से लगातार हर बरस शांति, साहित्य, भौतिकी, रसायन, चिकित्सा विज्ञान और अर्थशास्त्र में सर्वोत्कृष्ट योगदान के लिए पुरस्कार प्रदान करता है। अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार की शुरुआत बाद में 1968 में की गई। पहला नोबेल शांति पुरस्कार 1901 में रेड क्रॉस के संस्थापक हेनरी ड्युनेंट और फ़्रेंच पीस सोसाइटी के संस्थापक अध्यक्ष फ्रेडरिक पैसी को संयुक्त रूप से दिया गया।

अल्फ्रेड नोबेल का जन्म स्टॉकहोल्म में उच्च वर्ग के अभियंता परिवार में हुआ था। उन्होंने 1894 में बेफोर्स आयरन स्टील मिल ख़रीद इसे बैलेस्टिक मिसाइल आदि हथियारों के निर्माण का बड़ा वैश्विक संयंत्र बना दिया।

नोबेल फाउंडेशन के पाँच सदस्यों का प्रमुख स्वीडन की किंग ऑफ काउन्सिल चुनता है। अन्य चार , पुरस्कार वितरक न्यास के ट्रस्टियों द्वारा चुने जाते हैं। पुरस्कृतों को नोबेल पुरस्कार स्टॉकहोम में एक भव्य समारोह में स्वीडन के राजा प्रदान करते हैं।

हम सब जानते हैं कि नोबेल पुरस्कार 1901 में स्वीडन के वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल की याद में नोबेल फाउंडेशन द्वारा स्थापित किये गए और ये यह शांति, साहित्य, भौतिकी, रसायन, चिकित्सा विज्ञान और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में विश्व का सर्वोच्च पुरस्कार है। इनके विजेता को पुरस्कार के बतौर प्रशस्ति-पत्र , स्वर्ण पदक और करीब 11 लाख अमेरिकी डालर की राशि प्रदान की जाती है। सन 2020 तक कुल मिलाकर 603 नोबेल पुरस्कारों के तहत 962 को पुरस्कृत किया जा चुका है।

भारतीय संदर्भ: टैगोर से अभिजीत बनर्जी तक

गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर पहले भारतीय थे जिन्हें नोबेल पुरस्कार मिला। उन्हें ये पुरस्कार 1913 में साहित्य के लिए उनकी काव्य कृति गीतांजलि का स्वयं किये आंग्ल रूपांतरण की सराहना में प्रदान किया गया। पुरस्कार निर्णायकों ने इसे गुरुदेव की संवेदनशीलता, और नयापन की सुंदर काव्य कृति माना जिसमें उन्होंने अपने परिपूर्ण कौशल से काव्यात्मक विचारों को अंग्रेजी शब्दों में व्यक्त किया।
सन 1930 में भारत के भौतिकशास्त्री सर चंद्रशेखर वेंकट रामन को प्रकाश किरणों के प्रकीर्णन पर नई खोज के लिए नोबेल भौतिक विज्ञान पुरस्कार प्रदान किया गया। इस खोज को उनके नाम पर ही ‘ रामन अफेक्ट ‘ कहा जाता है।
भारत के अर्थशास्त्री प्रोफेसर अमर्त्य सेन को 1988 में अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार जन कल्याणकारी आर्थिकी में उनके कार्य के लिए दिया गया।
सन 2014 में भारत के एक्टिविस्ट कैलाश सत्यार्थी को बच्चों और युवाओं के दमन के विरुद्ध संघर्ष तथा सभी बच्चों के शिक्षा के अधिकार की प्राप्ति के वास्ते उनके कार्य के लिए शांतिनोबेल पुरस्कार दिया गया।
नोबेल पुरस्कार विजेताओं में भारतीय मूल के डाक्टर हरगोविन्द खुराना भी शामिल हैं जो बाद में अमेरिकी नागरिक बन गए। उन्हें ये पुरस्कार 1968 में चिकित्सा के क्षेत्र में आनुवांशिक कोड और इसके प्रोटीन संश्लेषण पर शोध एवं अनुसंधान के लिए प्रदान किया गया।

सन 1983 में भारतीय मूल के ही अमेरिकी विज्ञानी सुब्रह्मण्यन चन्द्रशेखर को भौतिकी नोबेल पुरस्कार तारों के विकास और संरचना के महत्त्व की भौतिक प्रक्रियाओं के सैद्धान्तिक अध्ययन के लिए दिया गया। 2009 में भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक वेंकटरामन रामकृष्णन को राइबोसोम की संरचना के अध्ययन के लिए रसायन नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।

प्रेसीडेंसी कॉलेज , कोलकाता और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय , नई दिल्ली के (जेएनयू) में पढ़ने के के बाद अमेरिका के हार्वर्ड विश्वविद्यालय में आर्थिकी के विषय पर फ्रांस मूल की पत्नी इस्थर दुफ़लों के साथ मिल वैश्विक गरीबी दूर करने के प्रायोगिक कार्यों के लिए अभिजीत बनर्जी को 2019 में संयुक्त रूप से नोबेल अर्थशास्त्र पुरस्कार दिया गया। उनकी पत्नी को तमिलनाडु की एम के स्टालिन सरकार ने कुछ माह पहले अपना आर्थिक सलाहकार नियुक्त किया है।

बहरहाल , सवाल तो उठेंगे ही कि गांधी को नोबेल शांति पुरस्कार और प्रेमचंद को नोबेल साहित्य पुरस्कार क्यों नहीं दिए गए। सवाल तो ये भी उठना है कि क्या उन्हें मरणोपरांत नोबेल पुरस्कार घोषित करने के लिए नोबेल पुरस्कार कमेटियां अपनी मौजूदा नियमावली में संशोधन क्यों नहीं ला सकती हैं?
(चंद्र प्रकाश झा वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल दिल्ली में रहते हैं।)

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