Friday, December 9, 2022

अब बीजापुर के अंदरूनी इलाकों में पुलिस कैंप का विरोध शुरू, ग्रामीणों ने कहा-नहीं चाहिए सड़क और सुरक्षा

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जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में ग्रामीण पुलिस कैंप का लगातार विरोध कर रहे हैं। एक तरफ सिलगेर में पुलिस कैंप का विरोध थमा भी नहीं था कि अब अंदरूनी इलाके पुसनार और बुर्जी के ग्रामीण सुरक्षाबलों के कैंप और सड़क के विरोध में लामबंद हो गए हैं। गांगलूर इलाके के पुसनार गांव में 5 अक्टूबर से ग्रामीण आंदोलन में जुटे हुए हैं। फिलहाल पुसनार और बुर्जी गांव के सैकड़ों ग्रामीण आंदोलन कर रहे हैं। लेकिन यह भी बात निकल कर सामने आ रही है कि यदि इनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं तो आस-पास के दर्जनों गांवों के हजारों ग्रामीण कैंप के विरोध में लामबंद होंगे।

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रविवार को ग्रामीणों के आंदोलन के 20 दिन पूरे हो रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि 28 अक्टूबर तक वे लगातार आंदोलन जारी रखेंगे। 28 तारीख को विशाल रैली निकाली जाएगी। यदि इनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं तो आंदोलन लगातार जारी रहेगा। ग्रामीणों ने कहा कि हमें इलाके में न तो सड़क चाहिए और न सुरक्षा। सड़क बनती है तो फोर्स गांव में घुसेगी और बेकसूर ग्रामीणों को नक्सल प्रकरण में गिरफ्तार करेगी। साथ ही ग्रामीणों की हत्या भी की जाएगी।

मानव श्रृंखला बनाकर ग्रामीणों ने लिखा पुसनार

बीजापुर जिले में ऐसा पहली बार हुआ है कि आंदोलन कर रहे ग्रामीणों ने मानव श्रृंखला बनाई हो। पुलिस कैंप के विरोध के दौरान मानव श्रृंखला बनाकर कुछ और लिखा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह हमारा गांव है। यहां हम कैंप खुलने नहीं देंगे। लगभग 1 महीने पहले ही ग्रामीणों ने इलाके में प्रशासन द्वारा बनाई जा रही सड़क को भी जगह-जगह से काट दिया था।

पुसनार में प्रस्तावित है सुरक्षा बलों का कैंप

नक्सलियों का गढ़ कहे जाने वाले सिलगेर में कैंप स्थापित हो चुका है। जिसके बाद अब पुलिस बीजापुर जिले के गांगलूर इलाके के पुसनार में सुरक्षाबलों का कैंप स्थापित करने की योजना बना रही है। बताया जा रहा है कि यहां कैंप प्रस्तावित है। यह इलाका काफी संवेदनशील है। पुलिस का मानना है कि, यदि इन इलाकों में सुरक्षा बलों का कैंप स्थापित किया जाता है तो नक्सलियों की जबर्दस्त कमर टूटेगी। लेकिन कैंप स्थापित होने की भनक लगते ही ग्रामीण सड़क पर उतर आए हैं।

कब-कब कैंप का विरोध हुआ ?

जून 2019 में कोंडागांव में हजारों आदिवासियों ने सुरक्षा बल के कैंप का विरोध किया था। उनका कहना था कि क्षेत्र में विकास किया जाए। ग्रामीणों ने गांवों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की थी।

नंवबर 2019 में दंतेवाड़ा के पोटाली गांव में नए पुलिस कैंप खोले गए, जिसके खिलाफ आदिवासियों ने प्रदर्शन किया था।

जनवरी 2020 में बीजापुर के गांगलूर क्षेत्र के आदिवासी नए सुरक्षा कैंप की स्थापना के विरोध में सड़कों पर उतर आए थे। विरोध-प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों की सुरक्षा बल के जवानों के साथ जमकर झड़प भी हुई थी। प्रदर्शन कर रहे ग्रामीण आदिवासियों का कहना था कि इलाके में पुलिस कैंप की नहीं बल्कि स्कूल और अस्पताल की जरूरत है।

सितंबर 2020 में दंतेवाड़ा के अंतर्गत गुमियापाल अलनार में हजारों आदिवासियों ने एकजुट होकर नए कैम्प का विरोध किया था। ग्रामीणों का आरोप था कि पुलिस कैम्प के नाम पर उनकी जमीन का अधिग्रहण करेगी। आलनार की लौह अयस्क खदान निजी कम्पनी के लिए शुरू कराएगी।

17 दिसम्बर, 2020 से कांकेर के कोयलीबेड़ा ब्लॉक के परतापुर में आदिवासी अनिश्चितकालीन प्रदर्शन पर बैठ गए। उनका कहना है कि जिस जगह कैंप खोला गया है वह उनके देवताओं का स्थान है।

(छत्तीसगढ़ से जनचौक संवाददाता तामेश्वर सिन्हा की रिपोर्ट।)

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