Sunday, May 22, 2022

अहमदाबाद के माथे का कलंक बन गया है पिराना डंप साईट

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अहमदाबाद।अहमदाबाद का नरोल सर्कल नेशनल हाईवे नंबर- 8 पर स्थित है।यह हाईवे मुंबई और दक्षिण के राज्यों को जोड़ता है।पूरब की सड़क दिल्ली से जुड़ती है।पश्चिम में सौराष्ट्र को जोड़ती है।अहमदाबाद के सड़क आवागमन में नेशनल हाईवे न. 8 गुजरात की लाइफ लाइन है।अहमदाबाद का ट्रांसपोर्ट नगर , वटवा GIDC यहीं है।नरोल सर्कल से आधा किलो मीटर की दूरी पर पिराना डंप साईट है।जहाँ पूरे शहर का कचरा डंप किया जाता है।और अब यह एक विशाल पहाड़ का आकार ले लिया है।

22 मीटर ऊंचा होने के साथ ही 80 एकड़ इलाके में फैला हुआ है।जहाँ अहमदाबाद शहर का कचरा डंप किया जाता है।अहमदाबाद नगर निगम के अनुसार पिराना डंप साईट पर रोज़ाना लगभग 4000 मीट्रिक टन कचरा डाला जाता है।शहरियों द्वारा उत्पन्न कचरे के अलावा इंडस्ट्रियल वेस्ट , मेडिकल वेस्ट आदि चीजें भी यहां डंप की जाती हैं।1980 में नरोल नगर निगम का हिस्सा नहीं था।शहर से लगता ग्रामीण विस्तार था।लिहाजा 1980 में पिराना – नरोल रोड पर स्थित इस जगह पर नगर निगम द्वारा शहर का कचरा डंप किया जाने लगा।

अहमदाबाद का पिराना डंप साईट बिमारियों का पहाड़ है 

पिराना डंप साईट के एक तरफ धोराजी सोसाइटी और सिटीजन नगर है।दूसरी तरफ गणेश नगर और भीलवास है।यह जगह दानी लीमडा विधान सभा में आती है।जो अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित विधानसभा है।कचरे के खड़े इस पहाड़ से तीन किलो मीटर की दूरी पर मणिनगर है।जो 2014 से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री और मौजूदा प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की विधानसभा हुआ करती थी।पिराना डंप साईट के आस पास अंडर ग्राउंड पानी पूरी तरह से दूषित है।वायु प्रदूषण से भी आस पास की बस्तियों में रहने वालों में कई प्रकार की बीमारियां मिलती हैं।2013 में आईआईटी कानपुर द्वारा की गई स्टडी में पाया गया कि पिराना डंप साईट पर स्थित कचरे के पहाड़ में 35 से अधिक हानिकारक केमिकल हैं जो आस पास की बस्तियों में रहने वालों के स्वास्थ्य को हानि पहुंचाते हैं।

सेंट ज़ेवियर कॉलेज की एक स्टडी में पाया गया है कि “ पिराना डंप साईट के आस-पास वायु में PM1 की मात्रा इतनी अधिक है।जिसके चलते गर्भवती महिलाओं को premature birth की समस्या हो सकती है।इस कचरे के पहाड़ से लगी हुई बस्तियों में कैंसर , टीबी , स्किन और साँस की बीमारियाँ आम हैं।कोलकाता के रहने वाले आदिल हुसैन जो ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में पीएचडी के छात्र थे।हुसैन मास मीडिया में पीएचडी के उद्देश्य से अहमदाबाद आए थे।जब उन्होंने पिराना डंप साईट से लगी बस्ती धोराजी सोसाइटी और सिटीजन नगर के 40 मकानों का सर्वे कर कचरे के पहाड़ का लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर की जानकारी हासिल की तो पता चला 40 मकानों के सर्वे में 19 लोगों की मृत्यु किडनी , टीबी , श्वसन संबंधी बीमारियों से हुई थी।मृतक की आयु 14 से 60 वर्ष की थी।

गुजरात हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद नगर निगम द्वारा वेस्ट मैनेजमेंट दिशा निर्देश का पालन नहीं होता

