Saturday, January 22, 2022

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किसानों के खिलाफ़ मोदी सरकार ने छेड़ा युद्ध!

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किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ़ दिल्ली कूच कर रहे किसानों के खिलाफ़ सरकार ने एक तरह से युद्ध छेड़ दिया है। किसानों पर आंसू गैस, वॉटर कैनन से हमला किया जा रहा है। दिल्ली–हरियाणा सिंधु बॉर्डर, अंबाला और टिकरी बॉर्डर और बहादुरगढ़ में पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस से हमला किया है। सुबह से लेकर दोपहर 12 बजे तक किसानों पर दो राउंड लाठीचार्ज और आंसू गैस से हमला किया गया है।

किसान सिंधु बॉर्डर पर ही धरने पर बैठ गए हैं। अंबाला स्थित सिंधु बॉर्डर सील कर दिया गया है। हरियाणा-पंजाब-दिल्ली से सटी सभी सीमाओं को सील कर दिया गया है। हरियाणा-दिल्ली सीमा, दिल्ली-यूपी बॉर्डर कोंडली के पास, गुरुग्राम फरीदाबाद से दिल्ली आने वाली सड़कें, गाजियाबाद, नोएडा से दिल्ली आने वाली सड़कों पर बैरीकेडिंग लगाकर पुलिस वॉटर कैनन और आसूं गैस लेकर तैनात है। साथ ही कंटीले तारों से सीमा को बींध दिया गया है।

वहीं सैंकड़ों किसान नेताओं समेत हजारों किसानों को गिरफ्तार किया गया है। लगातार ड्रोन कैमरे से निगरानी रखी जा रही है।

प्रदर्शन के दौरान हरियाणा में एक 40 वर्षीय किसान की मौत हो गई है।

किसान दिल्ली जाने पर अड़े
वहीं किसान किसी भी कीमत पर दिल्ली जाने पर अड़े हुए हैं। किसानों का कहना है कि वो दिल्ली जाकर ही दम लेंगे। अगर उन्हें दिल्ली नहीं जाने दिया जाएगा तो ये आंदोलन लंबा चलेगा। किसान अपने घरों से खाना-पानी, बिछौना लेकर निकले हैं। वो अकेले नहीं हैं उनके साथ उनका पूरा परिवार है। छोटे छोटे बच्चे, बूढ़े और गर्भवती स्त्रियां भी इस आंदोलन में शामिल हैं। रात में तमाम सीमाओं पर खुले आसमान तले रोटी बनाकर खाने और सोने के बाद सुबह उठकर किसानों ने दिल्ली के लिए कूच कर दिया, लेकिन उन्हें रोकने के लिए पुलिस बल पहले से ही मुस्तैद था।

हालात एक बार फिर कल जैसे ही बन रहे हैं। किसानों ने कई जगह पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ दी है। इसमें सिरसा, रोहतक, सोनीपत, पानीपत जैसे बॉर्डर शामिल हैं।

पश्चिमी यूपी के किसानों ने भरी हुंकार
पश्चिमी यूपी के कई इलाकों में किसान आंदोलन पर उतर आए हैं। भारी मात्रा में किसानों ने यमुना एक्सप्रेस वे पर पहुंचकर उसे जाम कर दिया है। वहीं बागपत, मुज़फ्फ़रनगर, मेरठ, गाजियाबाद, मथुरा और नोएडा में भी किसान बड़ी मात्रा में सड़कों पर उतर आए हैं। उन्हें रोकने के लिए दिल्ली से लगी गाजियाबाद, नोएडा, लोनी बॉर्डर सील कर दिया गया है। साथ ही भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। 

सरकार ने 3 दिसंबर को बात के लिए बुलाया
किसान आज आंदोलन कर रहे हैं और मोदी सरकार उनसे कह रही है कि आप से हम 3 दिसंबर को बात करेंगे। साथ ही सरकार किसान आंदोलन को गैर-जरूरी भी बता रही है। सरकार का कहना है कि किसानों से बातचीत का रास्ता हमेशा खुला हुआ है और सरकार लगातार किसानों से बातचीत कर रही है। इसके लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का नाम आगे किया गया है। नरेंद्र तोमर ने कहा कि किसानों को 3 दिसंबर को बातचीत करनी चाहिए और आंदोलन करने की कोई आवश्यकता नहीं है। सरकार किसानों की हर शंकाओं का समाधान करने के लिए तैयार है।

कई जगह लगा लंबा जाम, मेट्रो स्टेशन बंद
किसानों के रेले को बैरीकेड लगाकर रोकने और सीमा सील करने के चलते दिल्ली की सीमा से लगे तमाम हाईवे और मुख्य सड़कों पर कई किलोमीटर लंबा जाम लगा हुआ है। गुरुग्राम से आने वाले हर वाहन की कड़ी तलाशी की जा रही है, जिसके चलते कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया है। आने जाने वाले आम लोगों को हुत परेशानी उठानी पड़ रही हैं। वहीं कई मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए हैं। दिल्ली से गुरुग्राम और यूपी के नोएडा-गाजियाबाद जाने वाले मेट्रो स्टेशनों को दिल्ली की सीमा क्षेत्र वाले स्टेशनों पर ही रोक दिया गया है। वैशाली, होशियार सिंह, बहादुरगढ़ सिटी, पंडित श्री राम शर्मा, टिकरी बॉर्डर, टिकरी कलान, और घेवरा मेट्रो स्टेशन तथा ग्रीन लाइन बंद कर दी गई है।

मीडिया के हैरान करने वाले सवाल
मीडिया ने अभी तक आंदोलनकारी किसानों को ‘आतंकवादी’ या कृषि नक्सल नहीं कहा है। बाकी कई मीडिया चैनलों पर बैठकर सरकार और आरएसएस के लोग जनरल बक्शी स्टाइल में किसान आंदोलन को राजनीति से प्रेरित और विपक्षी दलों के किसान मजदूर संगठनों का आंदोलन बता रहे हैं। जी न्यूज किसान आंदोलन को ‘किसान कर्फ्यू’ बता रहा है तो, रिपब्लिक टीवी विपक्षी दलों के बहकावे में किसान कहकर भ्रम फैला रहा है। चैनल किसानों के खिलाफ़ लगातार आग उगल रहे हैं। कई न्यूज चैनल पूछ रहे हैं, जब सरकार किसानों से बात करने के लिए तैयार है तो वो क्यों दिल्ली जाना चाहते हैं। कितने शाति हैं ये न्यूज चैनल। किसान लगातार तीन महीने से आंदोलनरत हैं। सरकार अभी तक क्यों नहीं आगे आई बात करने?

बैंककर्मी और मजदूर भी हड़ताल पर
बैंक यूनियन और ट्रेड यूनियन की हड़ताल आज भी जारी है। हालांकि बैंक आज से खुल गए हैं।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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