देश में किसी भी डंप साईट को तय करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा दिशा निर्देश बनाए गए हैं।दिशा निर्देश के अनुसार ही राज्य और नगर निगम को कचरा प्रबंधन करना होता है।लेकिन अहमदाबाद ही नहीं देश के अधिकतर कचरा प्रबन्धन में केन्द्रीय दिशा निर्देशों की अनदेखी की जाती है।वर्ष 2016 में गुजरात हाई कोर्ट में सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद कलीम सिद्दीकी और पूर्व आईपीएस राहुल शर्मा (अधिवक्ता) द्वारा जनहित याचिका की गई थी।याचिका में पिराना डंप साईट को हटाने और केन्द्र सरकार की कचरा प्रबंधन दिशा निर्देश का पालन करने की मांग  की गई थी।2019 में कोर्ट के आए निर्णय में गुजरात हाई कोर्ट ने कचरे के पहाड़ को 1 वर्ष में हटाने को कहा था।

अहमदाबाद नगर निगम ने कोर्ट से तीन वर्ष का समय मांगा है।नगर निगम ने कई कंपनियों को कचरा प्रोसेस करने का ठेका दिया है।जितना कचरा प्रोसेस होता है उतना ही डंप कर दिया जाता है।तीन वर्षों में डंप साईट पर कोई भी काम उत्साहजनक नहीं रहा है।अहमदाबाद नगर निगम में  विरोध पक्ष के नेता शेहजाद खान आरोप लगाते हैं कि जिन कंपनियों को कचरा प्रोसेस करने का कार्य दिया गया है वो कंपनिया भ्रष्टाचार में लिप्त हैं।जबकि वेस्ट मैनेजमेंट के डायरेक्टर हर्षद सोलंकी किसी भी भ्रष्टाचार से इनकार करते हैं।हर्षद सोलंकी कचरे के एक पहाड़ को प्रोसेसिंग कर समाप्त करने को नगर निगम की बड़ी कामयाबी मानते हैं।लेकिन दूसरी तरफ पिछले एक साल के दौरान एक अन्य कचरे का पहाड़ खड़ा हो जाने पर बात भी नहीं करते हैं।

अहमदाबाद नगर निगम NGT और गुजरात हाई कोर्ट के आदेशों की अवमानना कर रहा है।कोर्ट के आदेश के बावजूद नगर निगम वेस्ट मैनेजमेंट के दिशा निर्देश का पालन नहीं कर रहा है।जिस कारण डंप साईट पर कई घटनाएँ हुईं हैं।जिसमें कई लोगों को अपनी जान भी गवानी पड़ी है।सितंबर, 2020 में पिराना डंप साईट पर 12 वर्षीय आदिवासी लड़की नेहा वसावा की कचरे का पहाड़ गिरने से मौत हो गयी थी।नेहा के साथ 7 वर्षीय अनिल मारवाड़ी भी कचरे के पहाड़ में दब गया था।लेकिन रेस्क्यू टीम द्वार चले 48 घंटे के ऑपरेशन में अनिल को बचा लिया गया।और नेहा नहीं बच पायी।2019 सितंबर में 5 वर्षीय साहिल अंसारी की पिराना डंप साईट पर एक केमिकल से बने दलदल में गिरने से मौत हो गयी थी।कचरे का पहाड़ अहमदाबाद की सुन्दरता पर एक कलंक ही नहीं एक नर्क भी है।

पिछले वर्ष कचरे का एक पहाड़ धोराजी सोसाइटी पर गिर गया था।जिससे कई मकान टूट गए थे।सोसाइटी का रास्ता मलबे के कारण बंद हो गया था।एक मकान की दीवार तोड़ कर रास्ता बनाया गया।केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई गाइड लाइन का पालन न होने के कारण कचरे के पहाड़ आम नागरिकों के लिए समस्या बनते जा रहे हैं।solid waste management rule 2016 के अनुसार कचरा डंप साईट से 200 मीटर के रेडियस में कोई मोहल्ला या बस्ती नहीं होना चाहिएपरन्तु अहमदाबाद का कचरा डंप साईट धोराजी सोसाइटी से शून्य मीटर की दूरी पर हैडंप साईट की वायर फेंसिंग होनी चाहिए।कचरा डालने के बाद 10 cm मिटटी डालनी होती हैबरसात के समय 40-50 cm मिट्टी डालनी होती ह।परन्तु गुजरात हाई कोर्ट और NGT के आदेश के बावजूद सरकारी दिशा निर्देश का पालन नहीं हो रहा है।

धोराजी सोसाइटी से सटा कचरे का पहाड़ बरसात में तबाही का बन सकता है कारण

अहमदाबाद नगर निगम में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने 14 मार्च को दाना पीठ स्थित नगर निगम कचेहरी का घेराव किया थाकांग्रेस की मांग थी कि धोराजी सोसाइटी और कचरे के पहाड़ के बीच 200 मीटर का स्पेस खाली किया जाएपिछले वर्ष बरसात में कचरे का पहाड़ धोराजी सोसाइटी पर गिर गया था। मानसून से पहले नगर निगम ने 200 मीटर का स्पेस खाली नहीं किया तो जून – जुलाई में बरसात होने पर बड़ी घटना भी हो सकती हैक्योंकि धोराजी सोसाइटी से लगकर बना कचरे का पहाड़ पिछले वर्ष की तुलना में और बड़ा हो गया है। 

 भाजपा शासित अहमदाबाद नगर निगम विपक्ष की नहीं सुनता है

विपक्ष का आरोप है कि “कचरे की प्रोसेसिंग के नाम पर कंपनियों और नगर निगम के अधिकरियों द्वारा भ्रष्टाचार किया जा रहा है। विरोध पक्ष के नेता शेहजाद खान ने वेस्ट मैनेजमेंट विभाग के डायरेक्टर हर्षद सोलंकी पर सीधे भ्रषाचार का आरोप लगाते हुए उन्हें निष्कासित करने की मांग कीविपक्ष चाहता है कि इस मामले की जांच हो कांग्रेस द्वारा जल्द से जल्द कचरे के पहाड़ को न हटाने पर रास्ता रोको आन्दोलन की धमकी दी गई है14 मार्च को कांग्रेस पार्टी के नेता इस मुद्दे पर नगर निगम का घेराव कर नगर निगम के कमिश्नर को आवेदन देने गए थे

लेकिन आवेदन न लेना पड़े इसलिए अहमदाबाद नगर निगम के म्युनिसिपल कमिश्नर अपने कार्यालय में उपस्थित नहीं थे।अनुपस्थिति के कारण विरोध पक्ष के नेता शेहजाद खान ने आवेदन को उनके ऑफिस के दरवाज़े पर चिपका दिया। शेहजाद पठान ने महापौर किरीट परमार को अस्पतालों की दर्जनों फाइलें दिखाईऔर बताया कि नगर निगम की लापरवाही के कारण पिराना डंप साईट के आस पास के लोग गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैंमहापौर ने आश्वासन तो दिया लेकिन अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया

दंगे में एक बार मारे गए अब कचरे के पहाड़ से तिलतिल कर मरने को मजबूर हैं नरोडा पाटिया पीड़ित 

सिटीजन नगर की रेहाना बानो ने जनचौक को बताया कि 14 वर्षीय बेटे और 45 वर्षीय पति की मौत सांस की बीमारी से होने के बावजूद हम लोग यहाँ रहने को मजबूर हैंक्योंकि कमाने वाला कोई नहीं है जैसे तैसे वह अपना और अपनी बेटी का पेट पालती हैंकिसी अन्य इलाके में किराये पर मकान लेने पर तीन चार हज़ार रु. किराया देना पड़ेगारेशमा शेख जो 2002 के दंगे के समय तक नरोडा पाटिया में रहती थींरेशमा और उनका परिवार दंगे के बाद शाह आलम कैंप में आ गया थाबाद में कचरे के पहाड़ के पास सिटीजन नगर बनाकर इन लोगों को बसा दिया गयारेशमा बताती हैं, “दंगे में एक बार मारे गए थेयहाँ तो कचरे के पहाड़ से रोज़ाना मारे जा रहे हैंदो दो हज़ार रुपये की क्रीम लिखकर डॉक्टर दे देते हैंकमाई का अधिकतर हिस्सा दवा में खर्च हो जाता हैदवाई के खर्च ने परिवार को तोड़ रखा है

पिराना डंप साईट का पहाड़ अहमदाबाद की सुन्दरता में एक दाग हैकचरे को प्रोसेस कर खाद बनाई जाती हैऔर कचरे को कई प्रकार से उपयोग किया जाता हैडेनमार्क सहित अन्य कई देश कचरा आयत कर अपने देश में प्रोसेस करते हैंप्रोसेस से खाद और गैस बनाई जाती हैभारत में भी कचरे से बहुत कुछ किया जा सकता हैलेकिन भ्रष्ट सिस्टम ने इसे समस्या बना दिया है

(अहमदाबाद से कलीम सिद्दीकी की रिपोर्ट।)

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